भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार

 

 

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशल द्वारा प्रस्तुत ग्लोबल करप्शन बैरोमीटर 2013 नामक दस्तावेज के अनुसार http://www.transparency.org/gcb2013/report

 http://www.transparency.org/gcb2013/country/?country=india:

 भारत के 54 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्होंने बीते 12 महीने में पुलिस, न्यायपालिका, रजिस्ट्री, भूमि, स्वास्थ्य, शिक्षा, टैक्स या ऐसी किसी अन्य सेवा-सुविधा को हासिल करने के लिए एक ना एक मामले में रिश्वत दी है।

   भारत के 40 फीसदी उत्तरदाताओं का मानना था कि बीते दो सालों में भ्रष्टाचार काफी बढ़ा है।

  1-5 अंकों के एक पैमाने पर ( जहां 1 का अर्थ है बिल्कुल भ्रष्ट नहीं और 5 का अर्थ है बहुत ज्यादा भ्रष्ट) भारतीय मतदाताओं ने राजनीतिक दलों को 4.4 अंक देते हुए उन्हें सर्वाधिक भ्रष्ट माना। भ्रष्टाचार के मामले में पुलिस का स्थान भारतीय उत्तरदाताओं की नजर में इसके तुरंत बाद आता है जिसे उन्होंने भ्रष्टाचार के पैमाने पर 4.1 अंक दिए। भारतीय उत्तरदाताओं की नजर में सबसे कम भ्रष्ट सेना है। सेना को भारतीय उत्तरदाताओं ने सबसे कम भ्रष्ट माना और भ्रष्टाचार के पैमाने पर सेना को 2.5 अंक हासिल हुए. स्वयंसेवी संगठनों को भ्रष्टाचार के पैमाने पर भारतीय उत्तरदाताओं ने सर्वेक्षण में 2.9 अंक दिए जबकि मीडिया को 3.2।

  सर्वेक्षण में 86 फीसदी भारतीय उत्तरदाताओं का मानना था कि राजनीतिक दल बहुत ज्यादा भ्रष्ट हैं जबकि 75 फीसदी उत्तरदाताओं का मानना था कि पुलिस बहुत ज्यादा भ्रष्ट है. महज 20 फीसदी उत्तरदाताओं का कहना था कि सेना बहुत ज्यादा भ्रष्ट है।

सर्वेक्षण में शामिल भारतीय लोगों में 62 फीसदी ने कहा कि उनके परिवार के एक ना एक सदस्य ने पुलिस को घूस दिया जबकि 61 फीसदी ने रजिस्ट्री और परमिट के बाबत घूस देने की बात कही जबकि 58 फीसदी का कहना था कि उन्हें जमीन से संबंधित कामों के लिए घूस देना पडा

   सर्वेक्षण में शामिल भारतीय उत्तरदाताओं में से 30 फीसदी ने इस बात से सहमति जतायी कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में साधारण आदमी सार्थक भूमिका निभा सकता है जबकि 26 फीसदी भारतीय उत्तरदाता इस बात से सहमत नहीं थे।

    सर्वेक्षण में शामिल भारतीय उत्तरदाताओं में 99 फीसदी ने भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम के तह पाँच गतिविधियों में हिस्सेदारी करने की इच्छा जतायी है। ये गतिविधियां हैं- किसी अर्जी पर हस्ताक्षर करना, विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेना, किसी संगठन से जुड़ना, सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल करना और इस इस्तेमाल के लिए ज्यादा खर्च करना।

    वैश्विक स्तर पर देखें तो चार में से एक व्यक्ति यानि 27 फीसदी ने कहा कि बीते बारह महीने में उसे सार्वजनिक संस्था के साथ अपने बरताव में या फिर सार्वजनिक सेवाओं को हासिल करने में घूस देना पडा है।

    सर्वेक्षण में कुल आठ सेवाओं को लेकर सवाल पूछे गये थे। इनमें पुलिस और अदालत के बारे में विश्वभर के लोगों ने माना कि उनके भ्रष्ट होने की आशंका सबसे ज्यादा है। सर्वेक्षण में शामिल तकरीबन 31 फीसदी ने कहा कि उन्हें सेवा हासिल करने के लिए पुलिस महकमे को घूस देनी पड़ी। 

 

 

 

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