गरीबों की सेहत का रखवाला बाजरा

गरीबों की सेहत का रखवाला बाजरा

एक जमाने से बाजरा गरीबों की सेहत का रखवाला माना जाता रहा है और अब जर्नल ऑव न्यूट्रीशन में प्रकाशित एक अध्ययन से इस बात की पुष्टी हुई है कि बाजरे की कई नई किस्मों में आयरन की मात्रा कई गुना बढ़ायी जा सकती है। मान्यता रही है कि बाजरे में अन्य अनाजों की तुलना में आयरन की मात्रा 10 फीसद ज्यादा होती है और आयरन की कमी से ग्रस्त तीन साल तक की उम्र वाले बच्चों को इस कुपोषण से मुक्त करने में बाजरा सहायक साबित होता है। ( देखें अध्ययन की जानकारी और बाजरे से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बातों के लिए नीचे दी गई लिंक)


बाजरे को सेहत का खजाना साबित करने वाला यह अध्ययन जवाहरलाल नेहरु मेडिकल सेंटर ने बेलगाम में किया। जिले के ग्रामीण समुदायों के 22 से 35 माह के 40 बच्चों को बाजरे के आटे से बना उपमा, शीरा औरा रोटी खिलायी गई। इन पोषाहारों को बनाने में बाजरे की उन किस्मों का इस्तेमाल हुआ जो लौहतत्व की मात्रा के लिहाज से बाजरे की अन्य किस्मों से कहीं ज्यादा बेहतर थे।इस अध्ययन के निष्कर्षों का संकेत है कि रोजाना बाजरे के आटे के मात्र 100 ग्राम से बच्चों के लिए जरुरी लौहतत्व की मात्रा की पूर्ति की जा सकती है।यूनिसेफ के अनुसार भारत में 6-59 माह के 70 फीसद बच्चे आयरन की कमी से ग्रस्त हैं। इस सिलसिले में एक तथ्य यह भी है कि जो मातायें आयरन की कमी से ग्रस्त होती हैं उनके बच्चों के आयरन की कमी से ग्रस्त होने की आशंका स्वस्थ माताओं के बच्चों की तुलना में सात गुना ज्यादा होती है।


मोटहन के पक्ष में खड़े विशेषज्ञ एक लंबे समय से तर्क देते रहे हैं कि भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली केंद्र उपार्जित चावल और गेहूं को केंद्र में रखकर चलती है। इस वजह से स्थानीय स्तर पर वर्षासिंचित शुष्क-भूमि वाले इलाके में लाखो किसानों द्वारा उगाये जाने वाले, तुलनात्मक रुप से कहीं ज्यादा पोषकतत्व से भरपूर, अनाजों की अनदेखी होती है और उनकी खेती को बाधा पहुंचती है। प्रस्तावित खाद्य-सुरक्षा कानून में 1 रुपये प्रति किलो के दर से मोटहन देने के साथ-साथ आने वाले समय में पीडीएस के जरिए दी जाने वाली सामग्रियों को बहुविध बनाने की बात कही गई है। लेकिन, ऐसा होगा कैसे, इस बारे में प्रस्तावित खाद्य-सुरक्षा बिल में कोई ठोस उपाय नहीं सुझाये गए।


लौहतत्व से भरपूर बाजरे की प्रजाति का विकास इंटरनेशनल क्रॉप रिसर्च सेंटर ने किया है। बाजरे की ऐसी पहली प्रजाति(ICTP-8203Fe) का व्यावसायीकरण महाराष्ट्र में साल 2012 में हुआ। इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार लौहतत्व से समृद्ध बाजरे की इस नई प्रजाति की खेती महाराष्ट्र के उत्तरी और पश्चिमी भू-भाग में तकरीबन तीस हजार किसान कर रहे हैं। बाजरे की इस नई किस्म से ऊपज ज्यादा मिलती है, उसमें पानी की कमी को बर्दाश्त करने की क्षमता ज्यादा है, साथ ही इस प्रजाति में जिकतत्व की मात्रा भी ज्यादा है।


गौरतलब है कि भारत में हरितक्रांति के अंतर्गत ज्यादा ऊपज वाली ऐसी फसल-प्रजातियों को अपनाया गया जिनके लिए ज्यादा से ज्यादा पानी तथा अन्य सामग्रियों की जरुरत थी।  नतीजतन भूमि-अपक्षय, परंपरागत खेती की अनेदेखी और उत्पादकता में एक सीमा के बाद कमी जैसी बातें सामने आयीं। बहरहाल, मोटहन की श्रेणी में गिने जाने वाले बाजरा जैसे अनाजों को पानी की बहुत कम जरुरत होती है और इसकी खेती सिंचाई के लिए बारिश पर आधारित भू-भाग के लिए उपयुक्त है। सिंचाई के लिए बारिश पर आधारित भू-भाग में भाग के 80 फीसद किसान रहते हैं। ( भारत की कृषि-भूमि का 60 फीसद हिस्सा सिंचाई की सुविधा से वंचित है और सिंचाई के लिए वर्षा पर आधारित है। इसी इलाके में भारत का 90 फीसद तेहलन और 81 फीसद दलहन का उत्पादन होता है।) भारत में पानी की कमी को झेल सकने वाले पोषकतत्वों से भरपूर मोटहन की कई फसलें मिलती हैं। इन्हें बड़े कम खर्चे में उपजाया जा सकता है क्योंकि ऊपज पर अन्य सामग्रियों के मद में खर्चा कम करना पड़ता है। ( हरितक्रांति बनाम मोटहन पर बहस के लिए कृपया देखें नीचे दी गई लिंक)

इस कथा के विस्तार के लिए देखें निम्नलिखित लिंक-

Biofortification of Pearl Millet with Iron and Zinc in a Randomized Controlled Trial Increases Absorption of These Minerals above Physiologic Requirements in Young Children-Bhalchandra S Kodkany, Roopa M Bellad et al, The Journal of Nutrition, 7 August, 2013 (please click here to access the paper)

 The text of the food security bill
http://www.thehindu.com/multimedia/archive/01404/National_
Food_Secu_1404268a.pdf
 

 A commentary on decentralising and diversifying procurement for the PDS
http://www.epw.in/commentary/decentralised-procurement-and
-universalised-pds.html

 A primer on Millets by the Millet Network of India
http://www.swaraj.org/shikshantar/millets.pdf

 THANKS FOR THE KIND WORDS: CAN WE HAVE SOME ACTION NOW?, http://www.im4change.org/news-alerts/thanks-for-the-kind-w
ords-can-we-have-some-action-now-15257.html

UNICEF’s factsheet on iron-deficiency and nutrition
http://www.unicef.org/india/nutrition_188.htm

 For debate on Green Revolution Vs Rain-fed farming, see the following links:
http://www.im4change.org/blog/has-green-revolution-failed-
indias-poor-12.html

Managing water in rainfed agriculture, Johan Rockstrom, Nuhu Hatibu Theib Y Oweis and Suhas Wani,
http://www.iwmi.cgiar.org/assessment/Water%20for%20Food%20
Water%20for%20Life/Chapters/Chapter%208%20Rainfed.pdf

Rainfed Areas of India, Centre for Science and Environment,
http://www.cseindia.org/programme/nrml/e-pov-july07.htm

State of Indian Agriculture 2012-13,

http://www.indiaenvironmentportal.org.in/files/file/State%
20of%20Indian%20Agriculture%202012-13.pdf

Report of the Working Group on Watershed Development, Rainfed Farming and Natural Resource Management for the Tenth Five Year Plan, Planning Commission, September 2001,
http://planningcommission.gov.in/aboutus/committee/wrkgrp/
wgwtrshd.pdf

 Report of Sub-Committee on More crop and income per drop of water, Ministry of Water Resources, October 2006, http://cwc.gov.in/main/webpages/3.doc

 Chapter 5: Land Resources and Agriculture by Suryaveer Singh (2008),
http://exploringgeography.wikispaces.com/file/view/Chapter
-5+New+2008.pdf

Mission millets-Hema Vijay, The Hindu, 3 July, 2013, http://www.im4change.org/success-stories/mission-millets-h
ema-vijay-21791.html

Magic of millets-Ananda Teertha Pyati, Deccan Herald, 9 October, 2012, http://www.im4change.org/success-stories/magic-of-millets-
ananda-teertha-pyati-17473.html

Centre asks states to include millets in mid-day meals; move likely to ease pressure on food stocks-Urmi Goswami, The Economic Times, 12 September, 2012, http://www.im4change.org/latest-news-updates/centre-asks-s
tates-to-include-millets-in-mid-day-meals-move-likely-to
-e ase-pressure-on-food-stocks-urmi-goswami-17098.html

Food in anganwadis should comprise local cuisine: panel by Bageshree S, The Hindu, 22 February, 2012, http://www.im4change.org/latest-news-updates/food-in-angan
wadis-should-comprise-local-cuisine-panel-by-bageshree-s
-1 3368.html

Millet group demands local sourcing clause in Food Security Bill, The Hindu Business Line, 9 December, 2011, http://www.im4change.org/latest-news-updates/millet-group-
demands-local-sourcing-clause-in-food-security-bill-1191
6. html
    


चित्र साभार- http://www.bioversityinternational.org/fileadmin/bioversityDocs/Announcements/Minor_Millets/Millet%20%28Setaria%20italica%29.JPG

 




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