किसान और आत्महत्या

किसान और आत्महत्या

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नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो द्वारा प्रकाशित एक्सीडेंटल डेथ एंड स्यूसाइड इन इंडिया-2012 नामक दस्तावेज के अनुसार- http://ncrb.gov.in/

मूल दस्तावेज के लिए कृपया यहां क्लिक करें


•    साल 2012 में एक लाख से ज्यादा(1,35,445) लोगों ने आत्महत्या के चलते जान गंवायी।


•    साल 2002-2012 के दशक में भारत में आत्महत्या की तादाद में 22.7 फीसदी की बढोत्तरी हुई। साल 2002 में आत्महत्या करने वालों की संख्या 1,10,417 थी जो साल 2012 में बढ़कर 1,35,445 हो गई। इस अवधि में देश की आबादी में बढ़ोत्तरी 15 फीसदी की हुई है।


•    आत्महत्या करने वाले लोगों में स्वरोजगार में लगे लोगों की तादाद सबसे ज्यादा यानि 38.7% थी और इस तादाद में 11.4% लोग खेती-बाड़ी या इससे संबद्ध काम में लगे थे। स्वरोजगार में लगे जितने लोगों ने साल 2012 में आत्महत्या की उसमें 4.7% किसी ना किसी तरह का व्यवसाय करते थे जबकि 2.9 फीसदी लोग हाथ के हुनर से जीविका चलाने वाले लोगों में थे।


•    आर्थिक हैसियत में अचानक बदलाव 2 फीसदी मामलों में आत्महत्या की वजह रहा जबकि गरीबी आत्महत्या के 1.9 फीसदी मामलों में मुख्य कारण रही।


•    मिजोरम में जितने लोगों ने साल 2012 में आत्महत्या की उसमें 38.2% लोग बेरोजगार थे। साल 2012 में दिल्ली में आत्महत्या करने वाले कुल लोगों में बेरोजगारों की संख्या 19.4% थी।


•    आत्महत्या करने वाले कुल लोगों में सरकारी नौकरी करने वाले लोगों की संख्या 1.4% थी जबकि निजी क्षेत्र में नौकरी करने वाले लोगों की कुल संख्या 9.4%। आत्महत्या करने वाले लोगों में सार्वजनिक क्षेत्र में नौकरी करने वाले लोगों की संख्या 1.8 फीसदी थी।


•    आत्महत्या करने वाले लोगों में छात्रों का प्रतिशत 5.5% था जबकि बेरोजगार लोगों का संख्या 7.4% थी।


•    साल 2012 में जितने लोगों ने आत्महत्या की उसमें ज्यादातर(23.0%) प्राथमिक स्तर तक शिक्षा प्राप्त थे। आत्महत्या करने वाले कुल लोगों में निरक्षर लोगों की संख्या 19.7 फीसदी थी जबकि आत्महत्या के 23 फीसदी मामलों में इस नियति के शिकार व्यक्ति माध्यमिक स्तर की शिक्षा प्राप्त थे।


•    आत्महत्या करने वाले लोगों में मात्र 3.4% स्नात्क स्तर की शिक्षा प्राप्त थे जबकि स्नात्तकोत्तर स्तर की शिक्षा प्राप्त ऐसे व्यक्तियों की संख्या आत्महत्या करने वाले कुल लोगों की कुल तादाद में 0.6 फीसदी थी।


•    आंध्रप्रदेश में 34.7%, पंजाब में 33.8% और राजस्थान में  32.0% फीसदी मामलों में पाया गया कि आत्महत्या करने वाला व्यक्ति निरक्षर है। गुजरात में  36.2% मामलों में, पश्चिम बंगाल में 34.5% मामलों में और मेघालय में 33.6% मामलों में पाया गया कि आत्महत्या करने वाला व्यक्ति अपर-प्राइमरी स्तर तक शिक्षा प्राप्त है।


•    साल 2012 में सर्वाधिक(12.5% ) आत्महत्याएं तमिलनाडु(16,927) में हुईं। आत्महत्याओं की तादाद के मामले में महाराष्ट्र दूसरे नंबर ( आत्महत्याओं की कुल संख्या-16,112) पर रहा। पश्चिम बंगाल में आत्महत्याओं की तादाद  14,957, आंध्रप्रदेश में 14,238 और कर्नाटक में 12,753 रही जो देशस्तर पर आत्महत्याओं की कुल तादाद का क्रमश 11.9%, 11.0%, 10.5%  और 9.4% है।


•    आत्महत्या करने वालों में 25.6 फीसदी ने ‘पारिवारिक समस्याओं की वजह से ऐसा कदम उठाया जबकि 20.8 फीसदी मामलों में आत्महत्या की वजह बीमारी रही।


•    आत्महत्या करने वालों की कुल संख्या में गृहणियों की तादाद 21,904 थी जो आत्महत्या करने वाली महिलाओं की कुल संख्या का 53.8% फीसदी है और आत्महत्या करने वाले कुल लोगों की संख्या का 18.2% फीसदी।


•    साल 2012 में सर्वाधिक(12.5% ) आत्महत्याएं तमिलनाडु(16,927) में हुईं। आत्महत्याओं की तादाद के मामले में महाराष्ट्र दूसरे नंबर (आत्महत्याओं की कुल संख्या-16,112) पर रहा। पश्चिम बंगाल में आत्महत्याओं की तादाद  14,957, आंध्रप्रदेश में 14,238 और कर्नाटक में 12,753 रही जो देशस्तर पर आत्महत्याओं की कुल तादाद का क्रमश 11.9%, 11.0%, 10.5%  और 9.4% है।


•    आत्महत्या करने वालों में 25.6 फीसदी ने ‘पारिवारिक समस्याओं की वजह से ऐसा कदम उठाया जबकि 20.8 फीसदी मामलों में आत्महत्या की वजह बीमारी रही।


•    आर्थिक हैसियत में अचानक बदलाव 2 फीसदी मामलों में आत्महत्या की वजह रहा जबकि गरीबी आत्महत्या के 1.9 फीसदी मामलों में मुख्य कारण रही।

 



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