उत्तर प्रदेश: दो साल में शिक्षामित्रों के आधे पद भी नहीं भरे गए

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published Published on Aug 13, 2019   modified Modified on Aug 13, 2019
उत्तर प्रदेश परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक पद पर समायोजित 1.37 लाख शिक्षामित्रों का समायोजन 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट से निरस्त होने के दो साल बाद तक सरकार इनमें से आधे पद नहीं भर सकी है। इसका सबसे अधिक नुकसान स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई पर पड़ रहा है।
 

सुप्रीम कोर्ट से समायोजन निरस्त होने के बाद रिक्त हुए पदों पर सरकार को दो चरणों में नियुक्ति करना था। पहले चरण में 68500 शिक्षक भर्ती के लिए लिखित परीक्षा मई 2018 में हुई। इसमें 5 सितंबर 2018 को नियुक्ति पत्र बांट दिए गए थे। लेकिन गैर राज्य से प्रशिक्षण लेने वाले व पांच साल निवास की शर्त पूरा नहीं करने वाले अभ्यर्थियों को भी अवसर देने के हाईकोर्ट के आदेश के बाद बेसिक शिक्षा परिषद इन अभ्यर्थियों से नये सिरे से आवेदन लेने की तैयारी कर रहा है। यानी 68500 शिक्षक भर्ती अभी पूरी नहीं हो सकी है। जबकि 69000 शिक्षक भर्ती के लिए 6 जनवरी को परीक्षा हुई पर कटऑफ विवाद के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।

 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से 1171 शिक्षामित्र निराश

बतौर शिक्षक समायोजन रद किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर क्यूरेटिव याचिका के भी खारिज होने से शिक्षामित्र निराश हैं। उन्हें शिक्षक बनने की अंतिम उम्मीद खत्म हो गई लगती है। शिक्षामित्रों के संगठन सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अध्ययन करने में जुटे हैं। जिले में 1171 शिक्षामित्रों का समायोजन हुआ था.

हिन्दुस्तान दैनिक में प्रकाशित इस कथा को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 


 

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