किसी की खिल्ली उड़ाकर नरेंद्र मोदी असली मुद्दों पर पर्दा नहीं डाल सकते- सिद्धार्थ भाटिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परोक्ष रूप से राहुल गांधी की खिल्ली उड़ाने की कोशिश में साफतौर पर डिस्लेक्सिया के शिकार छात्रों का ही मजाक उड़ा डाला. इसको लेकर लोगों का गुस्सा समझ में आने लायक है.

सबसे खराब बात यह है कि उन्होंने यह अफसोसजनक टिप्पणी एक स्किल इंडिया प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचे प्रतिभागियों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस सत्र के दौरान की, जब एक छात्रा अपने एक प्रोजेक्ट के बारे में बता रही थी, जो डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चों की मदद कर सकता है.

राहुल गांधी पर हमला करने का कोई भी मौका न गंवाने वाले मोदी ने अवसर भांपते हुए खिल्ली उड़ाने के लहजे में पूछा कि क्या इससे 40-50 साल की उम्र के विद्यार्थियों को भी मदद मिलेगी. जब उस छात्रा ने ‘हां' में जवाब दिया, तब उन्होंने कहा, ‘अगर ऐसा है तो यह ऐसे बच्चों की मांओं के लिए खुशखबरी है.' इस पर श्रोता ठहाके लगाने लगे.

डिस्लेक्सिया या कोई भी अक्षमता हंसने की बात नहीं है. भारत में अक्षम व्यक्तियों पर हंसना आम बात है. आम चलन में कोई भी व्यक्ति जो प्रकट तौर पर अक्षम हो, भद्दी ठिठोलियों का निशाना हुआ करते थे.

लेकिन हाल के वर्षों में लोगों को संवेदनशील बनाने की कोशिशों ने इस स्थिति में बदलाव लाना शुरू किया है. निश्चित तौर पर ऊंचे सार्वजनिक पद पर बैठे लोग किसी अक्षम का मजाक नहीं ही उड़ाएंगे- उनसे तो मिसाल कायम करने की उम्मीद की जाती है.

द वायर हिन्दी पर प्रकाशित इस कथा को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें


http://thewirehindi.com/73935/narendra-modi-mockery-bjp-congress-2019-general-elections/

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