किसान और आत्महत्या

किसान और आत्महत्या

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नेशनल क्राईम रिकार्ड ब्यूरो द्वारा प्रकाशित एक्सीडेंटल डेथ्स् एंड स्यूसाईड-2011 नामक दस्तावेज के अनुसार, http://ncrb.nic.in/:

 

--साल 2011 में प्रति घंटे 16 लोगों ने आत्महत्या की।

 

--पुरुषों के मामले में आत्महत्या की मुख्य वजह सामाजिक-आर्थिक रहे जबकि महिलाओं के मामले में भावनात्मक और निजी कारण।

 

--आत्महत्या करने वाले पुरुषों में 71.1% विवाहित थे जबकि महिलाओं में 68.2% विवाहित थीं।.

 

--लगातार तीन सालों से बाकी राज्यों की अपेक्षा पश्चिम बंगाल में आत्महत्या करने वालों की तादाद ज्यादा बनी हुई है। साल 2009 में आत्महत्या करने वाले कुल लोगों में पश्चिम बंगाल के  11.5% लोग थे, साल 2010 में 11.9% फीसदी और साल 2011 में 12.2%.

 

--पश्चिम बंगाल (12.2%), महाराष्ट्र और तमिलनाडु (प्रत्येक 11.8%), आंध्रप्रदेश (11.1%) और कर्नाटक (9.3%) से आत्महत्या करने वाले लोगों की तादाद, आत्महत्या करने वाले कुल लोगों की तादाद में 56.2% फीसदी रही।.

 

--साल 2011 में किसान आत्महत्याओं की संख्या() पिछले साल यानी 2010 के मुकाबले कम रही। साल 2010 में 15,933 किसानों ने आत्महत्या की थी। साल 2011 में छत्तीसगढ़ में किसी किसान ने आत्महत्या नहीं की जबकि साल 2010 में छत्तीसगढ़ में 1422 किसानों ने आत्महत्या की थी।

 

--महाराष्ट्र में साल 2011 में  3,337 किसानों ने आत्महत्या की। साल 2010 में महाराष्ट्र में  3,141 किसानों ने आत्महत्या की थी।

 

--साल  2004-2011 के बीच किसान-आत्महत्याओं की संख्या में  कमी के रुझान हैं। साल 2004 में सर्वाधिक यानी  18,241 किसानों ने आत्महत्या की।

 

--साल 2004 से अबतक(2011) केंद्र में मौजूद यूपीए सरकार के शासन की अवधि में देश में कुल  1.18 लाख किसानों ने आत्महत्या की है। गुजरात, कर्नाटक, और यूपी में साल 2004 के बाद से किसान-आत्महत्याओं की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है।

 

--पूर्वोत्तर के राज्य असम से भी किसान-आत्महत्या की संख्या चिंताजनक है। यहां साल 2010 में कुल 269 किसानों ने आत्महत्या की जबकि साल 2011 में 312 किसानों ने।

 




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