किसान आत्महत्या- पुरानी पहेली का नया समाधान

किसान आत्महत्या- पुरानी पहेली का नया समाधान

प्रति व्यक्ति आय, सार्वजनिक स्वास्थ्य और शिक्षा के मामले में देश का म़ॉडल राज्य कहलाने वाले केरल में पुरुषों की आत्महत्या दर विश्व में सर्वाधिक (66.3) है जबकि बीमारु राज्यों में शुमार बिहार में पुरुषों की आत्महत्या दर सबसे कम (6.3)  यह विरोधाभास क्यों ?

ग्रामीण-संकट के अध्येताओं को लंबे समय से परेशान करने वाली इस पहेली का एक क्या उत्तर मिलता है प्रतिष्ठित लैंसेट जर्नल में प्रकाशित जॉनथन कनेडी और लारेंस किंग के एक अध्ययन में। पॉलिटिकल इकॉनॉमी ऑफ फार्मर्स् स्यूसाइड इन इंडिया- इनडेटेड कैश क्रॉप फार्मर्स विद् मार्जिनल लैंडहोल्डिंग्स् एक्सप्लेन स्टेट लेवल वेरिएशन इन स्यूसाइड रेटस् नामक इस अध्ययन में कहा गया है कि नगदी फसलों की खेती करने वाले, एक हैक्टेयर से कम जमीन के मालिक किसानों के आत्महत्या करने की आशंका ज्यादा है क्योंकि फसलों की कीमतों में होने वाली उतार-चढाव का वे सबसे ज्यादा शिकार होते हैं, साथ ही उनके बारे में यह आशंका लगी रहती है कि वे बकाया कर्ज नहीं चुका पाएंगे।(देखें नीचे दी गई लिंक)

इस अध्ययन में भारत में मौजूद आत्महत्या की परिघटना को महामारीकी संज्ञा देते हुए नोट किया गया है कि भारत के ग्रामीण इलाकों में आत्महत्या की दर शहरी इलाकों की अपेक्षा दोगुनी है और देश के जो इलाके अपेक्षाकृत ज्यादा समृद्ध माने जाते हैं वहां आत्महत्या की दर के सबसे ज्यादा है। उपर्युक्त अध्ययन के अनुसार देश के व्यस्क व्यक्तियों के बीच आत्महत्या मृत्यु की दूसरी सबसे बड़ी वजह है। भारत में व्यस्कों पुरुषों की मृत्यु की सबसे बड़ी वजह सड़क-दुर्घटना है जबकि महिलाओं के लिए प्रसव से जुड़ी जटिलताएं। गौरतलब है कि अध्ययन में उद्धृत एक शोध के अनुसार भारत में सन् 2010 में कुल 1 लाख 87 हजार लोगों की आत्महत्या की वजह से मृत्यु हुई जो कि विश्व में साल 2010 में हुआ कुल आत्महत्याओं का 20 फीसदी है।

अध्ययन में इस बात की ओर ध्यान दिलाया गया है कि उच्च आमदनी वाले देशों में होने वाली आत्महत्या की परिघटना से भारत में होने वाली परिघटनाओं की तुलना नहीं की जा सकती क्योंकि भारत में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच आत्महत्या की दर में तकरीबन दोगुने का अन्तर है जबकि उच्च आमदनी वाले देशों में आत्महत्या की दर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में तकरीबन बराबर है। यह तथ्य भी गौरतलब है कि भारत में व्यस्कों के बीच आत्महत्या की दर सर्वाधिक है जबकि उच्च आमदनी वाले देशों में बुजुर्गों के बीच यह दर ज्यादा है।

गौरतलब है कि किसानों की दशा पर केंद्रित सीएसडीएस के लोकनीति संकाय द्वारा किए गए एक हालिया सर्वेक्षण में तकरीबन 41 फीसदी किसानों ने पारिवारिक कारणों को आत्महत्या की प्रमुख वजह बताया जबकि 35 प्रतिशत का कहना था कि किसानों की आत्महत्या की प्रमुख वजह कर्जदारी है। इस सर्वेक्षण में कुल 14 फीसदी किसानों ने फसल के मारे जाने को आत्महत्या की प्रमुख वजह बताया।

अध्ययन के कुछ प्रमुख तथ्य-

 

-भारत में सन्  2010 में 187,000 लोगों की आत्महत्या की वजह से मृत्यु हुई जो कि विश्व में सन् 2010 में आत्महत्या की वजह से होने वाली मृत्यु की कुल संख्या का पांचवां हिस्सा है।

-भारत में पुरुषों के बीच आत्महत्या की दर 26 • 3 और महिलाओं के बीच आत्महत्या की दर 17 • 5 है जो कि विश्व में सर्वाधिक है।

-भारत में व्यस्कों की मृत्यु की दूसरी प्रमुख वजह आत्महत्या है। पुरुषों में  मृत्यु की पहली वजह सड़क दुर्घटना और महिलाओं में मातृत्व जनित जटिलताएं हैं।

-भारत में आत्महत्या की परिघटना उच्च आमदनी वाले देशों से एकदम ही अलग है। भारत के ग्रामीण इलाके में आत्महत्या की दर शहरी इलाके की अपेक्षा दोगुनी है जबकि उच्च आमदनी वाले देशों में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में आत्महत्या-दर समान है।

-भारत के अपेक्षाकृत समृद्ध इलाकों में आत्महत्या दर ज्यादा है जो कि उच्च आमदनी वाले देशों से एकदम उलट स्थिति है। भारत में आत्महत्या के लिए सर्वाधिक प्रयुक्त होने वाला साधन कीटनाशक है जो कि उच्च आमदनी वाले देशों से मेल नहीं खाता और दुनिया के अन्यान्य स्थानों में बुजुर्गों के बीच आत्महत्या की दर ज्यादा है जबकि भारत में व्यस्कों के बीच।

-भारत के विभिन्न राज्यों में आत्महत्या दर के मामले में बहुत ज्यादा भिन्नता है। कुछ राज्यों में आत्महत्या दर किन्हीं राज्यों की तुलना में 10 गुना ज्यादा है। यदि केरल को एक देश मान लें तो फिर कहा जा सकता है कि वहां आत्महत्या दर विश्व में सबसे ज्यादा है। केरल में पुरुषों के बीच आत्महत्या दर 66.3 है जबकि विश्व में इस मामले में अग्रणी स्थान लिथुआनिया(61.3) का है।

-बीमारु राज्यों में शुमार बिहार में पुरुषों के बीच आत्महत्या दर 6.3 है।

 

इस कथा के विस्तार के लिए कृपया निम्नलिखित लिंक्स देखें-

The political economy of farmers'suicides in India: indebted cash-crop farmers with marginal landholdings explain state-level variation in suicide rates by Jonathan Kennedy and Lawrence King, published in the Lancet journal Globalization and Health 2014, 10:16

http://www.im4change.org/siteadmin/tinymce//uploaded/Suicide%20by%20Farmers.pdf

State of Indian Farmers: A Report', done by Centre for the Study of Developing Societies (CSDS), Delhi for Bharat Krishak Samaj 

http://www.im4change.org/siteadmin/tinymce//uploaded/Farmers%20Report%20Final.pdf

Patel V, Ramasundarahettige C, Vijayakumar L, Thakur JS, Gajalakshmi V, Gururaj G, Suraweera W, Jha P: Suicide mortality in India: a nationally representative survey. Lancet 2012, 379:2343-2351 (please click here to download)

Gujarat has lowest farmer suicide rate: UK study -Prasun Sonwalkar, The Hindustan Times, 19 April, 2014 

New evidence of suicide epidemic among India's ‘marginalized' farmers -Manash Pratim Gohain, The Times of India, 17 April, 2014 

Farmer suicides, crop failure plague Vidarbha -Kunal Purohit, The Hindustan Times, 13 April, 2014 

The run of rains in Indian agriculture, Live Mint, 31 March, 2014 

Farmers of Andhra Pradesh release their agenda for 2014 elections-M Suchitra, Down to Earth, 28 March, 2014 

Maharashtra farmer battles for life, The Hindu, 25 March, 2014 

Agriculture turning into nightmare for farmers-Nagesh Kini, MoneyLife.in, 25 March, 2014 

Save the farmer, DNA, 20 March, 2014 

Unseasonsal rain, hailstorms trigger farmers' suicides in Maharashtra, 18 dead -Chittaranjan Tembhekar, The Times of India, 19 March, 2014 

Madhya Pradesh: Many farmers commit suicide over crop failure -Anup Dutta, India Today, 14 March, 2014 

Farmers demand guaranteed income -Jyotika Sood, Down to Earth, 6 March, 2014 

Nationwide survey finds Indian farmers in bad shape -Vishwa Mohan, The Times of India, 12 March, 2014 

 

 

 (तस्वीर साभार- http://socialism.in/wp-content/uploads/2012/01/farmer-suicide.jpg)




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