सूचना के अधिकार के सात साल- एक जायजा प्रगति का..

सूचना के अधिकार के सात साल- एक जायजा प्रगति का..

आजादी के बाद से अबतक शासन को पारदर्शी बनाने के लिए जो प्रयास हुए उसमें सूचना का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण कदम है। बहरहाल, इस कानून की उल्लेखनी सफलता महज 0.3 फीसदी भारतीयों तक सीमित है। देश की आबादी में बस इतनी ही तादाद सूचना के अधिकार के तहज अर्जी डालती है। सोचिए, उस स्थिति में क्या होगा जब देश की एक या दो फीसदी आबादी अपने शासकों की जवाबदारी तय करने के लिए आरटीआई की अर्जी डालकर कठिन सवाल पूछने लगे! आरटीआई की अर्जी डालने वालों की तादाद भले कम हो लेकिन यह संख्या ठहरी नहीं है- लगातार बढ़ रही है।

कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइटस् इनिशिएटिव(सीएचआरआई) ने केंद्र और 10 राज्यों के आरटीआई कानूनों के आकलन के आधार पर अपनी सालाना रपट में कुछ दिलचस्प तथ्य उजागर किए हैं।(रपट के लिए देखें नीचे दी गई लिंक) अध्ययन में उन राज्य सूचना आयोगों के नाम बताये गये हैं जो लगातार दूसरे साल अपनी वेबसाइट पर सालाना रपट(वर्ष 2011-12) प्रस्तुत कर पाने में नाकाम रहे। सालाना रपट सार्वजनिक कर पाने में नाकाम रहने वाले ये राज्य हैं-: गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, तमिलनाडु, मणिपुर, सिक्किम और त्रिपुरा। कहना ना होगा कि बीते साल की रिपोट जारी कर पाने में असफल रहे इन राज्यों के सूचना आयोगों पर अगली रपट(जनवरी से दिसंबर 2012) भी जारी करने का काम बकाया है। अब तक बस एक राज्य (महाराष्ट्र) अपनी वेबसाइट पर ऐसी रपट पेश कर पाया है। यह बात भी सामने आई है कि ज्यादातर राज्य सूचना आयोग काम में कोताही बरतने वाले लोकसूचना अधिकारियों पर अपनी संवैधानिक शक्ति का इस्तेमाल से दंडात्मक कार्रवाइ करते हुए उनपर जुर्माना लगाने में संकोच बरतते हैं।

द यूज ऑव राइट टू इन्फॉरमेशन लॉज इन इंडिया- अ रैपिड स्टडी बेस्ड ऑन एनुअल रिपोर्टस् ऑव इन्फॉरमेशन कमीशनस्(2011-12) नामक इस अध्ययन में बताया गया है सूचना का अधिकार के तहज अर्जी डालने वाले लोगों में 18 वर्ष या उससे ज्यादा की उम्र वाले लोगों की संख्या महज 0.5 फीसदी है। सूचना के अधिकार के तहत डाली गई ज्यादातर अर्जियों को यह कहते हुए खारिज किया गया है कि इससे किन्ही जरुरी मसलों की गोपनीयता समाप्त हो जाएगी।4000 से ज्यादा आरटीआई अर्जियों को यह कहते हुए खारिज किया गया कि इन अर्जियों का संबंध केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित उन 25 गुप्तचर या सुरक्षा संगठनों से है जिनका उल्लेख सूचना के अधिकार कानून के सेक्शन 24 में किया गया है।

ज्यादातर राज्य आरटीआई की अर्जी डालने वालों का वर्गीकरण जाति, समुदाय या लिंग के आधार पर करने में असफल रहे हैं। सिर्फ छत्तीसगढ़ में आरटीआई अर्जी डालने वाले लोगों की वर्गीकरण वर्ग(बीपीएल), जाति(एससी-एसटी), लिंग(स्त्री-पुरुष) और शहरी-ग्रामीण के रुप में किया गया है। मिसाल के लिए, छत्तीसगढ़ में कुल 2351 महिलाओं( अर्जी डालने वाले लोगों की कुल तादाद का 4.81 प्रतिशत) ने साल 2011-12 में आरटीआई की अर्जी डाली। आरटीआई अर्जी डालने वाले लोगों में केवल 2.49 फीसदी नागरिक ही बीपीएल श्रेणी के हैं जबकि अनुसूचित जाति से ऐसे अभ्यर्थियों की तादाद 3.38 फीसदी और अनुसूचित जनजाति के आरटीआई अभ्यर्थियों की तादाद केवल 3.06 फीसदी है।

सबसे ज्यादा आरटीआई की अर्जी कुल पाँच सरकारी विभागों में डाली गई। इसमें सर्वप्रमुख हैं राजस्व विभाग और शहरी विकास विभाग। कई राज्यों में ग्रामीण विकास विभाग और पुलिस महकमे में सर्वाधिक आरटीआई अर्जी डाली गई है।

इस कथा के विस्तार के लिए देखें नीचे दी गई लिंक-

 

The Use of Right to Information Laws in India-A Rapid Study Based on the Annual Reports of Information Commissions (2011-12) prepared by Venkatesh Nayak, Amrita Paul, Seema Choudhary and Maja Daruwala, Commonwealth Human Rights Initiative (CHRI), http://www.im4change.org/siteadmin/http://www.im4change.or
g/siteadmin/http://www.im4change.org/siteadmin/tinymce//
//uploaded/RTI%20study.pdf

8 years on, RTI Act counts its milestones -Shyamlal Yadav, The Indian Express, 12 October, 2013, http://www.im4change.org/latest-news-updates/8-years-on-rt
i-act-counts-its-milestones-shyamlal-yadav-22978.html

40 lakh used their right to information in 2011-12 -Anahita Mukherji, The Times of India, 12 October, 2013, http://www.im4change.org/latest-news-updates/40-lakh-used-
their-right-to-information-in-2011-12-anahita-mukherji-2
29 72.html

Taking the mass RTI road to land rights, http://www.im4change.org/news-alerts/taking-the-mass-rti-r
oad-to-land-rights-22517.html

Move to amend RTI fires citizen protest, http://www.im4change.org/news-alerts/move-to-amend-rti-fir
es-citizen-protest-22264.html

 

चित्र साभार- http://hp.gov.in/HPPSC/image.axd?picture=2009%2F6%2Frti1[1].jpg

 

 




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