पहले भी हो चुका है गरीब सवर्णों के लिए आरक्षण का प्रयास, लेकिन विफल रहा

स्वतंत्रता के बाद संविधान निर्माताओं ने अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए शिक्षा व सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था की। साथ ही शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को भी आरक्षण का लाभ दिया गया। संविधान में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए ही आरक्षण का प्रावधान है। आर्थिक आधार पर आरक्षण के प्रयास पहले भी किए गए, लेकिन वे विफल होते रहे हैं। जानिए-

पहले विफल रहे हैं प्रयास

-1991 में मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू होने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव ने गरीब सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया था।
-1992 में उच्चतम न्यायालय ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए खारिज कर दिया।

-2003 में भाजपा ने एक मंत्री समूह का गठन किया। हालांकि, इसका फायदा नहीं हुआ और वाजपेयी सरकार 2004 का चुनाव हार गई।

-2006 में कांग्रेस ने भी एक समिति बनाई, जिसे आर्थिक रूप से पिछड़े उन वर्गों का अध्ययन करना था जो मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के दायरे में नहीं आते। लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ।

इस कथा को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 


https://www.livehindustan.com/national/story-efforts-has-been-made-for-upper-caste-reservation-before-but-failed-know-all-about-2350660.html

Related Articles

 

Write Comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Video Archives

Archives

share on Facebook
Twitter
RSS
Feedback
Read Later