किसान और आत्महत्या

किसान और आत्महत्या

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नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो द्वारा प्रकाशित एक्सीडेंटल डेथ एंड स्यूसाइड इन इंडिया-2013 नामक दस्तावेज के अनुसार-

 
·  साल 2003-2013 यानी एक दशक की अवधि में हर साल औसत एक लाख से ज्यादा व्यक्तियों ने भारत में आत्महत्या की।

·  साल 2003 में भारत में आत्महत्या करने वाले लोगों की संख्या 1,10,851 थी जो साल 2013 में बढ़कर 1,34,799 हो गई। यह एक दशक के भीतर तकरीबन 21 प्रतिशत का इजाफा है। साल 2011 तक प्रतिवर्ष आत्महत्या की संख्या में वृद्धि के रुझान हैं इसके बाद के सालों में घटती के रुझान देखे जा सकते हैं।

·  साल 2003-2013 की अवधि में जनसंख्या में 15 फीसदी की बढोत्तरी हुई जबकि आत्महत्या दर में वृद्धि इस अवधि में 5.7 प्रतिशत की रही। इस तरह आत्महत्या दर में दी गई अवधि में मिश्रित रुझान देखने को मिलता है।

·  आत्महत्या करने वाले कुल लोगों में सरकारी श्रेणी की नौकरी करने वाले लोगों की संख्या 1.3% है जबकि प्राइवेट श्रेणी की नौकरी करने वाले लोगों की संख्या 9.2% ।

·   आत्महत्या करने वाले कुल लोगों में पब्लिक सेक्टर यानी सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरी करने वाले लोगों की संख्या 1.9% है जबकि छात्रों की संख्या 6.2% और बेरोजगारों की संख्या 7.2% ।

·   आत्महत्या करने वाले कुल लोगों में स्वरोजगार में लगे लोगों की संख्या 38.0% है। इस 38.0% की तादाद में 8.7% लोग खेती-बाड़ी यानी किसान श्रेणी के हैं जबकि 5.2% लोग छोटे-मोटे व्यवसायी तथा 2.9% लोग पेशेवर श्रेणी के।

·    मध्यप्रदेश में आत्महत्या करने वाले कुल लोगों में 25.1% तादाद महिलाओं की है, गुजरात में जितने लोगों ने साल 2013 में आत्महत्या की राह अपनायी उसमें महिलाओं की तादाद 24.2% है जबकि उत्तरप्रदेश में 22.1%।

·    आत्महत्या करने वाले लोगों में सर्वाधिक संख्या (22.1%) प्राथमिक स्तर तक की शिक्षा हासिल करने वाले लोगों की है। माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा प्राप्त करने वाले लोगों की संख्या 23.6% तथा निरक्षर लोगों की संख्या 18.5% है। आत्महत्या करनेवाले कुल लोगों में मात्र 3.3% लोग स्नातक स्तर की शिक्षा वाले थे तथा मात्र 0.5% लोग एम ए स्तर की शिक्षा प्राप्त थे।

·    आंध्रप्रदेश में आत्महत्या करनेवाले कुल लोगों में निरक्षर लोगों की तादाद 33.1%, दादरा नगर हवेली में 31.0%, राजस्थान में 30.3% तथा अरुणाचल प्रदेश में 28.4% थी। सिक्किम में आत्महत्या करनेवाले 40.2% लोग प्राथमिक स्तर की शिक्षा प्राप्त थे जबकि गुजरात में 37.6% , नगालैंड में 32.4% तथा पश्चिम बंगाल में ऐसे लोगों की तादाद 32.2% थी।  मिजोरम में आत्महत्या करने वाले लोगों में 61.1% लोग माध्यमिक श्रेणी की शिक्षा प्राप्त थे जबकि त्रिपुरा में ऐसे लोगों की तादाद 41.3% तथा अंडमान निकोबार में 38.3% और नगालैंड में 37.8% थी।

·     आत्महत्या करने वाले लोगों में सर्वाधिक तादाद महाराष्ट्र के लोगों(16,622) की है। इसके बाद तमिलनाडु (16,601) का स्थान है जो कि देशस्तर पर कुल आत्महत्या की घटनाओं की संख्या का 12.3 प्रतिशत( क्रमश महाराष्ट्र और तमिलनाडु के लिए अलग-अलग) है।

·     साल 2013 में आत्महत्या करने वाले लोगों में सर्वाधिक संख्या(12.3 प्रतिशत) महाराष्ट्र राज्य के लोगों की रही। साल 2012 में भी महाराष्ट्र आत्महत्या करने वाले लोगों की संख्या के मामले में दूसरे नंबर(13.4 प्रतिशत) पर था। साल 2011 में महाराष्ट्र में आत्महत्या करने वाले लोगों की संख्या आत्महत्या के शिकार कुल लोगों में 11.8 प्रतिशत थी।

·    देशस्तर पर दर्ज आत्महत्या की कुल घटनाओं(1,34,799) में आंध्रप्रदेश (14,607 आत्महत्या), पश्चिम बंगाल (13,055 आत्महत्या) और कर्नाटक (11,266 आत्महत्या) में दर्ज आत्महत्या की घटनाओं का प्रतिशत क्रमशः 10.8%, 9.7% और 8.4% है। इन पाँच राज्यों में आत्महत्या करने वाले लोगों की संख्या(साल 2013 के लिए) देश में आत्महत्या करने वाले कुल लोगों की संख्या का 53.5% है। आत्महत्या की शेष 46.5% घटनाएं 23 अन्य राज्यों तथा 7 केंद्रशासित प्रदेशों की हैं।

·     केंद्रशासित प्रदेशों में आत्महत्या की सर्वाधिक घटनाएं (2,059) दिल्ली में हुईं, इसके बाद पडुचेरी (546) का नंबर है। कुल सात केंद्रशासित प्रदेशों में आत्महत्या की दर्ज घटनाएं देश में दर्ज आत्महत्या की घटनाओं की कुल संख्या का 2.2% हैं। इसके विपरीत देश के 53 बड़े शहरों में दर्ज आत्महत्या की घटनाओं की कुल संख्या देश में दर्ज आत्महत्या की कुल घटनाओं का 15.8% हैं।

·     आत्महत्या करने की एक बड़ी वजह‘ पारिवारिक समस्या’(24.0%) रही जबकि दूसरी बड़ी वजह रही बीमारी 19.6% । ‘नशे की लत’ (3.4%), ‘प्रेम-संबंध’ (3.3%), ‘दीवालिया होना और आर्थिक-स्थिति में अचानक परिवर्तन’ (2.0%), 'परीक्षा में असफलता’ (1.8%), ‘दहेज संबंधी झगड़े’ (1.7%) और ‘ बेरोजगारी’ (1.6%) आत्महत्या की अन्य प्रमुख वजहों में शामिल हैं।

·     साल 2013 में आत्महत्या करने वाले लोगों में पुरुष: स्त्री अनुपात 67.2:32.8 का रहा। यह पिछले साल यानी 2012 की तुलना में तनिक ज्यादा (66.2:33.8) है।

·     जहां तक कारणों का सवाल है, आत्महत्या करने वाली कुल महिलाओं में सर्वाधिक संख्या ‘दहेज संबंधी विवाद’(97.1%), वाले कारण की श्रेणी में है। इसके बाद ' बांझपन ‘ (64.8%), तथा तलाक (55.6%) जैसे कारण महिलाओं की आत्महत्या के प्रेरक कारणों में अव्वल रहे।

·     आत्महत्या करने वाले लोगों में युवा (15-29 years) तथा मध्य आयु-वर्ग (30-44 years) के लोगों की संख्या बहुतायत है। आत्महत्या करने वाले कुल लोगों में 34.4% 15-29 आयु-वर्ग के थे जबकि 33.8% मध्य आयु-वर्ग के।

·     आत्महत्या करने वाली कुल महिलाओं में गृहिणी श्रेणी की महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा है (कुल 44,256 में 22,742 यानी 51.4%)। आत्महत्या करने वाले कुल लोगों की संख्या का यह 16.9 प्रतिशत है। (कुल 1,34,799 में 22,742 ).

 


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