आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में जारी बाढ़ से लाखों की तादाद में ग्रामीण गरीबी रेखा से नीचे आ गए हैं। बाढ़ की विभीषिका तो थमने का नाम नहीं ले रही है लेकिन इस विभीषिका से, गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों की गणना के लिए जो मानक प्रस्तावित भोजन का अधिकार विधेयक के संकल्प पत्र में सुझाये गए हैं,
आंध्रप्रदेश के अनुभवों से सीख लेते हुए राजस्थान सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना(नरेगा) को प्रभावकारी तरीके से लागू करने और उसपर कारगर नियंत्रण रखने के लिए सोशल ऑडिट को संस्थायी रुप देने का फैसला किया है। अशोक गहलोत नीत सरकार की प्रतिबद्धताओं में सोशल ऑडिट का या निदेशालय बनाना भी शामिल है ताकि नरेगा से जुड़ी जनसुनवाई का
हिन्द महासागर की परिधि में पड़ने वाले अठारह देश १४ अक्तूबर के दिन संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा सहायता प्राप्त एक सुनामी एक्सरसाईज में शिरकत कर रहे हैं। गौरतलब है कि १४ अक्तूबर को वर्ल्ड डजास्टर रिडक्शन डे भी मनाया जाता है। साल २००४ में सुनामी ने अपना कहर ढाया था और इसके बाद सुनामी जैसी आपदा की पूर्व चेतावनी देने
सुप्रीम कोर्ट का हालिया बयान कहता है-देश की अदालतों में कुल ढाई करोड़ से ज्यादा मुकदमे निपटारे की बाट जोह रहे हैं। विधि मंत्रालय का सुझाव है कि देश में अदालतों की तादाद मौजूदा संख्या के पांच गुनी बढ़ायी जानी चाहिए। मगर सरकार ने ग्राम न्यायालय अधिनियम में प्रावधान किया है कि महज ५००० ग्राम न्यायालय स्थापित किए जाएंगे- यानी
दिल्ली सरकार ने बीपीएल परिवारों के कैश फॉर फूड योजना का प्रस्ताव किया है। इसके विरोध में देश के कई नागरिक और मजदूर संगठन अगले सप्ताह देश की राजधानी में एकत्र हो रहे हैं।इन संगठनों एकजुट होकर गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों की पहचान के लिए ज्यादा बेहतर मानक तैयार करने के लिए सरकार पर दबाव बनाएंगे। देश