मानवाधिकार


नेशनल क्राइम रिकार्डस् ब्यूरो द्वरा प्रस्तुत प्रीजन स्टैटिक्स 2006 के अनुसार

(http://ncrb.nic.in/PSI2006/prison2006.htm):

 

  • साल 2006 के दौरान जेलों में प्राकृतिक अथवा अप्राकृतिक कारणों से कुल 1423 कैदियों की मृत्यु हुई। इसमें 1343 को प्राकृतिक मृत्यु की श्रेणी में रखा गया है और 80 को अप्राकृतिक कारणों से हुई मृत्यु की श्रेणी में।
  • कैदी द्वारा साथी कैदी की हत्या की घटना छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में हुई(प्रत्येक में एक)
  • उत्तरप्रदेश के जेलों में सबसे ज्यादा विचाराधीन कैदियों (3101)  को  दो से तीन साल की अवधि तक जेल में रोककर रखा गया। बिहार इस मामले में 2565 बंदियों के साथ दूसरे नंबर पर है। मेगालय में 2-3 साल तक रोक कर रखे गए विचाराधीन कैदियों की प्रतिशत तादाद(9.6) सबसे ज्यादा है। इसके बाद नगालैंड(7.7),झारखंड(7.2)और उत्तराखंड(7.1) का नंबर है।
  • छह माह से एक साल की अवधि तक बगैर मुकदमा चलाये जेल में रोकने की घटना को आधार मानें तो उत्तरप्रदेश इस मामले में भी 8886 विचाराधीन कैदियों के साथ अव्वल स्थान पर है और बिहार 8076 विचाराधीन कैदियों के साथ दूसरे नंबर पर।
  • देश के विभिन्न जेलों में 1569 कैदी 5 या उससे ज्यादा सालों से बंद हैं मगर उनके मुकदमे की सुनवाई अभी नहीं हो पायी है।
  • देश के विभन्न जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की तादाद कुल कैदियों में 65.7 फीसदी है जबकि सजायाफ्ता कैदियों की तादाद 31.3 फीसदी।
  • विचाराधीन कैदियों में हत्या के आरोप में बंदी बनाये गए कैदियों की तादाद सबसे ज्यादा(28.0 फीसदी) है। उत्तरप्रदेश में ऐसे कैदियों की संख्या देश में सबसे ज्यादा(9936) है। हत्या का आरोप झेल रहे विचाराधीन कैदियों की तादाद बिहार में 8102 है।
  • 1569 यानी कुल विचाराधीन कैदियों में 0.6 प्रतिशत को साल 2006 के अंतिम माह में जेल में रहते हुए 5 या उससे ज्यादा वर्ष हो चुके थे। पंजाब में ऐसे कैदियों की संख्या सबसे ज्यादा(377) है जबकि बिहार इस मामले में दूसरे नंबर(356) है।
  • साल २००६ के अंत में देश के विभिन्न जेलों में बंद कैदियों में फांसी की सजा प्राप्त कैदियों की संख्या ३४७ थी जिसमें २ महिलाएं हैं।
  • सजायाफ्ता कुल मुजरिमों में ५३.३ फीसदी यानी ६२,१८० कैदी ऐसे हैं जिन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई गई है।
  • सजा काट चुके कुल १३,०८४ कैदी फिर से किसी आरोप के अधीन जेल में पहुंचे हैं। साल २००६ में जेल पहुंचे कुल कैदियों में इनकी तादाद ५.१ फीसदी थी।
  • सजायाफ्ता ६४ कैदियों १६-१८ आयु वर्ग के हैं जबकि सजायाफ्ता ४४३७१ कैदी १८ से ३० साल के। सजायाफ्ता ५६,४७९ कैदी ३० से ४० साल के आयु वर्ग के हैं जबकि ५० साल या उससे अधिक उम्र के सजायाफ्ता कैदियों की संख्या १५,७६१ है।
  • ५६७ विचाराधीन कैदी १६-१८ साल के आयु वर्ग के हैं, १,०६,३३५ विचाराधीन कैदी १८-३० आयु वर्ग के हैं, १,०९,०३९ विचाराधीन कैदी ३०-५० साल के आयु वर्ग के हैं और २९,३०३ विचाराधीन कैदी ५० या उससे अधिक साल के हैं।

 

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