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हर खेत को पानी के सुंदर सपने को पूरा करने में सावधानी जरूरी

बिजलीकरण का सुंदर सपना लगभग पूरा हो रहा है. अब सरकार हर खेत को पानी देने के सुंदर सपने को पूरा करने के लिए सचेष्ट है. बिहार सरकार की यह कोशिश ऐतिहासिक है. पर, संकेत हैं कि बड़ी संख्या में बंद पड़े राजकीय नलकूपों को फिर से चालू करने की बड़ी योजना शुरू हो सकती है. वह भी अच्छी बात है. पर, उस सिलसिले में इस बात पर ध्यान रखना जरूरी है कि हम कितना भूजल निकालने जा रहे हैं. क्या उतने के पुनर्भरण का भी देर-सवेर प्रबंध हो सकेगा? यदि हो सकेगा तो बहुत अच्छा. यदि नहीं तो हम आगे के जल संकट के लिए तैयार रहें. हालांकि, इस संबंध में कोई पक्की बात विशेषज्ञ ही बता सकते हैं. पर, इस देश का ‘पारंपरिक विवेक' खेती के लिए भूजल की जगह सतही जल के इस्तेमाल के पक्ष में रहा है. इसलिए, हजारों साल से भूजल संकट नहीं रहा. संयुक्त

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राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने की चुनौती-- जयंतीलाल भंडारी

इस समय देश के समक्ष चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान बढ़े हुए राजकोषीय घाटे की चिंताएं मुंह बाए खड़ी हैं। वित्तीय वर्ष 2018-19 के बजट में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 6.24 लाख करोड़ रुपये या सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.3 प्रतिशत रखा गया था। नवंबर, 2018 के अंत तक यह 7.17 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जो बजट अनुमान से करीब 15 प्रतिशत ज्यादा है। इसका मतलब यह है कि सरकार को लक्ष्य पूरा करने के लिए राजकोषीय अधिशेष की जरूरत होगी। लेकिन इस समय कच्चे तेल की कीमतें 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे जाने तथा डॉलर की तुलना में रुपए के 70 के स्तर पर पहुंचने से अर्थव्यवस्था की स्थिति में सुधार आया है। लेकिन चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 के पिछले 9 माह में जो राजस्व और राजकोषीय घाटा ऊंचाई पर पहुंच गया है, उसे पाटा जाना मुश्किल है। पिछले दिनों भारतीय स्टेट बैंक की

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फसल बीमा से प्राइवेट कंपनियों ने कमाए करीब 3000 करोड़, सरकारी कंपनियों को घाटा: रिपोर्ट

नई दिल्ली: 11 निजी बीमा कंपनियां मार्च 2018 के लिए फसल बीमा व्यवसाय से 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा दर्ज करने के लिए तैयार हैं, जबकि सरकारी बीमा कंपनियों को 4,085 करोड़ रुपये के नुकसान का नुकसान हुआ है. इस दौरान बाढ़, भूकंप या बारिश की कमी से फसल के नुकसान के लिए किसानों द्वारा किए गए दावों की तुलना में सरकार द्वारा निजी बीमा कंपनियों ने भारी मात्रा में प्रीमियम इकट्ठा किया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार निजी क्षेत्र की 11 बीमा कंपनियों ने कुल 11,905.89 करोड़ रुपये प्रीमियम इकट्ठा किया लेकिन उन्होंने केवल 8,831.79 करोड़ रुपये के दावों का ही भुगतान किया.  वहीं पांच सरकारी बीमा कंपनियों ने 13,411.10 करोड़ रुपये का प्रीमियम सरकार और किसानों से इकट्ठा किया और फसल नुकसान की वजह से किसानों को 17,496.64 करोड़ रुपये का भुगतान दावों के रूप

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लोकपाल पर सर्च कमेटी फरवरी अंत तक नाम की सिफारिश करे: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने लोकपाल पर सर्च कमेटी के लिए देश के पहले लोकपाल की नियुक्ति की खातिर नामों के पैनल की अनुशंसा करने की समय सीमा फरवरी के अंत तक निर्धारित की है. सर्च कमेटी के प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) रंजन प्रकाश देसाई हैं. केंद्र की तरफ से पेश हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पीठ से कहा कि आधारभूत ढांचे की कमी और श्रम बल जैसी कुछ समस्याएं हैं जिस कारण से सर्च कमेटी मुद्दे पर विचार विमर्श नहीं कर सकी. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र को निर्देश दिया कि सर्च कमेटी को आवश्यक सुविधाएं और श्रम बल मुहैया कराया जाए ताकि वह अपना काम पूरा कर सके. पीठ में जस्टिस एलएन राव और जस्टिस एसके कौल भी शामिल थे. मामले की अगली सुनवाई सात मार्च को होगी. द वायर हिन्दी पर प्रकाशित इस कथा को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां

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मोदी सरकार के पास रोज़गार वृद्धि का नहीं है कोई आंकड़ा, संसदीय समिति करेगी खुलासा

स्वाति चतुर्वेदी, एम के वेणु  नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी सरकार ने एक संसदीय समिति के सामने स्वीकार किया है कि उनके पास 2014 के बाद से नई नौकरियों की संख्या का कोई वास्तविक आंकड़ा नहीं है. पिछले छह महीनों से केंद्र सरकार का जीडीपी वृद्धि पर प्राक्कलन समिति के साथ लंबे समय तक टकराव चलता रहा. भाजपा के दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी इस समिति के अध्यक्ष हैं. भाजपा और संसदीय समिति के कुछ सदस्यों ने कई मुद्दों पर असहमति जताई है, जिसमें यह भी शामिल है कि भारत में रोजगार को मापने के लिए विश्वसनीय तंत्र की कमी है. सूत्रों के मुताबिक, मुरली मनोहर जोशी अब लोकसभा में रिपोर्ट पेश करेंगे. पहली बार, यह समिति के तीन भाजपा सदस्यों ने असंतोष व्यक्त करते हुए विरोध पत्र दिया है. सरकार द्वारा स्पष्ट रूप से संकेत दिए जाने पर, कुछ भाजपा सदस्यों ने तर्क दिया कि समिति के निष्कर्ष नौकरी में वृद्धि की वास्तविकता से मेल

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