गायब हो गई गरीबी के सरकारी आंकड़ो की पोल खोलने वाली रिपोर्ट

क्या आपको अर्जुन सेनगुप्ता समिति की रिपोर्ट की याद है? यही थी वह रिपोर्ट जिसने सरकार के गरीबी के आंकड़ों को झुठलाते हुए कहा कि तकरीबन 80% भारतीय रोजना 20 रुपये से भी कम की आमदनी में गुजारा करने को बाध्य हैं।नेशनल कमीशन फॉर इन्टरप्राइजेज इन द अनआर्गनाइज्ड सेक्टर के नाम से जानी गई यह रिपोर्ट अब सूचनाओं के सार्वजनिक जनपद से गायब है।

नेशनल कमीशन फॉर इन्टरप्राइजेज इन द अनआर्गनाइज्ड सेक्टर की वेबसाइट अब सक्रिय नहीं है (देखें-: http://nceus.gov.in) और ठीक इसी कारण यह संदेह पैदा होता है कि कहीं कोई है जो गरीबी, बेरोजगारी, भूमिहीनता तथा खेतिहर संकट के दिल-दहलाऊ आंकड़ों को लोगों की नजरों से छुपाकर रखना चाहता है ताकि सरकार इस मामले में शर्मिन्दगी से बच सके।यह रिपोर्ट सैकड़ों सरकारी वेबसाइट तथा वेब संसाधन-केंद्रों से अब आपको गायब मिलेगी।

(बहरहाल, अगर आप यह रिपोर्ट देखना चाहते हैं तो नीचे दी गई लिंक के सहारे अपनी कॉपी सुरक्षित कर सकते हैं)

नेशनल कमीशन फॉर इन्टरप्राइजेज इन द अनआर्गनाइज्ड सेक्टर के अध्यक्ष स्वर्गीय अर्जुन सेनगुप्ता थे। यह आयोग भारत सरकार ने 20-9-2004 को असंगठित क्षेत्र की समस्याओं की पड़ताल के लिए गठित किया था। बाकी बातों के अतिरिक्त आयोग ने देश के असंगठित क्षेत्र की स्थिति का जायजा लेते हुए इसकी प्रकृति, आकार, विस्तार तथा संभावनाओं का अध्ययन किया। आयोग ने खोजा कि 1990 के दशक में रोजगार वृद्धि की दर ठहराव की हालत क्यों रही. आयोग ने ठेला-रेहड़ी-खोमचा लगाने वाले लोगों के बारे में एक राष्ट्रीय नीति तैयार करने की दिशा में भी सरकार का दिशा-निर्देशन किया असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा से संबंधित कानून बनवाने की दिशा में भी आयोग का योगदान रहा। आयोग ने मजदूर और उसके परिवार को बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में मदद देने के संबंध में विशेष योजना बनाने की सिफारिश की। आयोग की एक सिफारिश यह भी रही कि खेतिहर मजदूरों और असंगठित क्षेत्र के छोटे तथा सीमांत किसानों को सामाजिक सुरक्षा के मद में मदद मुहैया करायी जाय।

आयोग की रिपोर्टों से नागरिक संगठनों के कार्यकर्ता, मजदूर संगठन तथा समाजविज्ञानी लगातार कुछ तथ्यों को उनकी प्रामाणिकता के लिहाज से उद्धृत करते रहे हैं। ऐसे कुछ तथ्य यहां नीचे प्रस्तुत किए जा रहे हैं-

नेशनल कमीशन फॉर इन्टरप्राइजेज इन द अनआर्गनाइज्ड सेक्टर  ने देश की 77 फीसद आबादी(साल 2004-05) के बारे में कहा कि वह रोजाना 20 रुपये तक की आमदनी में गुजारा करती है और यह आबादी गरीब तथा वंचितमानी जानी चाहिए।

देश के कार्यबल का 92 फीसद असंगठित क्षेत्र में कार्यरत है।*

खेतिहर मजदूरी का मुख्य कारण है- भूमिहीनता तथा खेतिहर मजदूर के पास रोजगार हासिल करने के अन्य संसाधनों का अभाव। साल 2004-05 में खेतिहर मजदूरों में भूमिहीन लोगों की तादाद 19.7 फीसद थी।*

किसी किसान का औसत मासिक खर्च  2770 रुपये है जो हर तरह के स्रोत मिलाकर उसे होने वाली आय (2115 रुपये मासिक) से 25 फीसद ज्यादा है। हर तरह के स्रोतों में दिहाड़ी मजदूरी भी शामिल है। इसी कारण छोटे और सीमांत किसानों का एक बड़ा तबका निरंतर कर्ज में डूबा रहता है। *

0.01 भूमि की मिल्कियत वाले किसान की औसत मासिक आमदनी 1380 रुपये है जबकि 10 हेक्टेयर या उससे ज्यादा के भू-स्वामित्व वाले किसान की औसत मासिक आमदनी 9667 रुपये है। *

खेतिहर मजदूरों को मिलने वाली मजदूरी काफी कम रही है और इस मजदूरी की वृद्धि दर 1993/94-2004/05 के दशक में घटी है। *

सीमांत किसान की औसत मासिक आमदनी बड़े किसान परिवार की औसत मासिक आमदनी की तुलना में 1/ 20 गुना कम है। *

जिन किसानों के पास दो हैक्टेयर से कम की जमीन है वे अपने परिवार के भरण-पोषण की जरुरतों को पूरा नहीं कर पाते। *

साल 1983 से 1993-94 की अवधि से तुलना करके देखें तो  साल 1993-94 से 2004-05 के बीच दिहाड़ी मजदूर सहित हर कोटि के कामगार के मजदूरी की वृद्धि दर घटी है। यही अवधि आर्थिक-सुधारों की भी कही जाती है। #

साल 1993-1994 से 2004-05 के बीच रोजदार की वृद्धि-दर 1.85 फीसद रही जो साल 1983 से 1993-94 की अवधि की रोजगार वृद्धि दर(2.03 ) से कम है। इसी तरह की कमी उक्त अवधि में मजदूरी की वृद्धि-दर और आमदनी में भी आई है। #

स्रोत:

* Report on Conditions of Work and Promotion of Livelihoods in the Unorganised Sector (2007)

# The Challenge of Employment in India: An Informal Economy Perspective, Volume-I, Main Report, National Commission for Enterprises in the Unorganised Sector (NCEUS), April, 2009

The Inclusive Media for Change team has made an effort in bringing before the readers some of the NCEUS reports that have gone missing from the public domain. These reports have been uploaded on our website’s national report section: http://www.im4change.org/state-report/india/36. Please check them by clicking the urls below:

 

Report on Conditions of Work and Promotion of Livelihoods in the Unorganized Sector, August, 2007

http://www.im4change.org/docs/758report_on_conditions_of_w
ork_and_promotion_of_livelihoods_in_the_unorganized_sector
.pdf

 

The Challenge of Employment in India An informal economy perspective (Vol 1) Main Report, April 2009

http://www.im4change.org/docs/221the_challenge_of_employme
nt_in_india_an_informal_economy_perspective_vol_1_main_rep
ort.pdf

 

Contribution of the Unorganized sector to GDP Report of the SubCommittee of a NCEUS Task Force, Working Paper no. 2, June 2008

http://www.im4change.org/docs/917contribution_of_the_unorg
anized_sector_to_gdp_report_of_the_su_committee_of_a_nceus
_task_force.pdf

 

Definitional and Statistical Issues Relating to Workers in Informal Employment by Sheila Bhalla, Working Paper no. 3, January 2009

http://www.im4change.org/docs/543definitional_and_statisti
cal_issues_relating_to_workers_in_informal_employment.pdf

 

Measures of Labour Force Participation and Utilization by J Krishnamurty and G Raveendran, Working Paper no. 1, January, 2008

http://www.im4change.org/docs/327measures_of_labour_force_
participation_and_utilization.pdf
 

 

 

References:

 

National Commission for Enterprises in the Unorganised Sector (NCEUS), http://www.indg.in/social-sector/unorganised-labour/nation
al_commission_for_enterprises_in_the_unorganised_sector-nc
eus.pdf

 

Women in Informal Employment: Globalizing and Organizing, http://wiego.org/informal-economy/national-commission-ente
rprises-unorganised-sector-india

 

Report of the Committee on Unorganised Sector Statistics, National Statistical Commission, Government of India, February 2012

http://mospi.nic.in/mospi_new/upload/nsc_report_un_sec_14m
ar12.pdf?status=1&menu_id=199

 

Dignity for the Elderly: Join the Campaign

http://www.im4change.org/news-alert/dignity-for-the-elderl
y-join-the-campaign-14893.html

 

Eleventh Five Year Plan (2007–2012), Social Sector, Volume II, Planning Commission, http://planningcommission.nic.in/plans/planrel/fiveyr/11th
/11_v2/11th_vol2.pdf

 

 

 




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