किसान और आत्महत्या

किसान और आत्महत्या

What's Inside

 

2016 में प्रकाशित नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की नई रिपोर्ट एक्सीडेन्टल डेथ्स् एंड स्यूसाइड इन इंडिया(2015) के कुछ प्रमुख तथ्यनिम्नलिखित हैं—

http://www.im4change.org/farm-crisis/farmers039-suicides-14.html?pgno=2#accidental-deaths-suicides-in-india-2015-released-in-2016 

 

• साल 2015 में भारत में कुल 1,33,623 लोगों ने आत्महत्या की. 

 

•  आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या साल 2015 में 8,007 रही जो कि इस साल आत्महत्या करने वाले कुल लोगों की संख्या का 5.99 फीसद है. साल 2015 में कुल 4595 खेतिहर मजदूरों ने आत्महत्या की जो 2015 में आत्महत्या करने वाले कुल लोगों की संख्या का 3.44 फीसद है. अगर किसान और खेतिहर मजदूरों की संख्या को आपस में जोड़ें तो कहा जा सकता है कि 2015 में खेतिहर काम में लगे कुल 12,602 लोगों ने आत्महत्या की जो आत्महत्या करने वाले कुल लोगों(2015) की संख्या का 9.43 फीसद है.

 

• साल 2015 में आत्महत्या करने वाले किसानों में पुरुषों की संख्या 7,566 थी जबकि आत्महत्या करने वाली महिला-किसानों की संख्या 441 रही यानी आत्महत्या करने वाले किसानों में पुरुषों की संख्या प्रतिशत पैमाने पर 94.49 फीसद और महिलाओं की संख्या 5.51 फीसद है. 

 

•  आत्महत्या करने वाले किसानों में 27.41 फीसद सीमांत किसान थे जबकि ऐसे 45.41 फीसद किसान छोटे किसान की श्रेणी में आते हैं यानी 2015 में आत्महत्या करने वाले कुल 8007 किसानों में 72.79 फीसद(कुल 5813) सीमांत और छोटी जोत के किसान थे. 

 

•  किसान-आत्महत्या की सबसे ज्यादा घटनाएं महाराष्ट्र से प्रकाश में आयीं. महाराष्ट्र में 2015 में कुल 3030 किसानों ने आत्महत्या की. इसके बाद तेलंगाना का स्थान है जहां आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या 1,358 रही. कर्नाटक में 1197 किसानों ने 2015 में आत्महत्या की. प्रतिशत पैमाने पर देखें तो कुल किसान-आत्महत्या में महाराष्ट्र की किसान-आत्महत्या की संख्या 37.8 फीसद रही, तेलंगाना की 17.0 फीसद और कर्नाटक की 14.9 प्रतिशत. छत्तीसगढ़ (854 किसान-आत्महत्या), मध्यप्रदेश (581 किसान-आत्महत्या) तथा आंध्रप्रदेश (516 आत्महत्या) में कुल किसान-आत्महत्या का क्रमशःr 10.7 फीसद, 7.3 फीसद और 6.4 फीसद केंद्रित रहा. 2015 में इन छह राज्यों से कुल किसान-आत्महत्याओं का 94.1 फीसद हिस्सा(8,007 में 7,536) केंद्रित रहा.  

 

• ' कर्जदारी' और 'खेती-बाड़ी से जुड़ी परेशानियां' किसान-आत्महत्याओं की सबसे बड़ी वजह रही. 2015 में कुल 8,007 में 3,097 यानी 38.7 फीसद मामलों में किसान-आत्महत्या की वजह कर्जदारी या खेती-बाड़ी से जुड़ी परेशानियां साबित हुईं. 2015. किसान-आत्महत्या की अन्य बड़ी वजहों में शामिल हैं 'पारिवारिक समस्याएं' (933 किसान-आत्महत्या), ' बीमारी' (842 किसान-आत्महत्या) और ' नशाखोरी' (330 किसान-आत्महत्या), क्रमश 11.7 फीसद, 10.5 फीसद तथा 4.1 फीसद किसान-आत्महत्याओं की वजह साबित हुए. 

 

• साल 2015 में पुरुष किसानों की आत्महत्या की सबसे बड़ी वजह रही कर्जदारी. कर्जदारी के कारण 2978 पुरुष किसानों ने आत्महत्या की. पुरुष किसानों की आत्महत्या की दूसरी बड़ी वजह रही खेती-बाड़ी से जुड़े मामले. खेती-बाड़ी से जुड़ी परेशानियों के कारण 1494 किसानों ने आत्महत्या की. 

 

•  महिला किसानों के मामले में कर्जदारी और पारिवारिक समस्याएं आत्महत्या की प्रमुख वजह रही. 2015 में महिला किसान-आत्महत्या के कुल 441 मामले प्रकाश में आये. इसमें 119 मामलों में आत्महत्या की वजह कर्जदारी रही जो कि 27 फीसद है. महिला किसान-आत्महत्या के 80 मामलों में प्रमुख वजह पारिवारिक समस्याएं रहीं जो 18.1 फीसद है. 

 

•  2015 में खेतिहर मजदूरों के आत्महत्या के मामलों में सबसे बड़ी वजह' पारिवारिक समस्या ' और बीमारी ' साबित हुई. खेतिहर मजदूरों की आत्महत्या के कुल 4595 मामलों में 1843 यानी 40.1 फीसद मामलों में कारण पारिवारिक समस्याएं साबित हुई जबकि आत्महत्या के 872 यानी 19.0 फीसद मामलों में बड़ी वजह बीमारी साबित हुई. 

 

•  कर्नाटक में किसान-आत्महत्या की 79.0 फीसद घटनाओं में मुख्य वजह कर्जदारी रही. महाराष्ट्र में 26.2 फीसद किसान-आत्महत्याओं की वजह खेती-बाड़ी से जुड़ी समस्याएं साबित हुईं. इन समस्याओं का मुख्य अर्थ है- किसी कारण से फसल का मारा जाना..

 

•  किसान-आत्महत्याओं के 71.6 घटनाओं में मृतक की उम्र 30 से 60 साल के बीच थी. 

 

• आत्महत्या करने वाले 9 फीसद किसान 60 साल या इससे ज्यादा उम्र के थे. 

 

• बिहार, गोवा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मिजोरम, नगालैंड, उत्तराखंड तथा पश्चिम बंगाल से किसान-आत्महत्या की कोई घटना प्रकाश में नहीं आई. देश के 7 केंद्रशासित प्रदेशों में भी 2015 में किसान-आत्महत्या की कोई घटना प्रकाश में नहीं आई. 

 

• गोवा, मणिपुर, नगालैंड तथा पश्चिम बंगाल से 2015 में किसी भी खेतिहर मजदूर की आत्महत्या की घटना प्रकाश में नहीं आई. केंद्रशासित प्रदेशों में पुद्दुचेरी से 12 खेतिहर मजदूरों के आत्महत्या की घटनाएं दर्ज हुईं जबकि शेष केंद्रशासित प्रदेशों से ऐसी कोई घटना प्रकाश में नहीं आई. 

 

•  स्यूसाइड इन फार्मिंग सेक्टर शीर्षक से अध्याय 2ए में किसानों और खेतिहर मजदूरों की आत्महत्या के व्यापक आंकड़े दर्ज हैं. आंकड़ों को कृषि-मंत्रालय तथा गृहमंत्रालय की देखरेख में तैयार और प्रस्तुत किया गया है. नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के 2013 तक के एडीएसआई रिपोर्ट में सिर्फ किसान-आत्महत्याओं का जिक्र रहता था. 

 




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