तमिलनाडुः कई स्कूलों में बच्चों को जातिसूचक रिस्टबैंड पहनाने का आरोप, जांच के आदेश

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published Published on Aug 14, 2019   modified Modified on Aug 14, 2019
चेन्नईः तमिलनाडु के कई स्कूलों में जाति के आधार पर बच्चों को रिस्टबैंड (हाथ में पहनने वाला बैंड) पहनाने के मामले पर स्कूल शिक्षा निदेशक ने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इस तरह के स्कूलों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करें.


द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 बैच के कुछ प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों की शिकायत पर इस संबंध में जारी सर्कुलर में स्कूली शिक्षा के निदेशक ने कहा, ‘सभी मुख्य शैक्षणिक अधिकारियों से आग्रह किया जाता है कि वे जिले में इस तरह के स्कूलों की पहचान कर उचित कदम उठाएं, जहां बच्चों की जाति को लेकर इस तरह का भेदभाव किया जाता है. इसके साथ ही स्कूल के हेडमास्टर को उचित निर्देश दिए जाएं और तत्काल इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाएं. इसके साथ ही इस भेदभाव के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई की जाए.' 


इसके साथ ही इस मामले में उठाए गए कदमों पर एक रिपोर्ट भी भेजने के निर्देश दिए गए हैं. 2018 बैच के आईएएस अधिकारियों का कहना था कि तमिलनाडु के कुछ स्कूलों में बच्चों को उनकी जाति के आधार पर अलग-अलग रंगों के रिस्टबैंड बांधने पर मजबूर किया जाता है.


बच्चों की जाति दर्शाने के लिए लाल, पीले, हरे और केसरिया कई रंगों में रिस्टबैंड हैं, जिससे पता लगाया जाता है कि ये बच्चे कथित निचली या उच्च जाति के हैं. इसके अलावा जाति दर्शाने के लिए बच्चों को अंगूठियां पहनाई जा रही हैं और माथे पर तिलक लगवाया जा रहा है.

द वायर हिन्दी पर प्रकाशित इस कथा को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 




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