शिमला.गलोड़.उपमंडल बड़सर के लोहारली निवासी पूर्व सैनिक रघुवीर सिंह ने लोगों के सामने स्वरोजगार की नई मिसाल कायम की है। आजकल उनके खेत फूलों से लहलहा रहे हैं और आम के पौधों में फल लग रहे हैं। इसका श्रेय उन्होंने कड़ी मेहनत को दिया है। उन्होंने रिटायरमेंट के बाद घर के आसपास पड़ी बंजर जमीन को खोदकर फूलों की खेती शुरू की।
भारतीय शहरों का ज़िक्र हो और सड़कों की बात चले तो ध्यान आती हैं टूटी-बदहाल सड़कें और बड़े-बड़े गड्ढे. ये सड़कें न सिर्फ ज़िंदगी की रफ्तार धीमी करती हैं बल्कि शहरों और कस्बों की खूबसूरती में पैबंद की तरह खटकती हैं. लेकिन भारत का एक शहर ऐसा भी है जहां एक शख्स ने कूड़े-कचरे और बेकार प्लास्टिक से सड़कें बनाने की नायाब
तरनतारन [लुधियाना],[धर्मवीर मल्हार]। आज की नई पीढ़ी से अगर किसी राजनेता की बात की जाए तो उसकेजेहन में क्या छवि उभरेगी। यही ना, साफ-शफ्फाक लंबा कुर्ता-पायजामा, हाथ में ब्लैकबेरी फोन, अगल-बगल में एक दो गनर और नीचे कोई लंबी सी चमचमाती कार। लेकिन इसकेठीक उलट अगर आप तरनतारन जिले के गाव तुड़ की गलियों में पुरानी सी साइकिल पर आते-जाते और
पटना [भारतीय वसंत कुमार]। बिहार में वैशाली जिले के मंसूरपुर में रहने वाले राघव की कहानी इन दिनों देश के बच्चे पढ़ने लगे हैं। राघव ने बिना किसी तकनीकी शिक्षा के अपने गांव के लिए 'कम्युनिटी रेडियो' का माडल विकसित किया। इस राह में उसे कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ा। पुलिस के चक्कर भी लगाने पड़े। लेकिन उसके प्रयास
डोरीगंज [सारण, श्रीराम तिवारी]। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका अब काफी सराहनीय हो गई है। अब महिलाएं पुरुषों से कदम से कदम मिलाकर चल ही नहीं रही वरन उन्हें रास्ता भी दिखा रही है। सदर प्रखंड अंतर्गत खलपुरा पंचायत की मुस्लिम परिवार की महिलाएं जो मानस संस्था द्वारा गठित समूहों में चूड़ी फरोश महिला मंडल की