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मेट्रो निर्माण के दौरान 1998 से अब तक सौ लोगों की जान गई

सरकार ने गुरुवार को बताया कि दिल्ली मेट्रो की शुरुआत से लेकर इसके निर्माण स्थलों पर अब तक करीब सौ लोगों की जान जा चुकी है। मारे गए लोगों में एक इंजीनियर और 93 मजदूर थे। दक्षिण दिल्ली के जमरूदपुर में इस महीने की शुरूआत में निर्माणाधीन पुल के साइट पर हुए हादसे में अब तक सात लोगों की जान जा चुकी है।शहरी विकास मंत्री जयपाल रेड्डी ने राज्यसभा को बताया कि अक्टूबर 1998 में निर्माण शुरू होने के बाद से दिल्ली मेट्रो के स्थलों पर अब तक हुए हादसों में 102 लोगों की जान जा चुकी है। मरने वालों में 12 जुलाई को मारे गए एक इंजीनियर समेत 93 मजदूर और आठ दूसरे लोगो शामिल हैं। रेड्डी ने यह भी बताया कि निर्माण स्थलों पर हादसों में मारे गए लोगों के आश्रितों को नौकरी देने के बाबत दिल्ली मेट्रो की कोई नीति नहीं है। रेड्डी ने यह भी बताया

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चीन और अमेरिका में मांग बढ़ने से कॉपर 8फीसदी महंगा

वैश्विक आर्थिक संकट खत्म होने के संकेतों से चीन, अमेरिका, जर्मनी सहित भारत में कॉपर की औद्योगिक मांग बढ़ने से लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) में इसकी कीमतों में आठ फीसदी तक की वृद्धि हुई है। जानकारों के अनुसार यूरो के मुकाबले डॉलर के कमजोर पड़ने के कारण भी एलएमई में कॉपर की कीमतों में तेजी को बल मिला है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दाम बढ़ने के कारण घरेलू बाजार में भी इसके भाव बढ़े हैं। एलएमई में पिछले एक माह के दौरान कॉपर तीन माह अनुबंध के दाम 5,970 डॉलर से बढ़कर 6,432 डॉलर प्रति टन हो गए हैं। वहीं घरेलू हाजिर बाजार में इस दौरान कॉपर के भाव 290 रुपये से बढ़कर 317 रुपये प्रति किलो पहुंच गए हैं। जबकि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में कॉपर नवंबर वायदा के भाव 319.65 रुपये प्रति किलो चल रहे है। पिछले माह की 9 तारीख को इसके दाम 295.05 रुपये प्रति किलो थे। कॉपर

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150 सालों में भारत से रूठ जाएगा मानसून!

गर्मी के दौरान देश भर में बारिश का दौर लाने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले 150 वर्षों में अपना अस्तित्व खो सकता है। पुणे स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटियोरोलॉजी द्वारा किए गए नए अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि पृथ्वी के तापमान में आ रही गर्मी के कारण अरब सागर के तापमान में वृद्धि हो रही है। इस तापमान वृद्धि के कारण भूमि और सागर के बीच के तापमान के अंतर टीजी में कमी आ रही है, जो बारिश को आकर्षित करने के लिए उत्तरदायी है। संस्थान के वैज्ञानिक और मुख्य शोधकर्ता एसएम बाविस्कर ने कहा कि जलवायु विज्ञान के तहत 30 सालों के अंतर को देखा जा सकता है। टीजी में कमी आना बहुत अहम है और अगले लगभग 150 सालों में यह शून्य हो सकता है। बाविस्कर ने कहा कि टीजी के एक बार शून्य होने पर मानसूनी हवाओं की जगह शुष्क हवाएं ले लेंगी, जिससे दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रवाह

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बारिश से सोयाबीन की फसल को फायदा, भाव गिरे

हाल में हुई जोरदार बारिश ने अन्य फसलों सहित सोयाबीन को काफी फायदा पहुंचाया है। जिससे मध्य प्रदेश में सोयाबीन का उत्पादन बढ़ने के आसार हैं। इसका सीधा असर सोया तेल और सोयाबीन के दामों में देखने को मिल रहा है। सोया तेल के दाम पिछले दो हफ्तों में दस फीसदी तक गिर गए हैं। पहले बारिश की कमी से फसल को नुकसान होने का अंदेशा था। अगस्त के मध्य में सोया तेल के दाम भ्भ्क् रुपये प्रति दस किलो के स्तर पर थे जो अब घटकर भ्1क् रुपये प्रति दस किलो तक आ गए हैं। हालांकि विदेशी बाजार में आई तेजी का थोड़ा असर दिखाई दे रहा है। इसी अवधि में सोयाबीन के दाम भी फ्ख्क्क् रुपये से कम होकर ख्9म्क् रुपये प्रति क्विंटल हो गए है। तेलों में आई तेजी से इसमें भी कुछ सुधार हुआ है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन के प्रवक्ता राजेश अग्रवाल ने बिजनेस भास्कर को

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सूखा राहत नहीं, कैश स्कीम शुरू करें केंद्र सरकार

दो बार लगातार सूखा पड़ने और उसमें हजारों लोगों की जान जाने के बाद मैंने साल 1965 में पत्रकारिता में प्रवेश किया। सूखे की स्थिति उस समय इतनी भयावह थी कि भारत को अमेरिका के सामने मदद के लिए हाथ फैलाना पड़ा। अंतरराष्ट्रीय खाद्य मदद में उस समय भारत की भागीदारी इतनी अधिक थी कि उस समय सबसे अधिक बिकने वाली एक किताब में दावा किया गया कि भारत को मदद लेना लाभकारी नहीं है और उसे भूखे मरने के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए। आज और तब की हालत में कितना अंतर है। इस साल भी देश पर सूखे का प्रभाव है, लेकिन खाद्यान्न को लेकर कोई हायतौबा नहीं मच रही है, न ही किसी के सामने हाथ फैलाने की दरकार है। भारत इससे पहले साल 2002 में भी सूखे का सामना कर चुका है, इसलिए देश के लोगों को उम्मीद है कि सरकार इस स्थिति से निपटने के

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