बेरोजगारी

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नेशनल सैम्पल सर्वे द्वारा जारी(24 जून,2011) की इंडीकेटर्स् ऑव एम्पलॉयमेंट एंड अन-इम्पलॉयमेंट इन इंडिया-2009-10 नामक दस्तावेज से संबंधित (प्रेस विज्ञप्ति) के अनुसार-

http://mospi.nic.in/Mospi_New/upload/Press_Note_KI_E&U
E_66th_English.pdf
:

सर्वे के 66 वें दौर से प्राप्त भारत में रोजगार और बेरोजगारी की सूरते हाल से संबंधित ये आंकड़े कुल 1,00,957 परिवारों के आकलन पर आधारित हैं। इनमें से 59,129 परिवार ग्रामीण क्षेत्र के हैं और 41,828 परिवार शहरी क्षेत्र के। गांवों(कुल 7,402 ) और शहरी प्रखंडों (कुल 5,252)  का चयन देश के सभी प्रदेशों और केद्रशासित क्षेत्रों को मिलाकर किया गया। इस आकलन में जिन क्षेत्रों को छोड़ा गया है उसका ब्यौरा है-(i) बस-रुट से पाँच किलोमीटर दूर पड़ने वाले नगालैंड के गांव (ii) वर्षभर यातायात के लिहाज से सुगम ना रहने वाले अंडमान निकोबार के कुछ गांव (iii) लेह, करगिल और जम्मू-कश्मीर का पूंछ जिला।

 

 

राष्ट्रीय स्तर पर, कामगारों की सकल संख्या में 51 फीसदी तादाद स्वरोजगार में लगे लोगों की है। तकरीबन 33.5 फीसदी तादाद दिहाड़ी मजदूरी करने वालों की और 15.6 फीसदी तादाद नियमित मजदूरी या वेतन पाने वालों की है।

 

ग्रामीण क्षेत्र के कामगारों में 54.2 फीसदी तादाद स्वरोजगार में लगे लोगों की है। तकरीबन 38.6 फीसदी लोग दिहाड़ी मजदूर की श्रेणी में हैं और 7.3 कामगार नियमित मजदूरी या वेतन पाने वाले हैं।.

 

शहरी क्षेत्र के कामगारो में 41.1 फीसदी तादाद स्वरोजगार में लगे लोगों की है, 17.5 फीसदी दिहाड़ी मजदूर हैं और नियमित मजदूरी या वेतन पाने वाले कामगारों की संख्या 41.4 फीसदी है।

 

2. उद्योगवार कामगारों की तादाद

 

ग्रामीण क्षेत्रों में तकरीबन 63 फीसदी पुरुष कामगार कृषिक्षेत्र में कार्यरत हैं जबकि अर्थव्यवस्था के द्वितीयत और तृतीयक क्षेत्र में लगे कामगारों की तादाद क्रमश 19 फीसदी और 18 फीसदी है। महिला कामगारों की भारी संख्या कृषि-क्षेत्र में कार्यरत है। कृषिक्षेत्र में कार्यरत महिला कामगारों की संख्या 79 फीसदी है जबकि अर्थव्यवस्था के द्वतीयत और तृतीयक क्षेत्र में कार्यरत महिला कामगारों की संख्या क्रमश 13 फीसदी और 8 फीसदी है।

 

शहरी क्षेत्रों में यह तस्वीर एकदम अलग है। अर्थव्यवस्था के तृतीयक क्षेत्र में तकरीबन 59 फीसदी स्त्री-पुरुष कामगार कार्यरत हैं जबकि द्वितीयक क्षेत्र में कार्यरत पुरुषों की तादाद 35 फीसदी और महिलाओं की 33 फीसदी है। शहरी श्रमशक्ति की कृषिक्षेत्र में हिस्सेदारी पुरुषों के मामले में 6 फीसदी और स्त्रियों के मामले में 14 फीसदी है।

 

3.दिहाड़ी मजदूरों और नियमित पारिश्रमिक वाले कामगारों की पारिश्रमिक-दर(वेजरेट)

 

नियमित पारिश्रमिक या वेतन पाने वाले कामगारों के संबंध में- शहरी क्षेत्र में औसत पारिश्रमिक दर. 365 रुपये प्रतिदिन और ग्रामीण क्षेत्रों में. 232 रुपये प्रतिदिन है। ग्रामीण क्षेत्र में इस श्रेणी के पुरुष कामगारों के लिए प्रतिदिन औसत पारिश्रमिक. 249 रुपये और महिलाओं के लिए 156 रुपये पायी गई।इस तरह स्त्री-पुरुष कामगारों के पारिश्रमिक दर में अन्तर 0.63 अंकों का है।. शहरी क्षेत्र में इस श्रेणी के पुरुष कामगारों के लिए प्रतिदिन औसत पारिश्रमिक. 377 रुपये और महिलाओं के लिए 309 रुपये पायी गई।इस तरह स्त्री-पुरुष कामगारों के पारिश्रमिक दर में अन्तर 0.82 अंको का है।

 

दिहाड़ी मजदूरों के संबंध में- ग्रामीण क्षेत्र में इस श्रेणी के कामगारों के लिए प्रतिदिन पारिश्रमिक की दर ( सरकारी काम को छोड़कर) 93 रुपये पायी गई जबकि शहरी क्षेत्र में 122 रुपये। ग्रामीण क्षेत्रों में दिहाड़ी मजदूरी के काम में लगे पुरुष मजदूर को प्रतिदिन औसतन 102 रुपये के हिसाब से काम मिला जबकि महिला श्रमिक को. 69 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से।शहरी क्षेत्र में पुरुष श्रमिक को दिहाड़ी. 132 रुपये प्रतिदिन और महिला को. 77 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से हासिल हुई।.

 

ग्रामीण क्षेत्र में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले पुरुष श्रमिक को सरकारी काम में मजदूरी (मनरेगा के अन्तर्गत मिलने वाले काम छोड़कर) औसतन. 98 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मिली जबकि महिला को 86 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से। मनरेगा के अन्तर्गत मिलने वाले काम में मजदूरी का भुगतान पुरुष श्रमिक के लिए 91 रुपये प्रतिदिन और महिला श्रमिक के लिए 87 रुपये प्रतिदिन की पायी गई।

 



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