मानवाधिकार

 

नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के दस्तावेज क्राइम इन इंडिया 2016 स्टैटिक्स(नवंबर 2017 में जारी) के मुताबिक http://ncrb.gov.in/ :

 

मानवाधिकार उल्लंघन के मामले

• साल 2016 में पुलिसकर्मियों द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन करने के कुल 209 मामले दर्ज हुए. इनमें 73 मामले झूठे पाये गये. मानवाधिकार उल्लंघन के कुल 50 मामलों में पुलिसकर्मियों पर आरोप-पत्र दाखिल हुए. साल 2016 में मानवाधिकार उल्लंघन के किसी भी मामले में पुलिसकर्मियों पर दोषसिद्धि नहीं हो सकी. 

 

• साल 2016 में अखिल भारतीय स्तर पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ अपराध के 3082 मामले दर्ज हुए.

 

•  साल 2016 में राष्ट्रीय स्तर पर पुलिस हिरासत में मौत के कुल 92 मामले प्रकाश में आये. इनमें 8 मामलों में बंदी की मौत पुलिस हिरासत में पिटाई के कारण हुई कही जा सकती है. जबकि 1 मामले में बंदी की मौत हिरासत में लिए जाने से पहले लगी चोट के कारण हुई. पुलिस हिरासत में मौत का एक मामला भीड़ के हाथों लगी चोट का है जबकि 2 मामलों में अपराधियों द्वारा हुए हमले जिम्मेवार रहे. पुलिस हिरासत में मौत के 38 मामले आत्महत्या के हैं जबकि 4 मामलों में बंदी की मौत पुलिस हिरासत से भागने की घटना में हुई. पुलिस हिरासत में मौत के 28 मामले बीमारी से मृत्यु के हैं जबकि 7 मामले स्वाभाविक मृत्यु के. ऐसा 1 मामला सड़क-दुर्घटना में हुई मृत्यु का है जबकि 2 मामलों में अन्य कारण जिम्मेवार हैं.

 

• साल 2016 में पुलिस फायरिंग में 92 नागरिकों की मौत हुई और 351 नागरिक घायल हुए.

 

• साल 2016 में पुलिस के लाठी-चार्ज में 35 नागरिक मारे गये और 759 घायल हुए थे.

 

महिलाओं के खिलाफ अपराध

 

•  साल 2016 में महिलाओं के विरुद्ध हुए संज्ञेय अपराधों की दर 55.2 रही, साल 22015 में यह दर 54.2 थी. यहां अपराध दर की गणना के लिए महिलाओं के विरुद्ध हुए कुल संज्ञेय अपराधों में महिला आबादी की कुल संख्या से भाग देकर उसे 100000 की संख्या से गुणा किया गया है. संक्षेप में प्रति लाख महिला आबादी के खिलाफ हुए संज्ञेय अपराधों की संख्या. 

 

•  महिलाओं के खिलाफ हुए कुल अपराध(इंडियन पेनल कोड तथा एसएलएल के तहत) में हिस्सेदारी के प्रतिशत के हिसाब से देखें तो यूपी सबसे आगे(14.5 प्रतिशत) है. इसके बाद पश्चिम बंगाल(9.6 प्रतिशत), महाराष्ट्र(9.3 प्रतिशत) तथा राजस्थान(8.1 प्रतिशत) है.

 

• महिलाओं के खिलाफ हुए कुल संज्ञेय अपराधों की दर के लिहाज से असम सबसे आगे(131.3 अपराध प्रति लाख महिला आबादी) है. इसके बाद ओड़िशा(84.5) तथा तेलंगाना(83.7) का नंबर है.   

 

• साल 2016 में केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ हुए संज्ञेय अपराधों की दर सबसे ज्यादा(160.4) थी

 

• बलात्कार से संबंधित संज्ञेय अपराधों की दर सिक्किम में सबसे ज्याद( 30.3) रही. बलात्कार संबंधी संज्ञेय अपराधों की दर के मामले में साल 2016 में इसके बाद दिल्ली (22.6) तथा अरुणाचल प्रदेश (14.7) का नंबर है.

 

• बलात्कार के 94.6  फीसद मामलों( आईपीसी के सेक्शन 376 तथा पोक्सो एक्ट के सेक्शन 4 और 6 के तहत दर्ज) मामलों में आरोपी को पीड़ित का परिचित पाया गया. 

 

• साल 2016 में बलात्कार संबंधी संज्ञेय अपराधों के कुल 38,947 मामले प्रकाश में आये.

 

• साल 2015 में बलात्कार संबंधी कुल 34651 मामले प्रकाश में आये थे, साल 2016 में ऐसे अपराधों की संख्या(38,947 ) में 12.4 प्रतिशत का इजाफा हुआ है.

 

• मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में क्रमश 4,882 (12.5 प्रतिशत) और 4,816 (12.4 प्रतिशत) बलात्कार के मामले प्रकाश में आये जो कि देश में सर्वाधिक है. साल 2016 में महाराष्ट्र में बलात्कार के 4,189  मामले (10.7 प्रतिशत)  प्रकाश में आये.

 

• महिला की गरिमा पर हमला करने की नीयत से हुए संज्ञेय अपराधों की की दर 13.8 रही. कुल संख्या के लिहाज से आंकड़ा 84,746 रही. 

 

•  साल 2016 में महिला के पति या उसके रिश्तेदारों के द्वारा क्रूरता के व्यवहार से संबंधित अपराधों की दर 18.0 रही. साल 2016 में ऐसे कुल अपराधों की संख्या 1,10,378 रही.

 

•  महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों की संख्या में एक साल के भीतर( 2015 से 2015) 2.9 फीसद का इजाफा हुआ है. साल 2016 में महिलाओं के खिलाफ हुए कुल अपराधों की संख्या 3,38,954 थी जबकि 2015 में ऐसे अपराधों की तादाद  3,29,243 थी.

 

बच्चों के खिलाफ अपराध

• साल 2016 में भारत में बच्चों के खिलाफ हुए संज्ञेय अपराधों की दर 2014 में 20.1 थी, 2015 में यह बढ़कर 21.1 हो गई और 2016 में 24.0 पर जा पहुंची है. 

 

• बच्चों के खिलाफ हुए संज्ञेय अपराधों की दर के मामले में दिल्ली (146.0) सबसे आगे है. इसके बाद अंडमान निकोबार (61.4), चंडीगढ़ (55.5) तथा सिक्किम (55.0) का स्थान है.

 

• बच्चों को जान से मार देने के अपराध सबसे ज्यादा (21) उत्तरप्रदेश में हुए. इसके बाद ऐसे मामलों में राजस्थान और मध्यप्रदेश का नंबर है. इन दोनों राज्यों में प्रत्येक में साल 2016 में बच्चों को मार देने की 14 घटनाएं प्रकाश में आयीं.

 

•  साल 2016 में भ्रूणहत्या के सबसे ज्यादा मामले(52) उत्तरप्रदेश में प्रकाश में आये. भ्रूणहत्या के मामले में दूसरे और तीसरे नंबर पर क्रमशः राजस्थान ((21) और मध्यप्रदेश (19) हैं.

 

• बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराध 2015 की तुलना में 2016 में बढ़े हैं. साल 2015 में बच्चों के खिलाफ 94,172 मामले प्रकाश में आये थे जबकि 2016 में 1,06,958 मामले. यह 13.6 फीसद की बढ़ोत्तरी है.

 

•  बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराध में अगवा और अपहरण के वारदात 52.3 फीसद रहे. इसके बाद एक बड़ी संख्या पोक्सो अधिनियम में वर्णित(बच्चों को यौन दुर्व्यवहार से बचाने का कानून) प्रावधानों के तहत दर्ज मामलों की संख्या रही.

 

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विरुद्ध अपराध-

 

• अनुसूचित जाति के विरुद्ध होने वाले कुल संज्ञेय अपराधों की दर 2014 के 20.1 से घटकर 19.2 पर पहुंची लेकिन 2016 में इसमें इजाफा हुआ और अनुसूचित जाति के विरुद्ध होने वाले संज्ञेय अपराधों की दर 2016 में 20.3 हो गई है.(यहां अपराध की दर की गणना के लिए अनुसूचित जाति के विरुद्ध हुए कुल दर्ज संज्ञेय अपराधों की संख्या को अनुसूचित जाति की आबादी में कुल तादाद से भाग देकर उसमें 100000 से गुणा किया गया है यानि अनुसूचित जाति के व्यक्तियों की प्रति लाख संख्या पर संज्ञेय अपराधों की संख्या)

 

• साल 2016 में अनुसूचित जाति के विरुद्ध हुए कुल संज्ञेय अपराधों में सबसे ज्यादा तादाद मध्यप्रदेश(43.4) में रही. इसके बाद राजस्थान(42.0) तथा गोवा(36.7) का स्थान है.

 

• अनुसूचित जाति के व्यक्तियों के खिलाफ हुए अपराधों की संख्या में 2016 में 5.5 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. साल 2015 में इस श्रेणी के अपराधों की संख्या 38,670 थी जबकि 2016 में 40,801.

 

•  साल 2016 में अनुसूचित जाति के खिलाफ हुए कुल अपराधों में प्रतिशत मात्रा में हिस्सेदारी के लिहाज से देखें तो सबसे ज्यादा तादाद (25.6 प्रतिशत) यूपी की दिखती है. इसके बाद बिहार(14.0प्रतिशत) तथा राजस्थान(12.6 प्रतिशत) का स्थान है. 

 

•  अनुसूचित जनजाति के खिलाफ हुए संज्ञेय अपराधों की दर साल 2014 में 6.5 थी जो साल 2015 में घटकर 6.0 प्रतिशत हो गई लेकिन साल 2016 में इसमें इजाफा(6.3) हुआ है.

 

• साल 2016 में अनुसूचित जनजाति के खिलाफ हुए कुल संज्ञेय अपराधों की दर सबसे ज्यादा केरल(37.5) में रही. इसके बाद अंडमान निकोबार(21.0) तथा आंध्रप्रदेश(15.4) का स्थान है.

 

•साल 2015 की तुलना में अनुसूचित जनजाति के खिलाफ हुए अपराधों में 4.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. साल 2015 में इस श्रेणी के कुल 6276 मामले प्रकाश में आये जबकि साल 2016 में 6568 मामले.

 

• साल 2016 में अनुसूचित जनजाति के खिलाफ हुए कुल अपराधों में सर्वाधिक हिस्सेदारी मध्यप्रदेश(27.8 प्रतिशत) की रही. इसके बाद राजस्थान(18.2 प्रतिशत) तथा ओड़िशा(10.4 प्रतिशत) का स्थान है.

 

 


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