जीविका

पचास रुपए दिन की मजदूरी करने वाला झारखंड का ये किसान अब साल में कमाता है 50 लाख रुपएपचास रुपए दिन की मजदूरी करने वाला झारखंड का ये किसान अब साल में कमाता है 50 लाख रुपए

रांची(झारखंड)। किसान गंसू महतो एक समय 50 रुपए दिहाड़ी की मजदूरी के लिए घर से 25 किलोमीटर दूर जाते थे, लेकिन अपनी सूझबूझ से इन्होंने अपनी 9 एकड़ जमीन को बंजर से उपजाऊ बनाया और अब सालाना 50 लाख रुपए की आमदनी ले रहे हैं।किसान गंसू महतो (40 वर्ष) ने बताया, "पिछले साल एक एकड़ खेत में जलबेरा के फूल 35 लाख रुपए के बेचे और 8 एकड़ खेत की सब्जियां 15 लाख रुपए की बेची। 9 एकड़ जमीन में लागत लगभग 20 लाख रुपए आयी। इस हिसाब से बचत 30 लाख रुपए हुई।" गंसू अभी अपनी इस आमदनी से संतुष्ट नहीं हैं इनका कहना है साल 2018 में केवल सब्जी ही 50 लाख रुपए की बेचूंगा.गांव कनेक्शन पर प्रकाशित इस कथा को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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तकनीक की मदद से ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार की पहलतकनीक की मदद से ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार की पहल

कौशिक यनामंद्रम और पीयूष सोहानी ने तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में एक कंपनी की स्थापना की है, नाम है सस्टेन अर्थ एनर्जी सॉल्यूशंस़ सितंबर, 2013 में स्थापित इस कंपनी के जरिये ये लोग ग्रामीण इलाकों में पर्यावरण अनुकूल ईंधन मुहैया कराते हैं. 28 साल के कौशिक इस कंपनी में फील्ड ऑपरेशंस के निदेशक की जिम्मेवारी संभालते हैं. वहीं, पीयूष इस कंपनी के सीइओ हैं और वित्तीय व तकनीकी मामलों के लिए जवाबदेह हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय में एमटेक की पढ़ाई के दौरान कौशिक की मुलाकात पीयूष से हुई़ वहीं पर ये दोनों क्लासमेट और रूममेट बने़ कॉलेज के एक प्रोजेक्ट के लिए दिल्ली से लगभग 35 किमी दूर सिरोही गांव में इनका जाना हुआ़ वहां जाकर इन्होंने पाया कि गांव की 70 प्रतिशत आबादी चूल्हे पर गोबर के उपले जला कर खाना बनाती है़ इस तरह काम करनेवाली महिलाओं की धुएं से भला क्या हालत होती होगी,

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सॉफ्टवेयर इंजीनियर बना मधुमक्खी पालक

अमेरिका में नौकरी का ऑफर छोड़ कृष्णकांत ने चुना मिट्टी से जुड़ना  किसी सॉफ्टवेयर इंजीनियर का मधुमक्खीपालक बनना, सुनने में कुछ अजीब लगता है़ लेकिन यह सच कर दिखाया है तमिलनाडु के कृष्ष्णकांत ने़ इन्होंने विप्रो की नौकरी छोड़ कर अपने गांव में मधुमक्खीपालन का व्यवसाय शुरू किया़ आज वे इस क्षेत्र में नवोन्मेष कर, शहद की यूनिफ्लोरल किस्में विकसित कर रहे हैं. आखिर यह सब कैसे हुआ संभव, आइए जानें- तमिलनाडु स्थित करुर जिले के एक छोटे से गांव में जन्मे कृष्ष्णमूर्ति सनापरात्ती पालनीसामी ने अपने करियर की शुरुआत विप्रो टेक्नोलॉजीज, बेंगलुरु में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर की़  लगभग दो साल तक इस पद पर काम करने के बाद एक दिन कंपनी ने उन्हें एक ऑनसाइट प्रोजेक्ट के लिए प्रोमोशन के साथ अमेरिका जाने का ऑफर दिया़ यह कृष्णमूर्ति के जीवन का अहम पड़ाव था़ अपना देश छोड़ कर दूसरे देश में काम करना

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IT करियर छोड़ शुरू किया अपना डेयरी फार्म, आज 1 करोड़ रु. का है टर्नओवर

  यह कहानी संतोष डी सिंह की है जिन्होंने आईटी करियर छोड़कर डेयरी फ़ार्म उद्योग खड़ा किया, आज उनके उद्यम का कुल टर्नओवर 1 करोड़ रुपए सालाना है। कंपनी : अमृता डेयरी फार्म्स  संस्थापक : संतोष डी सिंह  क्या खास : आईटी सेक्टर प्रोफेशनल द्वारा कम संसाधनों के साथ शुरू किया गया उद्यम जो समय के साथ कामयाब बिजनेस की शक्ल ले चुका है।     बेंगलुरु से तकनीकी शिक्षा में पोस्ट ग्रैजुएशन की डिग्री लेने के बाद संतोष डी सिंह को इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में एक अच्छी नौकरी मिल गई। डेल और अमेरिका ऑनलाइन जैसे आईटी सेक्टर के मल्टीनेशनल दिग्गजों के साथ करीब 10 साल तक संतोष ने काम किया। इन 10 सालों के अपने अनुभव को साझा करते हुए संतोष बताते हैं कि ‘उन दिनों भारत में आईटी इंडस्ट्री फल-फूल रही थी। मुझे अपने काम के दौरान दुनिया के कई देशों का सफर करने का मौका मिला। देश-विदेश की यात्रा के बीच मुझे ऐसे कई

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सिर्फ 1 लाख खर्च कर 4 महीने में ही कमा डाले 8 लाख रु, अपनाया ये खास तरीकासिर्फ 1 लाख खर्च कर 4 महीने में ही कमा डाले 8 लाख रु, अपनाया ये खास तरीका

सीकर। रसीदपुरा के किसान ने खेती से मुनाफे का नया रास्ता खोजा है। दुर्गाप्रसाद ओला ने नीदरलैंड खीरा की बुवाई कर सिर्फ चार महीने में आठ लाख रुपए की पैदावार की है। किसान का दावा है कि नीदरलैंड से बीज मंगवाकर खीरा की पैदावार करने वाला वह राजस्थान में पहला किसान है। इस खीरे में बीज नहीं होने की वजह से बड़े होटल-रेस्त्रां में डिमांड रहती है दुर्गाप्रसाद ने बताया कि उसने कुछ साल पहले उद्यान विभाग से 18 लाख रुपए का अनुदान लेकर खेत में सैडनेट हाउस लगाया। अनुदान मिलने के बाद छह लाख रुपए खुद को खर्च करने पड़े। अक्टूबर 2014 में एक कंपनी प्रतिनिधि से मिली जानकारी के बाद 72 हजार रुपए में नीदरलैंड से बीज मंगवाया। एक बीज के छह रुपए लगते हैं। 30 हजार रुपए बुवाई अन्य खर्चा लग गया। चार महीने के दौरान वह आठ लाख रुपए के खीरे बेच चुका है। खर्चा निकालकर सात लाख

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