भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार

 

 

हालात २००५

ट्रान्सपेरेन्सी इंडिया इन्टरनेशनल और सेटर फॉर मीडिया स्टडीज ने बीस राज्यों में १४४०५ नागरिकों के सर्वेक्षण के आधार पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। इंडिया करप्शन स्टडी-२००५ नामक इस रिपोर्ट के अनुसार-

http://www.prajanet.org/newsroom/internal/tii/ICS2k5_Vol1.pdf:

 

  • भ्रष्टाचार की मौजूदगी को जांचने के लिए शोध में कुल ग्यारह सेवाओं को शामिल किया गया था।एक तिहाई नागरिकों का मानना था कि इन ग्यारह सेवाओं के उपभोक्ता और उससे संबंधित अधिकारी दोनों को ही यह बात पता होती है कि कितनी रकम बतौर घूस देने पर सेवा को हासिल किया जा सकता है।शोध में शामिल ग्यारह सेवाओं के नाम हैं-पुलिस सेवा (अपराध और यातायात), न्यायपालिका, भू-प्रशासन, नगरपालिका सेवाएं, सरकारी अस्पताल, सार्वजनिक वितरण प्रणाली(पीडीएस-राशन कार्ड और आपूर्ति) , आयकर विभाग (व्यक्ति की पहुंच),जलापूर्ति,स्कूल (१२ वीं कक्षा तक) , और ग्रामीण वित्तीय सेवाएं।
  • भ्रष्टाचार के पैमाने पर पुलिस महकमा सबसे आगे था।पुलिस महकमें के बाद निचली अदालतों और जमीन के दस्तावेज तैयार करने वाले तथा जमीन का पंजीकरण वाले विभाग का सबसे ज्यादा भ्रष्ट पाये गए।जहां तक सरकारी अस्पतालों में भ्रष्टाचार का सवाल है-लोगों से कहा जाता है कि दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं।मरीजों को दाखिला देने से इनकार किया जाता है,डॉक्टर से परामर्श करने और उसकी सेवाएं लेने से मरीजों को रोका जाता है।बिजली आपूर्ति की दशा को सुधारने के लिए कई सुधार किये गये हैं लेकिन इस अमले में भ्रष्टाचार का स्तर ज्यादा है।इन सेवाओं की अपेक्षा सार्वजनिक वितरण प्रणाली की स्थिति कुछ अच्छी है क्योंकि इसमें सीधे सीधे घूस देने के लिए नहीं कहा जाता।
  • सरकारी सेवाओं को मुहैया कराने के मामले में केरल में सबसे कम भ्रष्टाचार है और बिहार में सबसे ज्यादा।भष्टाचार के मामले में जम्मू-कश्मीर का नंबर बिहार के तुरंत बाद है।तमिलनाडु,महाराष्ट्र,कर्नाटक,राजस्थान और असम में बी भ्रष्टाचार तुलनात्मक रुप से ज्यादा है।इन राज्यों की तुलना में हिमाचल प्रदेश में कहीं कम भ्रष्टाचार है।
  • पिछले साल (यानी २००४) में जितने लोगों ने पुलिस महकमे से सहायता मांगी उनमें से तीन चौथाई लोगों पुलिस सहायता से संतुष्ट नहीं थे।८८ फीसदी लोगों ने माना कि पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार है।
  • जहां तक न्यायपालिका का सवाल है,इसकी सेवाओं को हासिल करने के लिए जितने लोगों ने घूस दिये उसमें से ४१ फीसदी ने कहा कि हमने फैसले पर असर डालने के लिए रिश्वत दी,३१ फीसदी ने कहा कि अदालती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए घूस देनी पड़ी जबकि २८ फीसदी ने किसी दस्तावेज की प्रतिलिपि या फिर केस को सुनवाई वाली सूची में रखने जैसे दैनंदिन कामों के लिए रिश्वत दी।

 

Rural Experts

Related Articles

 

Write Comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Video Archives

Archives

share on Facebook
Twitter
RSS
Feedback
Read Later