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स्वच्छता सर्वेक्षण में हमारे शहर-- अभिषेक कुमार

इस बात में कोई संदेह नहीं कि आज आबादी के बोझ से चरमराते हमारे शहरों के लिए मूलभूत सुविधाएं पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. इन मूलभूत सुविधाओं में पीने का साफ पानी, शोधित सीवरेज, कचरे का निष्पादन, देश के हर कोने में चौबीस घंटे बिजली आपूर्ति, सुचारु यातायात और बेहतर चिकित्सा हासिल करना जैसी चुनौतियां शामिल हैं. लेकिन, इनसे भी ज्यादा जरूरी है स्वच्छ माहौल, जो तभी मिल सकता है, जब हमारी सरकारें, स्थानीय प्रशासन और हर शहरी की मानसिकता साफ-सफाई को लेकर एकदम स्पष्ट हो. इसके आकलन का एक तरीका स्वच्छता का सर्वेक्षण हो सकता है, जिसकी तमाम कसौटियों पर मध्य प्रदेश का इंदौर लगातार तीसरी बार पहले नंबर पर घोषित किया गया है. देश की सबसे स्वच्छ राजधानियों में भी मध्य प्रदेश को ही अहमियत मिली और भोपाल सबसे साफ राजधानी घोषित की गयी. इस सूची में 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में अहमदाबाद और पांच

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फरवरी में फेसबुक पर भाजपा के प्रचार में ख़र्च हुए 2.37 करोड़ रुपये

नई दिल्ली: भारत में राजनीतिक विज्ञापन के लिए विज्ञापनदाताओं ने पिछले महीने चार करोड़ से अधिक रुपये फेसबुक पर खर्च किए. इनमें से आधे से अधिक विज्ञापन सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगियों ने दिए. यह आंकड़ा फेसबुक के ऐड आर्काइव रिपोर्ट से सामने आया है. भाजपा और उसके सहयोगियों ने फरवरी में फेसबुक पर 2.37 करोड़ रुपये खर्च किए. इस दौरान फेसबुक पर राजनीतिक विज्ञापन के लिए क्षेत्रीय पार्टियों ने केवल 19.8 लाख रुपये खर्च किए. वहीं कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगियों ने फेसबुक पर राजनीतिक विज्ञापन के लिए केवल 10.6 लाख रुपये खर्च किए. लाइव मिंट के अनुसार, एक भाजपा समर्थित पेज भारत के मन की बात ने पिछले महीने सोशल मीडिया पर अकेले एक करोड़ का राजनीतिक विज्ञापन दिया. लोकसभा चुनावों को देखते हुए फेसबुक ने राजनीतिक विज्ञापनों को लेकर अपने पारदर्शिता संबंधी नियमों को सख्त कर दिया है. भारत में फेसबुक पर विज्ञापन देने वालों को सबसे पहले

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सरकार की मीडिया के ख़िलाफ़ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के इस्तेमाल की कोशिश निंदनीय: मीडिया संगठन

नई दिल्ली: रफाल मामले में अटॉर्नी जनरल द्वारा सुप्रीम कोर्ट में की गई टिप्पणियों की एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने बृहस्पतिवार को निंदा की. साथ ही, गिल्ड ने सरकारी गोपनीयता कानून को मीडिया के खिलाफ इस्तेमाल करने की हर कोशिश को भी निंदनीय करार दिया. गिल्ड ने कहा कि सरकारी गोपनीयता कानून को मीडिया के खिलाफ इस्तेमाल करने की हर कोशिश उतनी ही निंदनीय है, जितना निंदनीय पत्रकारों से उनके सूत्रों का खुलासा करने के लिए कहना है. उसने इस मामले में मीडिया के प्रति उत्पन्न ‘खतरे' की भी निंदा की और सरकार से अपील की कि वह ऐसा कोई भी कदम उठाने से बचे जिससे मीडिया की स्वतंत्रता कमजोर हो. बयान में कहा गया, ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया उच्चतम न्यायालय के सामने की गई अटॉर्नी जनरल की उन टिप्पणियों की स्पष्ट निंदा करता है जो उन्होंने उन दस्तावेजों के संबंध में की थीं जिनके आधार पर ‘द हिंदू' समेत मीडिया ने रफाल

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किसी की खिल्ली उड़ाकर नरेंद्र मोदी असली मुद्दों पर पर्दा नहीं डाल सकते- सिद्धार्थ भाटिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परोक्ष रूप से राहुल गांधी की खिल्ली उड़ाने की कोशिश में साफतौर पर डिस्लेक्सिया के शिकार छात्रों का ही मजाक उड़ा डाला. इसको लेकर लोगों का गुस्सा समझ में आने लायक है. सबसे खराब बात यह है कि उन्होंने यह अफसोसजनक टिप्पणी एक स्किल इंडिया प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचे प्रतिभागियों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस सत्र के दौरान की, जब एक छात्रा अपने एक प्रोजेक्ट के बारे में बता रही थी, जो डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चों की मदद कर सकता है. राहुल गांधी पर हमला करने का कोई भी मौका न गंवाने वाले मोदी ने अवसर भांपते हुए खिल्ली उड़ाने के लहजे में पूछा कि क्या इससे 40-50 साल की उम्र के विद्यार्थियों को भी मदद मिलेगी. जब उस छात्रा ने ‘हां' में जवाब दिया, तब उन्होंने कहा, ‘अगर ऐसा है तो यह ऐसे बच्चों की मांओं के लिए खुशखबरी है.' इस पर श्रोता ठहाके लगाने लगे. डिस्लेक्सिया

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2016 के बाद इस साल फरवरी में सबसे अधिक रही बेरोज़गारी दर: रिपोर्ट

नई दिल्ली: पिछले ढाई साल की तुलना में इस साल फरवरी में भारत में बेरोजगारी दर अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. भारतीय अर्थव्यवस्था निगरानी केंद्र (सीएमआईई) द्वारा मंगलवार को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2019 में भारत में बेरोजगारी दर बढ़कर 7.2 प्रतिशत हो गई, जो कि सितंबर 2016 के बाद सबसे अधिक है. यह आंकड़ा पिछले साल फरवरी में 5.9 प्रतिशत था. रॉयटर्स के अनुसार, मुंबई स्थित सीएमआईई के प्रमुख महेश व्यास ने श्रम बल की भागीदारी दर में अनुमानित गिरावट का हवाला देते हुए कहा, नौकरी मांगने वाले लोगों की संख्या में कमी के बावजूद बेरोजगारी की दर बढ़ गई है पिछले साल देश में जहां 40.6 करोड़ लोगों के पास रोजगार था वहीं इस साल फरवरी में यह संख्या अनुमानित तौर पर 40 करोड़ हो गई. द वायर हिन्दी पर प्रकाशित इस कथा को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 

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