पलायन (माइग्रेशन)

पलायन (माइग्रेशन)


साऊथ एशिया नेटवर्क ऑन डैमस्,रीवरस् एंड पीपल(SANDRP), द्वारा प्रस्तुत लार्ज डैम प्रोजेक्टस् एंड डिस्पलेस्मेंट इन इंडिया नामक दस्तावेज के अनुसार-

http://www.sandrp.in/dams/Displac_largedams.pdf:


  • भारत में सरकार बड़े बांधों की अनेक परियोजनाओं की योजनाकार,धनदाता,निर्माता और मालिक है लेकिन सरकार के पास १९४७ के बाद से बने बड़े बांधों द्वारा विस्थापित हुए लोगों की संख्या के बारे में कोई आंकड़ा नहीं है।


  • संख्या के लिहाज से देखें तो बड़े बांधों को बनाने वाले देशों में भारत का स्थान तीसरा है।भारत में ३६०० से ज्यादा बड़े बांध हैं और ७०० की तादाद में बड़े बांधों पर काम चल रहा है।


  • विश्वबैंक के आंकड़ों के अनुसार इस बैंक द्वारा वित्तपोषित परियोजना से विस्थापित होने वाले कुल लोगों के बीच बड़े बांधों से विस्थापित होने वाले लोगों की तादाद २६.६ फीसदी है।अगर इसी आंकड़े को कुल विस्थापित लोगों की संख्या से तुलना करके देखें तो पता चलेगा कि कुल विस्थापित लोगों में ६२.८ फीसदी लोग विश्वबैंक द्वारा वित्तपोषित बड़ी बांध-परियोजनाओं के कारण विस्थापन के शिकार हुए हैं।


  • यह बात भी स्पष्ट है कि बड़ी बांधों से जुड़े परियोजना अधिकारी विस्थापन और पुनर्वास को परियोजना का महत्त्वपूर्ण हिस्सा नहीं मानते।ऐसी परियोजनाओं का प्रमुख सरोकार इंजीनियरिंग से जुड़ी सहूलियत और सिंचाई अथवा बिजली-उत्पादन से होने वाला लाभ होता है।

 

  • हीराकुड बांध से विस्थापित होने वाले लोगों की तादाद लगभग १.६ लाख थी जबकि सरकारी आंकड़े में इसे १.१ लाख बताया गया।


  • सरकार के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार सरदार सरोवर परियोजना के अंतर्गत बनने वाले जलागार से ४१ हजार परिवार विस्थापित होंगे।इस परियोजना के अन्तर्गत बनने वाली नहरों से २४ हजार खातेदारों(भूस्वामियो) को अपनी जमीन से हाथ धोना पड़ेगा।इसके अतिरिक्त जलप्रवाहक की विपरीत दिशा में निवास करने वाले १० हजार मछुआरे परिवारों से उनकी आजीविका छिन जाएगी क्योंकि बांध के कारण गैर-मॉनसूनी महीनों में इस इलाके में जलप्रवाह एकदम रुक जाएगा।


  • ५४ बड़ी बांध परियोजनाओं के सर्वेक्षण के आधार पर निष्कर्ष निकाला गया है कि पिछले पचास सालों में बड़े बांधों के निर्माण से विस्थापित होने वाले लोगों की तादाद ३ कोरड़ ३० लाख है।


  • विश्वबैंक के अनुसार फिलहाल हर बड़े बांध के निर्माण से औसतन १३ हजार लोग विस्थापित होते हैं।

 

  • भारत सरकार के आकलन के अनुसार पिछले पचपन सालों में बड़े बांधों के निर्माण से विस्थापित हुए कुल ४ करोड़ लोगों में एक चौथाई से भी कम लोगों का पुनर्वास हो पाया है।


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