किसान और आत्महत्या

किसान और आत्महत्या

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नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो द्वारा प्रस्तुत एक्सीडेंटल डेथ एंड स्यूसाइड (2009) नामक दस्तावेज के अनुसार- http://ncrb.gov.in/CD-ADSI2009/suicides-09.pdf http://ncrb.gov.in/CD-ADSI2009/snapshots.pdf

http://ncrb.gov.in/CD-ADSI2009/table-2.11.pdf

  देश में साल 2009 में एक लाख से अधिक (1,27,151) लोगों ने आत्महत्या की। पिछले साल जितने लोगों ने आत्महत्या( (1,25,017) की उसकी तुलना में यह 1.7% फीसदी अधिक है।

 

  देश में आत्महत्या की तादाद एक दशक (1999–2009) में 15.0% ( साल 1999 मे 1,10,587 से बढ़कर साल 2009 में 1,27,151 ) बढ़ी है।.

 

   साल 2009 में जितने लोगों ने आत्महत्या की उसमें स्वरोजगार में लगे लोगों की तादाद 39.8% है।इसमें  13.7% की तादाद खेती-किसानी में लगे लोगों की है जबकि 6.1% व्यापार से जुड़े हैं और 2.9% पेशेवर कोटि के हैं।.

 

  साल 2009  में मिजोरम में जितने लोग आत्महत्या के शिकार हुए उसमें 55.1% खेती-किसानी से जु़ड़े थे।मणिपुर में आत्महत्या करने वाले लोगों की कुल संख्या में  29.6% फीसदी तादाद बरोजगारी की थी।

 

यद्यपि महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या की तादाद 2008 के मुकाबले 2009 में घटी(930 की कमी) है फिर भी किसानों की आत्महत्या के मामले में महाराष्ट्र लगातार दसवें साल भी देश में सबसे आगे (2,872 किसान आत्महत्याएं) बना हुआ है।

 

  साल 2009 में कुल 17,368 किसानों ने आत्महत्या की यानी साल 2008 के मुकाबले एक साल के अंदर किसानों की आत्महत्या की तादाद में 1,172 आत्महत्याओं की बढोतरी हुई है।

 

किसानों की आत्महत्या की तादाद में पिछले साल के मुकाबले 7 फीसदी की रफ्तार से बढ़ोतरी हुई है।

 

  साल 2009 में 1,27,151 लोगों ने आत्महत्या की। एक साल के अंदर आत्महत्या की दर देश में 1.7% फीसदी बढ़ी है।पिछले साल कुल आत्महत्याओं की तादाद 1,25,017 थी।

 

  साल 2009 में देश में प्रतिदिन 348 लोगों ने आत्महत्या की इसमें किसान-आत्महत्याओं की संख्या प्रतिदिन 48 रही। साल 2004 के बाद से प्रतिदिन औसतन 47 किसानों ने आत्महत्या की है यानी हर 30 मिनट पर एक किसान आत्महत्या।

 

  साल 2009 में जितने लोगों ने आत्महत्या की उसमें निजी और सार्वजनिक क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की तादाद क्रमश  8.4% और 2.3% फीसदी रही जबकि बेरोजगारों की तादाद 7.8% फीसदी।.

 

   साल 2009 में आत्महत्या करने वाले कुल लोगों की संख्या में सरकारी नौकरी करने वालों की तादाद 1.3% फीसदी है जबकि इस साल जितनी महिलाओं ने आत्महत्या की उसमें हाऊसवाइफ(गृहिणी) की संख्या 25,092 यानी 54.9% रही जो आत्महत्याओं की कुल संख्या का  19.7% है।

 

  आत्महत्या करने वाले लोगों में जो नियमित वेतनभोगी थे उनमें 40.9% की उम्र 30-44 साल की थी जबकि आत्महत्या करने वाले कुल बेरोजगारों में 39.0 फीसदी इस आयु-वर्ग के थे।

 

  पश्चिम बंगाल में आत्महत्या करने वाले लोगों की संख्या सर्वाधिक (14,648) रही जो कुल आत्महत्याओं का 11.5% है। इसके बाद नंबर आंधप्रदेश का रहा जहां कुल 14,500 लोगों ने आत्महत्या की। तमिलनाडु में आत्महत्या करने वालों की संख्या 14,424 , महाराष्ट्र में  14,300 और कर्नाटक में  12,195  रही जो देश में हुई कुल आत्महत्याओं का क्रमश  11.4%, 11.3%, 11.2%  और  9.6% फीसदी है।

 

  देश में हुई कुल आत्महत्या का 55.1% हिस्सा केवल इन पांच राज्यों में केंद्रित है।

 

    राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो सामूहिक-पारिवारिक आत्महत्या की जिन घटनाओं की सूचना मिली है उसमें आत्महत्या करने वालों की तादाद 209 है। इसमें पुरुषों की संख्या  95  और महिलाओं की  114 है। 14 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों ने इस शीर्षक से जानकारी मुहैया नहीं करायी।

 

  पारिवारिक कलह और  बीमारीकी वजह से आत्महत्या करने वालों की संख्या क्रमश 23.7% और 21.0% है। पारिवारिक कलह और नशे की आदत के कारणों से आत्महत्या करने वालों की तादाद पिछले तीन सालों से बढ़ रही है।

 

   आत्महत्या करने वाले लोगों में अधिकतर (23.7%) माध्यमिक स्तर तक शिक्षित थे। आत्महत्या करने वाले कुल लोगों में निरक्षर और प्राथमिक स्तर तक की शिक्षा प्राप्त लोगों की संख्या क्रमश 21.4% फीसदी और 23.4% फीसदी थी।.

 

  साल २००९ में आत्महत्या करने वाले कुल लोगों में केवल 3.1% फीसदी स्नातक-परास्नातक थे। सिक्किम में आत्महत्या करने वाले लोगों में  51.9% फीसदी निरक्षर थे जबकि गुजरात में आत्महत्या करने वालों में. 36.5% फीसदी तादाद प्राथमिक स्तर की शिक्षा प्राप्त लोगों की थी। मिजोरम में आत्महत्या के शिकार लोगों में 68.1% फीसदी और पुद्दुचेरी में आत्महत्या के शिकार लोगों में 59.1% तादाद माध्यमिक स्तर तक की शिक्षाप्राप्त लोगों की थी।

 

 

 



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