‘आरटीआई संशोधन बिल मूलभूत अधिकारों के लिए खतरा’

नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी सरकार 2.0 सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून में बदलाव कर रही है. सरकार के इस कदम का विपक्ष, आरटीआई कार्यकर्ताओं और पूर्व केन्द्रीय सूचना आयुक्तों ने विरोध किया है. उनका आरोप है कि इस विधेयक में सूचना आयोगों का प्राधिकार कम करने का प्रयास किया गया है और सरकार इस संशोधन के माध्यम से आरटीआई कानून को पूरी तरह से कमजोर करना चाहती है. उनका मानना है कि सरकार द्वारा सूचना का अधिकार कानून में प्रस्तावित संशोधनों से इस पारदर्शिता पैनल की स्वायत्तता से समझौता होगा, क्योंकि यह उसे कार्यपालिका का अधीनस्थ बना देगा.


आपको बता दें कि विपक्षी पार्टियों के कड़े विरोध के बावजूद आरटीआई संशोधन बिल लोकसभा में पारित हो चुका है और अब राज्यसभा में विचाराधीन है.


नई दिल्ली के वीमेन प्रेस क्लब में केंद्रीय सूचना आयोग के पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला, दीपक संधू एवं पूर्व सूचना आयुक्त शैलेश गांधी, श्रीधर आचार्यालु, एमएम अंसारी, यशोवर्धन आज़ाद एवं अन्नपूर्णा दीक्षित ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए आरटीआई संशोधन बिल का सामूहिक विरोध किया.

 

 उन्नति शर्मा द्वारा लिखित एवं द प्रिन्ट हिन्दी पर प्रकाशित इस आलेख को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 


https://hindi.theprint.in/india/proposed-changes-in-rti-amendment-bill-threat-on-fundamental-rights-says-former-cic/76219/

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