जेब भरे तो सेहत सुधरे- कोई जरुरी तो नहीं

जेब भरे तो सेहत सुधरे- कोई जरुरी तो नहीं

किसी देश की अर्थव्यवस्था तेज गति से छलांग लगा रही हो तो जरुरी नहीं कि वहां बच्चों के पोषण की दशा में भी सुधार हो रहा हो। प्रतिष्ठित लैंसेट ग्लोबल हैल्थ जर्नल में प्रकाशित एक शोध अध्ययन के मुताबिक प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद(जीडीपी) में बढोत्तरी का शुरुआती बालावस्था के कुपोषण को दूर करने से कोई सीधा रिश्ता नहीं है।(शोध-अध्ययन के लिए देखें नीचे दी गई लिंक)

यह अध्ययन निम्न और मध्यवर्ती आमदनी वाले  कुल 36 देशों के 121 स्वास्थ्य तथा जनांकिक(डेमोग्राफिक) सर्वेक्षणों के विश्लेषण पर आधारित है। अध्ययन को हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हैल्थ , यूनिवर्सिटी ऑफ गुटेनबर्ग (जर्मनी),  ईटीएच ज्यूरिख (स्वीट्जरलैंड) तथा आईआईटी गांधीनगर से जुड़े विशेषज्ञों ने तैयार किया है। अपने विश्लेषण में विशेषज्ञों ने पाया कि प्रति व्यक्ति औसत जीडीपी में वृद्धि तथा बच्चों के कुपोषण से संबंधित परिणामों के बीच कोई अनिवार्य रिश्ता नहीं है जबकि आम मान्यता है कि अर्थव्यवस्था में बढोत्तरी से प्रति व्यक्ति आमदनी में बढोत्तरी होती है और इसका सकारात्मक असर पोषण की स्थितियों पर पड़ता है।
 
अपने अवलोकन के आधार पर अध्ययन से जुड़े विशेषज्ञों की सलाह है कि स्वास्थ्य तथा पोषण के क्षेत्र में  सीधे निवेश करने की जरुरत है। विशेषज्ञों के अनुसार, अर्थव्यवस्था की वृद्धि की रणनीतियां अपनाकर इस भरोसे नहीं बैठा रहा जा सकता कि इसके सुपरिणाम देर-सबेरे कुपोषण को दूर करने के रुप में भी नजर आयेंगे।

अध्ययन में प्रति व्यक्ति जीडीपी की औसत बढत और बाल-कुपोषण की स्थिति में कमी के बीच अनिवार्य रिश्ता ना होने के तथ्य के पीछे कई कारण बताये गए हैं। कहा गया है कि आमदनी में बढोत्तरी होने के बावजूद अगर उसका बंटवारा लोगों में असमान ढंग से हो रहा हो तो गरीब तबके आमदनी में बढ़त ना होने के कारण उसकी पोषणगत दशा नहीं सुधरेगी। एक स्थिति यह भी हो सकती है कि आमदनी में बढोत्तरी हो लेकिन बढ़ी हुई आमदनी को पोषण की दशा में सुधारने में खर्च ना किया जाय। तीसरी स्थिति यह हो सकती है कि बढ़ी हुआ औसत आमदनी का उपयोग सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की दशा सुधारने में ना हो। सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाएं पोषणगत दशा को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। (मिसाल के लिए, टीकाकरण, गर्भावस्था और प्रसवोपरांत की देखभाल तथा साफ-सफाई और स्वच्छ पेयजल की मौजूदगी)

गौरतलब है कि लैंसेट पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन की पुष्टी सोशल प्रोग्रेस इंडेक्स 2014 नामक अध्ययन के निष्कर्षों से भी होती है। उक्त सूचकांक में भारत जीडीपी की बढोत्तरी के मामले में 132 देशों के बीच 94 वें स्थान पर है जबकि सामाजिक प्रगति के मामले में 102 नंबर पर। इससे संकेत मिलते हैं कि भारत अपनी आर्थिक वृद्धि को नागरिक-कल्याण के काम और परिणाम के रुप में बदल पाने में असफल रहा है।
 
इस कथा के विस्तार के लिए निम्नलिखित लिंक चटकाएं-
 

Association between economic growth and early childhood undernutrition: evidence from 121 Demographic and Health Surveys from 36 low-income and middle-income countries (2014)-Sebastian Vollmer, Kenneth Harttgen, Malavika A Subramanyam, Jocelyn Finlay, Stephan Klasen, SV Subramanian, Lancet Glob Health, e225–34, Vol 2, April (click here to download)

Why are economic growth and reductions in child undernutri
tion so weakly correlated
—and what can public policy do? (2014)-Abhijeet Singh, The Lancet Global Health,  Volume 2, Issue 4, Pages e185 - e186, April


Economic growth has done little to reduce child under-nutrition -Vani Manocha, Down to Earth, 27 March, 2014, http://www.im4change.org/latest-news-updates/economic-grow
th-has-done-little-to-reduce-child-under-nutrition-vani-
ma nocha-24619.html

 

 

Findings of Social Progress Index 2014, April, 2014, http://www.socialprogressimperative.org/data/spi/findings

http://www.socialprogressimperative.org/data/spi/countries/IND

 

Conference on Agriculture and Food Security held at Institute of Economic Growth, University of Delhi, 21 March, 2014, https://www.youtube.com/watch?v=f5qD9a8Weso  

We’re Not No. 1! We’re Not No. 1!-Nicholas Kristof, The New York Times, 2 April, 2014, http://www.nytimes.com/2014/04/03/opinion/were-not-no-1-we
re-not-no-1.html

 

Image Courtesy: Millennium Development Goals: India Country Report 2014, MoSPI,
http://www.im4change.org/docs/242mdg_2014.pdf   

 

(पोस्ट में इस्तेमाल की गई तस्वीर साभार http://st1.health.india.com/wp-content/uploads/2013/03/child-malnutrition.jpg से)





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