मनरेगा में बड़ा घोटाला, पंचायत पदाधिकारियों ने अपनों को किया भुगतान

राजस्थान में यह महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में घोटाले का संभवतः सबसे बड़ा मामला है। एक ऐसा मामला जो केंद्र सरकार की इस फ्लैगशिप योजना में पंचायतों के स्तर पर हो रहे गबन, धोखाधड़ी और जालसाजी की मिसाल है।   

इस भ्रष्टाचार का खुलासा डूंगरपुर जिला प्रशासन द्वारा कराई गई जांच से हुआ है। पंचायत पदाधिकारियों ने बिना काम कराए और बिना सामानों की सप्लाई के ही ५८ लाख लाख रुपए से ज्यादा का भुगतान कर दिया। और इसमें से ज्यादातर भुगतान खुद को ही या अपने रिश्तेदारों को किया। अब जिला प्रशासन ने दोषी पदाधिकारियों से इस रकम को वसूलने का फैसला किया है। घटना सीमलवाड़ा पंचायत समिति के तहत आने वाले ग्राम पंचायत झरनी की है।

जिला कलेक्टर पूर्ण चंद्र किशन ने पंचायत के दौरे के समय पाया कि वहां मनरेगा के तहत हो रहे काम में कायदों का पालन नहीं किया जा रहा है। तब उन्होंने तकनीकी और एकाउंट संबंधी जांच के लिए दो अलग-अलग दल वहां भेजे। इन दलों ने कुल १६ कार्यों की जांच की, जिन पर ६३ लाख २६ हजार ११० रुपए खर्च हुए थे। जांच दलों को वहां तीन लाख ९० हजार ३४४ रुपए खर्च होने के ही सबूत मिले। जांच दलों ने सिफारिश की है कि बाकी ५८ लाख ३५ हजार ७६६ रुपए की रिकवरी पंचायत पदाधिकारियों से की जानी चाहिए।

जांच दल ने तत्कालीन सपरंच जैशा बाई डामोर, तत्कालीन ग्राम सेवक पदेन सचिव मणिलाल प्रजापत, मगनलाल बरंडा और गौतम लाल बरंडा को बिना सामान प्राप्त किए ही भुगतान कर देने का दोषी पाया है। गौरतलब है कि जिन लोगों ने बिना सामानों की आपूर्ति किए भुगतान पा लिया, उनमें कई खुद पंचायत पदाधिकारी या उनके रिश्तेदार हैं। मसलन, उप सरपंच शांतिलाल लबाना, उनके बेटे और सरपंच जैशा भाई डोमोर के बेटे प्रो. रामलाल इनमें शामिल हैं। उप सरपंच शांतिलाल और उनके बेटे पंकज कुमार लबाना को बिना सामान की सप्लाई किए ही भुगतान कर दिया गया। इनके अलावा पांच दूसरे लोगों को भी ऐसे भुगतान से फायदा पहुंचाया गया।

सबसे ज्यादा रिकवरी पूर्व सरपंच के बेटे रामलाल डामोर से होनी है। उनसे २० लाख दो हजार रुपए वसूलने की सिफारिश की गई है। उप सरपंच शांतिलाल लबाना से दो लाख ७५ हजार रुपए और उनके बेटे पंकज कुमार लबाना से दो लाख ३५ हजार रुपए की वसूली होगी। जिला कलेक्टर ने मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी को वसूली का निर्देश देते हुए कहा है कि इन निर्माण कार्यों में जिस तरह बिना सामान की सप्लाई किए रकम ले ली गई, वह गबन की श्रेणी में आता है। इसलिए सभी दोषियों को नोटिस जारी कर जल्द से जल्द रिकवरी की जाए। उन्होंने कहा है कि अगर तत्कालीन सरपंच और सप्लायर रकम जमा नहीं कराते हैं तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए।

लेकिन यह मामला सिर्फ ऐसी गड़बड़ियों का ही नहीं लगता है, जिसमें महज रिकवरी काफी हो। दरअसल, पहली नजर में यह धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला भी लगता है। मसलन, उप सरपंच शांतिलाल ने खुद सप्लायर बनकर अपने दस्तखत से रकम उठा ली। जांच के दौरान पाया गया कि लाखों रुपए का भुगतान बिना पक्के बिल के सिर्फ सादे वाउचरों पर कर दिया गया। बल्कि आठ लाख ९० हजार रुपए का भुगतान तो बिना सादे वाउचरे के ही कर दिया गया। एकाउंटिग के नियमों की खुली अवहेलना करते हुए सीमलवाड़ा गांव के हेमंत कुमार शाह नाम के एक कथित सप्लायर को बिना एकाउंट पेयी चेक के ही एक लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया।

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि इस ग्राम पंचायत में हर काम जुबानी चल रहा था। जब जांच दल ने रजिस्टरों की मांग की तो उन्हें बताया गया कि यहां ना तो भंडार में मौजूद सामानों का कोई रजिस्टर है, न पंचायत की जायदाद का और ना ही सामनों की खरीद का। यहां तक कि बैठकों की कार्यवाही दर्ज करने वाला कोई रजिस्टर भी मौजूद नहीं है। जाहिर है, सिर्फ रुपए की रिकवरी ऐसी कार्रवाई नहीं है, जिससे मनरेगा में भ्रष्टाचार पर रोक के लिए मिसाल कायम हो। इसके लिए आपराधिक प्रक्रिया संहिता के तहत कार्रवाई किए जानेकी जरूरत होगी।

आगे पढ़ें:

Poor people unite against corrupt sarpanches,
http://www.im4change.org/articles.php?articleId=777

The system strikes back by Vidya Subrahmaniam, The Hindu, 17 December, 2009,
http://www.hindu.com/2009/12/17/stories/2009121756000900.htm    

We will not sit quiet on social audit issue in NREGS, Aruna Roy tells Gehlot government by Sunny Sebastian, The Hindu, 17 December, 2009,
http://www.hindu.com/2009/12/17/stories/2009121761471000.htm    

Violence and threats bring a government to its knees by Vidya Subrahmaniam, The Hindu, 16 December, 2009,
http://www.hindu.com/2009/12/16/stories/2009121655370900.htm    

Planning Commission drafting reforms for NREGA, Livemint,20 October, 2009,
http://www.livemint.com/2009/10/20225136/Planning-Commissi
on-drafting-r.html
    

Social audits lead to action against corrupt officials,
http://www.im4change.org/articles.php?articleId=251 

Status of NREGS in Bhilwara, Rajasthan during 2008-09,
http://nrega.nic.in/writereaddata/citizen_out/Dist_MPR_emp
_reg_2724_0809.html
 

Bhilwara Social Audit, Association for India’s Development,
http://aidindia.org/main/content/view/1094/1/ 

Social Audit in Rajasthan Undertaken by People, October 12, 2009,
http://www.thesouthasian.org/archives/2009/social_audit_in
_rajasthan_unde.html
 

How a social audit makes people accountable, 5 October, 2009,
http://business.rediff.com/column/2009/oct/05/guest-how-a-
social-audit-makes-people-accountable.htm
 

12 FIRs in Bhilwara after social audit of NREGS, 12 October, 2009, The Times of India,
http://timesofindia.indiatimes.com/city/jaipur/12-FIRs-in-
Bhilwara-after-social-audit-of-NREGS/articleshow/5113274.c
ms
 

NREGS under scanner in Bhilwara by Sunny Sebastian, The Hindu, 10 October, 2009,
http://beta.thehindu.com/news/states/other-states/article3
1998.ece

Audit of National Rural Employment Guarantee Scheme, 7 October, 2009,
http://www.cainindia.org/news/10_2009/audit_of_national_ru
ral_employment_guarantee_scheme_.html
 

NREGS audit a relief to poverty-stricken by Narayan Bareth, The Asian Age, 12 October, 2009,
http://www.asianage.com/presentation/leftnavigation/news/i
ndia/nregs-audit-a-relief-to-poverty-stricken.aspx




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