शोध और विकास


योजना आयोग द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट ऑव द वर्किंग ग्रुप ऑन एग्रीकल्चरल रिसर्च एंड एजुकेशन फॉर द एलेवेंथ फाइव ईयर प्लान के अनुसार-

http://planningcommission.nic.in/aboutus/committee/wrkgrp1
1/wg11_resrch.pdf
:

 

· खेती और उससे जुड़े क्षेत्रों में सकल घरेलू उत्पाद की बढो़त्तरी की दर दसवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान १ फीसदी की रही जबकि लक्ष्य ४ फीसदी की बढ़ोत्तरी का रखा गया था।

 

· फसली और पशुधन उत्पाद में बढ़ोत्तरी की दर १९९६-९७ के बाद सालाना १.३ फीसदी से लेकर ३.६ फीसदी के बीच रही।

 

· फसली खेती के अन्तर्ग सिर्फ फल और सब्जियों में ढाई फीसदी सालाना की दर से बढ़ोत्तरी हुई।.

 

· जनसंख्या वृद्धि की दर के लिहाज से देखें तो चावल और गेहूं का उत्पादन दसवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान कम हुआ।.

 

· हाल के वर्षों में दाल और खाद्य-तेल के आयात में बढ़ोत्तरी हुई है। .

 

· खेती में इनपुट के इस्तेमाल की बढ़ोत्तरी १९९६-९७ के बाद घटी है।साल १९८० से १९९७ के बीच इसमें सालाना बढोत्तरी ढाई फीसदी की हो रही थी।

 

· खेतिहर उत्पाद के दाम खेती में इस्तेमाल किये जाने वाले उत्पादों के दाम की चपलना में घटे हैं ।इससे खेती में लाभदायकता कम हुई है और खेती में लागत-सामग्री (इनपुट) का इस्तेमाल कम हुआ है।.

 

· पशुपालन और मत्स्यपालन में अपेक्षाकृत तेज बढ़ोत्तरी हुई है।.

 

· जल संसाधन में कमी.भूमि की उर्वरा शक्ति में आ रही गिरावट,पर्यावरण के बिगड़ते मिजाज, खेती की लागत सामग्री की आपूर्ति में कमी और इसके साथ ही साथ खेती में निवेश के घटने के कारण अनाज उत्पादन की दर टिकाऊ रुप से बढ़ा पाने में भारी परेशानी आ रही है।

 

· ऊपर के तथ्यों से संकेत मिलते हैं कि हरित क्रांति के बाद खेती को लेकर देश में जो उत्साह का वातावरण बना था वह अब समाप्त हो चला है।हाल के सालों में विदेशों से गेहूं का आयात करना पड़ा है और इससे इस आशंका को बल मिला है कि देश को पहले की तरह जनसंख्या का पेट पालने के लिए बड़ी मात्रा में अनाज का आयात करना पड़ेगा।

 

· ऊपर के तथ्यों के आधार पर कहा जा सकता है कि कृषि से जुड़े शोध और शिक्षा के सामने ग्यारहवीं योजना के दौरान भारी चुनौतियां हैं।.

 

· हरित क्रांति की प्रौद्योगिकी तुलनात्मक रुप से सरल थी।उसे किसानों तक पहुंचाना आसान था और किसानों के लिए उसका उपयोग कर पाना भी सरल था।फिलहाल उत्पादकता को टिकाऊ रुप से बढ़ाने,उत्पादन खर्च को कम और किसानों की आमदनी में तेज गति से इजाफा करने में सहायक सिद्ध वाली प्रौद्योगिकी उपलब्ध नहीं है।

 

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