मानवाधिकार

हेल्पेज इंडिया द्वारा प्रस्तुत एल्डर्स एब्यूज इन इंडिया(2013-14) नामक रिपोर्ट के तथ्यों के अनुसार :


http://www.im4change.org/siteadmin/tinymce//uploaded/Elder
%20Abuse%20in%20India%202014.pdf

 

 • साल 2014 में बुजुर्गों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार की घटनाओं में तेज इजाफा हुआ। पिछले (साल के 23 प्रतिशत से बढ़कर 2014 में 50 प्रतिशत)

 • दुर्व्यवहार के शिकार 46 फीसदी बुजुर्गों ने अपने साथ होने वाले ऐसे बरताव के प्रमुख कारण की पहचान करते हुए कहना है कि दुर्व्यवहार करने वाले पर उनकी भावनात्मक निर्भरता थी इसलिए वे दुर्व्यवहार के शिकार हुए। 45 फीसदी बुजुर्गों ने कहा कि दुर्व्यवहार का प्रमुख कारण दुर्व्यवहार करने वाले पर आर्थिक रुप से निर्भर रहना है जबकि 38 प्रतिशत बुजुर्गों ने कहा कि दुर्व्यवहार के लिए बदलती मान-मर्यादाओं जिम्मेवार हैं।

 •दुर्व्यवहार के अंतर्गत अपशब्द का प्रयोग (41%), अवमानना (33%) और उपेक्षा (29%) का बरताव सर्वाधिक पाया गया।

 • बुजुर्गों से सर्वेक्षण के दौरान दुर्व्यहार करने वाले व्यक्ति के रुप में अपने परिवार के सदस्यों को लक्ष्य करने के लिए कहा गया। परिवार की बहू((61%) और बेटा (59%) इस मामले में बुजुर्गों की नजर में सर्वाधिक दोषी करार पाए गए। यही रुझान पिछले साल के सर्वेक्षण में भी पाया गया था। सर्वेक्षण में 77 फीसदी ऐसे बुजुर्ग शामिल थे जो अपने परिवारजन के साथ रहते हैं।

 • सर्वेक्षण में बड़े शहरों(टायर-1) में दिल्ली में बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार के मामले सबसे कम(22 प्रतिशत) पाए गए लेकिन ध्यान देने की बात यह भी है कि पिछले साल के सर्वेक्षण में दिल्ली में बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार के मामले 20 फीसदी पाए गए थे। बड़े शहरों में बंगलुरु बुजुर्गों से दुर्व्यवहार के मामले में सबसे आगे(75 प्रतिशत) है। छोटे शहरों(टायर-2) में कानपुर में बुजुर्गों से दुर्व्यवहार के मामले सर्वाधिक कम(13 प्रतिशत) पाए गए जबकि नागपुर(85 प्रतिशत) में सबसे ज्यादा।

दुर्व्यवहार का शिकार होने वाले बुजुर्गों में महिलाओं की तादाद(52 प्रतिशत) पुरुषों(48 प्रतिशत) से ज्यादा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार के मामले तो बढ़े हैं लेकिन तकरीबन 41 प्रतिशत बुजुर्ग इसके बारे में किसी से कहना ठीक नहीं समझते।

 • दुर्व्यवहार के बारे में किसी से ना कहने को लेकर कारण के रुप में एक रोचक तथ्य रिपोर्ट से यह निकलकर सामने आता है कि बड़े शहरों में किसी व्यक्ति अथवा संस्था में इसे समस्या से निपटने के लिए जरुरी आत्मविश्वास की कमी है, और यह भी कि बुजुर्गों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार की समस्या से कैसे निपटा जाये इसके बारे में जानकारी की कमी है।

 •सर्वेक्षण में शामिल ज्यादातर बुजुर्ग(67 फीसदी) पुलिस हैल्पलाईन के बारे में जानते थे। दुर्व्यवहार क शिकार बुजुर्गों में से 67 प्रतिशत पुलिस हैल्पलाइन के बारे में आगाह थे लेकिन उनमें से मात्र 12 फीसदी ने पुलिस को सूचित किया।

 • राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो अधिकतर बुजुर्गों(30फीसदी) का मानना था कि दुर्व्यवहार की समस्या से निपटने के लिए उनका आर्थिक रुप से आत्मनिर्भर होना एक प्रभावकारी उपाय सिद्ध हो सकता है। 21 फीसदी बुजर्गों का कहना था कि पीढ़ीगत स्नेह-सबंधों को मजबूत करना और नयी पीढ़ी को उसके दायित्वों के प्रति सवेदनशील बनाना एक कारगर उपाय हो सकता है। केवल 14 प्रतिशत बुजुर्गों ने कहा कि स्वसहायता समूह इस मामले में मददगार हो सकते हैं।

 • टायर-1 और टायर-2 शहरों के कई बुजुर्गों का कहना था कि विधिक रिपोर्टिंग और शिकायत निवारण की प्रणाली विकसित करने से बुजुर्गों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार की समस्या से एक हद तक निजात मिल सकती है।

 

 

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