‘हेल्लो बॉस! आई हैव राइट टू डिस्कनेक्ट’- लोकसभा में पेश हुआ बिल

प्रज्ञा रोज सुबह 8 बजे ऑफिस पहुंच जाती हैं. बारह घंटे काम करने के बाद जब वह रात 9 बजे अपने घर पहुंच रही होती हैं, इतने में उनके बॉस मनीष का फोन आता है.

‘तुमसे कितनी बार कहा है कि काम खत्म करने के बाद वर्क-शीट उसी दिन भेज दिया करो.'

‘सॉरी सर, मैं सुबह आते ही कर दूंगी.'

‘नहीं. मुझे अभी चाहिए. एक घंटे के भीतर. मेल मी राइट नॉउ. मैं इंतजार कर रहा हूं.'

थकी हारी घर पहुंची प्रज्ञा वापस ऑफिस के काम पर लग जाती हैं. एक घंटे में बेमन तरीके से काम पूरा कर, बॉस को मेल कर देती हैं. रात में 12 बजे उन्हें ऑफिस से एक मेल आता है, लेकिन तब तक वे गहरी नींद में होती हैं. जिसके कारण वे उस ‘जरूरी' मेल का जवाब नहीं दे पातीं. अगले दिन सुबह 8 बजे जब वह ऑफिस पहुंचती हैं तो उन्हें उस मेल का जवाब नहीं देने के कारण उनके बॉस द्वारा जमकर खरी-खोटी सुनाई जाती है.

प्रज्ञा के साथ इस तरह की घटना अब अकसर ही होती है. अभी उन्हें नौकरी करते हुए 6 महीना भी नहीं हुए हैं. लेकिन वे तनाव से गुजर रही हैं. ये कहानी केवल एक लड़की या किसी एक इंसान की नहीं है, बल्कि भारत में ज्यादातर नौकरीपेशा लोगों को इस समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है.

ऐसे में इस समस्या से निजात दिलाने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की सांसद सुप्रिया सुले लोकसभा में एक बिल लेकर आई हैं.

द प्रिन्ट हिन्दी पर प्रकाशित इस कथा को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 


https://hindi.theprint.in/india/private-member-bill-supriya-sule-avoid-phone-call-after-office-hours/40284/

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