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अच्छी बारिश से बढ़ सकता है चीनी उत्पादन

केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा है कि देरी से आए मानसूनी बारिश के दौर से देश में गन्ने की फसल को फायदा होने की संभावना है। इससे चीनी उत्पादन पिछले अनुमान से 10 फीसदी बढ़ सकता है। एक अक्टूबर से शुरू होने वाले विपणन वर्ष में सरकार ने 160 से 170 लाख टन चीनी उत्पादन होने का अनुमान पहले लगाया था। उत्पादन में बढ़ोतरी से चीनी आयात की जरूरत थोड़ी कम होगी। मालूम हो कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा चीनी उपभोक्ता है और देश में चीनी की सालाना मांग करीब 220 से 230 लाख टन रहती है। वर्ष 2009 में उत्पादन घटकर 150 लाख टन रह जाने के कारण इस वर्ष बड़ी मात्रा में चीनी आयात करनी पड़ रही है। सितंबर 2008 में समाप्त हुए वाले विपणन वर्ष में चीनी का 263 लाख टन हुआ था। पवार ने एक साक्षात्कार में बताया कि बारिश अच्छी होने से

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रियायती दालों की राशन पर बिक्री फरवरी तक!

केंद्र सरकार राशन की दुकानों के जरिये रियायती दालों की बिक्री छह महीने और जारी रखने पर विचार कर रही है। सरकार अगले साल फरवरी तक दालों की राशन की दुकानों से बिक्री जारी रख सकती है। हालांकि राज्य दालें उठाने में उदासीन बने हुए हैं। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि मूल्यों में बढ़ोतरी पर अंकुश लगाने के लिए स्कीम को छह महीने और लागू रखने पर विचार हो रहा है। पिछले साल अक्टूबर में सरकार ने दस रुपये प्रति किलो रियायत पर दाल सुलभ कराने की योजना बनाई थी। http://www.businessbhaskar.com/article.php?id=21367 सरकार ने इस योजना में चार लाख टन दालों की सप्लाई की योजना बनाई थी। यह स्कीम पहले छह महीने के लिए लागू की गई थी। इसके बाद इसकी अवधि छह माह और बढ़ाकर 30 सितंबर तक लागू रखने का फैसला किया गया। इस समय खुले बाजार में अरहर की दाल महंगी होकर 85 रुपये प्रति किलो तक पहुंच

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भूख का बढ़ता भूगोल

भारत में जब से आर्थिक उदारीकरण आया है, एक अद्भुत विरोधाभास उदारवादियों में देखने को मिला है। जहां भारत में कई जगह अभ्युदय हो रहा है। वहीं हालात 20 साल से ज्यादा खराब होते गए हैं। खासकर लोगों की खुराक कम हुई है। सिर्फ जिंदा रहने के लिए लोग इस देश में भोजन ग्रहण कर रहे हैं और इसका मूल कारण जनसंख्या का बढ़ना नहीं है, जैसा कि अनुमान लगाया जाता रहा है। भारत में १९५क्-५५ में 152 किलो खाद्यान्न प्रति व्यक्ति उपलब्ध था। जो 1989-92 में १७७ किलो प्रति व्यक्ति हो गया, लेकिन तब से घटकर वर्तमान में यह घटकर 155 किलो प्रति व्यक्ति रह गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति कैलोरी ग्रहण करने की प्रतिदिन की औसत दर जो १९७२-७३ में २२६६ किलो कैलोरी थी, घटकर १९९९-२क्क्क् में 2149 किलो कैलोरी रह गई है। लगभग तीन चौथाई लोग २४क्क् किलो कैलोरी से भी कम उपभोग कर पा रहे

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कपास का निर्यात नए सीजन में बढ़ेगा

नए सीजन में घरेलू बाजार भाव विदेशी मूल्य से कम रहे तो कॉटन का निर्यात इस साल के मुकाबले काफी बेहतर रह सकता है। वर्ष 2009-10 में भारत से कॉटन का निर्यात दोगुना होकर 65 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलो) तक पहुंचने की उम्मीद है। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) के उपाध्यक्ष नयन सी. मीरानी के अनुसार वर्ष 2008-09 में घरेलू बाजार में भाव तेज होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम होने के कारण मात्र 32 लाख गांठ का ही निर्यात हुआ। नए सीजन में कॉटन की पैदावार में भी करीब 6.8 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल उत्पादन 312.25 लाख गांठ रहने की संभावना है। उत्तर भारत और गुजरात में कॉटन की नई फसल की आवक शुरू हो चुकी है तथा मिलों की मांग कमजोर होने के कारण पिछले एक महीने में कॉटन की कीमतों में करीब 1,000 से 1,200 रुपये प्रति कैंडी (प्रति कैंडी 356 किलो) की गिरावट

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एक साल में चावल 13% और गेहूं 4% महंगा

नई दिल्ली : पिछले एक साल के दौरान कमोडिटीज की कीमतों में जिस तरह बढ़ोतरी दर्ज की गई है उससे आने वाले वक्त में गरीबों के लिए जरूरी वस्तुओं को मुहैया कराने के लिए सरकार को इन वस्तुओं का वितरण तंत्र बेहतर बनाने की जरूरत होगी। एसोचैम ईको पल्स स्टडी में कहा गया है कि मांग और आपूर्ति में मौजूद अंतर की वजह से पिछले साल अगस्त से इस साल अगस्त के बीच चावल की थोक कीमतें 13.15 फीसदी और गेहूं की थोक कीमतें 4.71 फीसदी ऊपर चढ़ी हैं, ऐसे में आम आदमी को इन वस्तुओं को मुहैया कराने के लिए सरकार को वितरण प्रणाली को मजबूत बनाना होगा नहीं तो मौजूदा सूखे की स्थिति में जरूरी चीजों की कीमतों में और उछाल आ सकता है। 'भारत में गेहूं और चावल की थोक कीमतों की तुलना' शीर्षक से कराई गई एसोचैम ईको पल्स स्टडी में कहा गया है कि अगस्त 2008

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