मानवाधिकार

 

 

वाक फ्री फाऊंडेशन द्वारा प्रस्तुत ग्लोबल स्लेवरी इंडेक्स 2014 नामक रिपोर्ट के तथ्यों के अनुसार-

http://d3mj66ag90b5fy.cloudfront.net/wp-content/uploads/20
14/11/Global_Slavery_Index_2014_final_lowres.pdf

 

•    भारत की आबादी का 1.14 प्रतिशत हिस्सा यानी तकरीबन 1 करोड़ 40 लाख लोग गुलामी के आधुनिक रुपों के शिकार हैं।.

•    दासता की आशंका के मामले मं भारत 56.7 अंकों के साथ 167 देशों में 63वें स्थान पर है।

•    भारत में सर्वाधिक सामाजिक सुरक्षा से सर्वाधिक वंचित दलितजन हैं। शोषण के दुष्चक्र और दासता के आधुनिक रुपों से जकड़ने की सर्वाधिक आशंका दलितों के बारे में है।.

•    भारत में तकरीबन 90 फीसदी कामगार अर्थव्यवस्था के अनियोजित क्षेत्र में काम करते हैं. अनियोजित क्षेत्र में काम की दशाएं अत्यंत अनियत हैं.

•    सरकारी प्रयासों द्वारा दासता के विभिन्न रुपों को समाप्त करने के मामले में भारत 167 देशों के बीच 59 वें स्थान पर है।
 
•    2013 में प्रकाशित ग्लोबल स्लेवरी इंडेक्स की तुलना में 2014 के स्लेवरी इंडेक्स रिपोर्ट में दासता में जकड़े लोगों की संख्या बढ़ी हुई दर्ज की गई है। वर्ष 2013 की रिपोर्ट में दासता के आधुनिक रुपों में जकड़े लोगों की संख्या 29.8 मिलियन थी जो 2014 में बढ़कर 35.8 मिलियन हो गई है।

•    गुलामी के नये रुपों ने विश्व में एक बड़े उद्योग का रुप ले लिया है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार लोगों से जबरिया मजदूरी कराके सालाना 150 अरब डॉलर के अवैध लाभ की उगाही की जाती है। दुनिया के कम से कम 58 देशों के 122 वस्तुओं के उत्पादन में लोगों से एक ना एक रुप में गुलामी करवायी जाती है।

•    भारत में मानव-तस्करी की जांच के लिए 215  इकाइयां काम कर रही हैं। मानव-तस्करी को रोकने के ऐसे प्रयास के बावजूद बीते साल मात्र 13 लोगों को मानव-व्यापार के मामले में दोषी सिद्ध किया जा सका। साल 2014 में गृह-मंत्रालय ने मानव-तस्करी निरोधी गतिविधियों के संबंध में सूचना देने के लिए एक एंटी-ट्रैफिकिंग               पोर्टल बनायी गई लेकिन इस पोर्टल पर बंधुआ मजदूरी से संबंधित जानकारी नदारद है।

 

 


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