कुछ अपने बारे में

बडी छोटी-सी टोली है हमारी।लेकिन इस  टोली में आपको विकासपरक मुद्दों के चिन्तकों से भेंट हो जाएगी, शोधकर्ताओं और मीडियाकर्मियों से भी। अगर आपका सवाल यह है कि साहब यह टोली करती क्या है तो हमारा जवाब होगा कि दरअसल हमलोग एक भंडारघर बना रहे हैं भारत के गंवई इलाकों के संकट से जुड़ी सूचनाओं का और हमारा मकसद हंगामा खड़ा करना नहीं बल्कि यह सूरत बदलनी चाहिए की तर्ज पर सार्थक बहसों की जमीन तैयार करना है। यह परियाजना फोर्ड फाऊंडेशन की अनुदान-राशि से चलायी जा रही है।काम के बाद अगर आपका सवाल हमारे मुकाम के बारे में है तो हम कहेंगे कि इतनी बड़ी दिल्ली में एक छोटी सी जगह दिल्ली विश्विविद्यालय का नार्थ कैंपस कहलाती है और इसी के कंधे पर एक तिल की तरह जमा पडा है विकासशील समाज अध्ययन पीठ यानी सेंटर फॉर स्टडी ऑव डेवलपिंग सोसायटीज उर्फ सीएसडीएस। इसी सीएसडीएस के एक कमरे में हमारी टोली भी अपना कंप्यूटर संभाले जुटी रहती है।हम लोग एक एक वेबसाईट चलाते हैं जिसका नाम है www.im4change.org और इस वेब-साईट को तैयार किया गया है यह सोचकर कि जो कभी मीडियाकर्मी, नीति-निर्माता और विकासपरक मुद्दों पर चिन्तन करने वाले लोग भारत के बहुमुखी ग्रामीण संकट के बारे में हाथ के हाथ कुछ सूचना खोजना चाहें या फिर समझ बनाना चाहें तो यह वेब-साईट उनका दोस्त साबित हो सके। हमारी टोली ग्रामीण-संकट पर केंद्रित मीडिया कवरेज की ऑडिट के लिए मीडिया-रिसर्च भी करती है और गाहे-ब-गाहे हमलोग रिपोर्टरों और नागरिक-समूह के कार्यकर्ताओं के लिए कार्यशाला का भी आयोजन करते हैं।

हमारी टोली के सदस्य यानी विपुल मुदगल,(vipul@csds.in) चंदन श्रीवास्तव(chandan@csds.in) और शंभु घटक(shambhu@csds.in), सत्येंद्र रंजन(sr@csds.in) और चित्रांगदा चौधरी(Chitrangada@csds.in) विचारधारा के तईं कट्टर कत्तई नहीं और जो कोई शुभचिन्तक अपनी शुभचिन्ता में या फिर हमारे काम के बारे में आलोचना करता है या कोई सुझाव देता है तो इसका हार्दिक स्वागत है।

 

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