भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार

 

 

नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित सीएचआरआई के नये शोध- फैक्ट एंड फिक्शन- गवर्नमेंटस् एफोर्टस् टू कॉमबैक्ट करप्शन नामक अध्ययन के तथ्य के अनुसार—

http://www.humanrightsinitiative.org/download/CHRI-IndiaCorruptionstats.pdf 

 

--- एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक 2001 से 2015 के बीच 29 राज्यों और 7 संघशासित प्रदेशों में भ्रष्टाचार के कुल 54,139 मामले दर्ज हुए. आई पेड ब्राइव नाम के वेबसाइट के मुताबिक इसी अवधि में तकरीबन दोगुने (1,16,010) लोगों ने कहा कि हमें किसी ना किसी काम के लिए घूस देनी पड़ी है.

 

--- साल 2001 स 2015 के बीच देश भर में लगभग पांच लाख( (5,01,852 ) मामले दर्ज हुए जबकि इसी अवधि में भ्रष्टाचार के केवल 54,139 मामले दर्ज हुए. दूसरे शब्दों में हत्या के प्रति 10 मामलों पर भ्रष्टाचार के दर्ज मामलों की संख्या केवल 1 रही.

 

---- 2001 से 2015 के बीच अपहरण अथवा अगवा करने की कुल 5.87 लाख घटनाएं प्रकाश में आयीं दूसरे शब्दों में कहें तो अपहरण अथवा अगवा करने के प्रत्येक 11 मामलों पर देश भर में भ्रष्टाचार का केवल एक मामला विधि-प्रवर्तन अधिकरणों द्वारा दर्ज हुआ.

 

----- 2001 से 2015 के बीच डकैती के देश भर में 3.54 लाख (3,54,453 ) मामले दर्ज हुए दूसरे शब्दों में डकैती के प्रत्येक 6 मामलों पर भ्रष्टाचार का केवल एक मामला विधि-प्रवर्तन अधिकरणों द्वारा दर्ज हुआ.

 

---- देश के 29 राज्यों और 7 संघशासित प्रदेशों में पंद्रह साल की अवधि में 54,139 मामले दर्ज हुए जिसमें केवल 55.26% (29,920 ) मामलों में अदालती सुनवाई की कार्यवाही पूरी हुई. शेष मामले या तो अदालतों में लंबित है या अभियुक्त मामले के अदालत पहुंचने से पहले ही छूट गये अथवा प्रथम सूचना रिपोर्ट ही निरस्त हो गई.

 

---  जिन राज्यों में भ्रष्टाचार के दर्ज मामले सबसे ज्यादा संख्या में अदालती सुनवाई के लिए पहुंचे उन राज्यों में केरल में दोषसिद्धि की दर सबसे ज्यादा( 62.95%) रही.

 

---- बंगाल, गोवा, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा तथा मेघालय में भ्रष्टाचार के बहुत से मामलों की अदालती सुनवाई हुई लेकिन एक भी मामले में अभियुक्त पर दोषसिद्धि नहीं हो सकी.  पंद्रह साल की अवधि में मणिपुर में केवल एक मामले में अभियुक्त को दोषी करार दिया जा सका.

 

---- हिमाचल प्रदेश को छोड़ दें तो 28 राज्यों और 7 संघशासित प्रदेशों में पंद्रह साल की अवधि में भ्रष्टाचार के मामलों में 43,394 अभियुक्तों पर मुकदमे चले. इस अवधि में 68.19% (29,591) अभियुक्त अदालतों द्वारा साक्ष्य के अभाव में बरी करार दिए गए. दूसरे शब्दों में कहें तो 31.81% (13,803)  अभियुक्तों को ही पंद्रह साल की अवधि में भ्रष्टाचार के मामलों में सजा हो पायी.

 

----    जम्मू-कश्मीर में 90 फीसद भ्रष्टाचार के मामलों में अभियुक्त साक्ष्य के अभाव में बरी करार दिये गये जबकि गोवा, नगालैंड तथा त्रिपुरा में शत-प्रतिशत अभियुक्त अदालतों से बरी हुए. 

करप्शन परसेप्शन इंडेसक्स सार्वजनिक क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के बारे में विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। 0 से 100 अंकों के पैमाने पर 0 का अंकमान सर्वाधिक भ्रष्टाचार की स्थिति का संकेत करता है जबकि 100 का अंक सर्वाधिक भ्रष्टाचार-मुक्त स्थिति का। अंकों के पैमाने पर जिस देश ने जितने कम अंक अर्जित किए हैं उनके बारे में माना जा सकता है कि वहां रिश्वतखोरी का प्रचलन उतना ही ज्यादा है, भ्रष्टाचारियों को दंड उतना ही कम मिलता है और वहां संस्थाएं नागरिकों की जरुरतों के प्रति उतनी ही कम जवाबदेह हैं।

 


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