यह कैसी सौ फीसदी मंजूरी..!

उद्योगपतियों से लेकर प्रधानमंत्री तक एक ना एक रुप में वन और पर्यावरण मंत्रालय की आलोचना करते हैं कि वह ग्रीन-क्लीयरेंस के नाम पर औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे के निर्माण के काम को रोक देता है। लेकिन बीते पाँच सालों में इस मंत्रालय ने जो निर्णय लिए हैं , उसके अध्ययन के आधार पर पर्यावरण के मुद्दे पर काम करने वाली एक संस्था के निष्कर्ष कुछ और ही इशारा करते हैं। संस्था की रिपोर्ट(देखें नीचे दी गई लिंक) के अनुसार मंत्रालय ने बीते पाँच सालों में जल-विद्युत और सिंचाई से संबंधित कुल 262 परियोजनाओं को हरी झंडी दी जबकि इन परियोजनाओं के अमल होने पर पर्यावरण की सुरक्षा से संबंधित नियमों की अवहेलना होने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की पूरी आशंका है।

द साऊथ एशियन नेटवर्क ऑन डैमस्, रिवर्स एंड पीपल नाम की संस्था ने बीते पाँच सालों में मंत्रालय से जुड़ी विशेषज्ञों की शीर्ष निर्णय-संस्था द्वारा आहूत 63 बैठकों की विवरणी का अध्ययन किया है। शीर्ष-निर्णय संस्था का काम किसी परियोजना का मूल्यांकन करना और यह बताना है कि उसे मंजूरी दी जाय या नहीं और अगर मंजूरी दी जाय तो किन शर्तों और नियमों के अधीन।.

वन और पर्यावरण मंत्रालय से जुड़ी एक्सपर्ट अप्रूवल कमेटी ने बीते पाँच सालों की अवधि में किसी भी परियोजना को नामंजूर नहीं किया है, वैसी स्थितियों में भी नहीं जब प्रस्तावित परियोजना को मौजूदा संरक्षित अभयारण्य स्थलों में चलाने की बात हो। यही नहीं, समिति ने इस बात पर भी विचार करना जरुरी नहीं समझा कि जिन परियोजनाओं को मंजूरी दे दी गई है उनमें पर्यावरण या सामाजिक दायित्वों से जुड़े नियम-कायदों का पालन हो रहा है या नहीं। समिति ने मंजूरी का फैसला सुनाते समय यह भी नहीं देखा कि ईआईए रिपोर्ट यानि पर्यावरण पर पड़ने वाले असर से संबंधित अध्ययन-दस्तावेज कुछ उसी तरह तैयार किया गया है मानो कहीं की ईंट और कहीं के रोड़े से भानुमति का कुनबा तैयार किया गया है, और यह भी कि इस दस्तावेज में तो समाज पर पड़ने वाले असर का जिक्र तक नहीं है, अथवा प्रस्तावित परियोजना के क्षेत्र में परियोजना के प्रभावों को लेकर कोई जन-सुनवाई नहीं हुई है जबकि कानूनन ऐसा करना जरुरी है। किसी एक नदी में एक से ज्यादा परियोजनाओं को मंजूरी दे दी गई लेकिन समिति ने नहीं सोचा कि इन सारी परियोजनाओं को एक साथ एक ही नदी पर चलाने से असर क्या होगा?

द साऊथ एशियन नेटवर्क ऑन डैमस्, रिवर्स एंड पीपल ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिलाया है कि वन और पर्यावरण मंत्रालय प्रस्तावित परियोजनाओं के बारे में पूछी गई जानकारी और मंजूरी के लिहाज से उनकी स्थिति के ब्यौरे सार्वजनिक नहीं करता जबकि सूचना के अधिकार के तहत ऐसा करना जरुरी है और इसके बारे में केंद्रीय सूचना आयोग ने साल 2012 की फरवरी में स्पष्ट निर्देश भी दिया था। 

इस कथा के विस्तार के लिए देखें नीचे दी गई लिंक-

"Analysis of MoEF Exp Appraisal Com on RVP Feb 2013" contains analysis of the functioning of this EAC from its first meeting in April 2007 to its latest, 63rd meeting in Dec 2012.

http://www.im4change.org/siteadmin/http://www.im4change.or
g/siteadmin/tinymce/uploaded/Analysis%20of%20MoEF%20EAC%20
on%20River%20Valley%20Projects.pdf

 

"Status of Stage 1 and 2 Clearances from EAC RVP of MoEF Feb 2013" contains project wise details of EAC decisions in its various meetings

http://www.im4change.org/siteadmin/http://www.im4change.or
g/siteadmin/tinymce/uploaded/Stage%20one%20and%20two%20Env
ironment%20Clearance%20status.pdf

 

Analysis of functioning of MoEF's Expert Appraisal Committee on River Valley Projects -South Asia Network on Dams, Rivers & People

http://www.im4change.org/rural-news-update/analysis-of-fun
ctioning-of-moef039s-expert-appraisal-committee-on-river-v
alley-projects-19204.html

 

Ministry of Environment and Forests Notification, 14 September, 2006, http://envfor.nic.in/legis/eia/so1533.pdf

 

Flood of protest hits Indian dams-Jane Qiu, 5 December, 2012, http://www.nature.com/news/flood-of-protest-hits-indian-da
ms-1.11932

 

The new environment clearance shopping mall-Manju Menon and Kanchi Kohli, Infochange, September 2006, http://infochangeindia.org/environment/analysis/the-new-en
vironment-clearance-shopping-mall.html

 

Battle against dams building up, The Hindu, 6 May, 2012, http://www.im4change.org/rural-news-update/battle-against-
dams-building-up-14996.html

 




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