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नयी दिल्ली, छह जनवरी (एजेंसी) बीता साल
स्वास्थ्य क्षेत्र के लिहाज से नवजात मृत्यु दर में गिरावट, देश में
सर्वाधिक लंबे समय तक पोलियो का कोई नया मामला नहीं आने और 90 साल में
जनसंख्या में एक दशक में सबसे कम वृद्धि जैसी खबरों का रहा।
नवजात मृत्युदर गत वर्ष घटकर 47 प्रति एक हजार जन्म रह गयी जो कि
वर्ष 2009 में 50 व 2007 में 58 थी। पिछले कुछ महीनों में देश में पोलियो
का एक मात्र मामला पश्चिम बंगाल के हावड़ा से सामने आया। मामलों में कमी आने
से देश को पोलियो मुक्त का दर्जा मिलने की संभावनाएं बलवती हो गयीं। इससे
पहले वर्ष 2010 में बाइवैलेंट ओरल पोलियो टीके को जारी किया गया था। विश्व
स्वास्थ्य संगठन ने भी पोलियो उन्मूलन की दिशा में भारत के प्रयासों की
सराहना की।
सरकार ने माताओं एवं शिशुओं का रिकार्ड रखने की अनोखी
प्रणाली की भी शुरूआत की। गर्भवती महिलाओं के लिए जननी शिशु सुरक्षा
कार्यक्रम शुरू किया गया।
हालांकि इन प्रयासों के बीच भी स्वास्थ्य
मंत्रालय पश्चिम बंगाल के अस्पतालों में बच्चों की मौत और उत्तर प्रदेश में
जापानी दिमागी बुखार से 500 से अधिक बच्चों की मौत से सकते में आ गया।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 12वीं पंचवर्षीय योजना को स्वास्थ्य संबंधी योजना के तौर पर घोषित किया और इस क्षेत्र के लिए बजट आवंटन बढ़ाने का वादा किया।
सरकार ने अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में
मानव संसाधन में बढ़ोतरी के भी प्रयास किये। एमसीआई ने 21 नये मेडिकल
कॉलेजों की स्थापना को मंजूरी दी।
हालांकि 2012 से भारत भर में एमबीबीएस
के सभी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए समान प्रवेश परीक्षा कराने के
एमसीआई के अहम प्रस्ताव पर अमल नहीं हुआ और सरकार ने उच्चतम न्यायालय को
बताया कि राज्य सरकारों ने इस तरह की परीक्षा को कराने में असमर्थता जताई
है और परीक्षा नहीं कराई जा सकती।
पिछले साल ही संसद में बहुप्रतीक्षित
‘स्वास्थ्य में मानव संसाधन के लिए राष्ट्रीय परिषद विधेयक’ पेश किया गया
जो चिकित्सा शिक्षा को नियमित करेगा।
मानव अंग प्रतिरोपण संशोधन विधेयक
पारित किया गया जिसमें अंगदान की परिभाषा का विस्तार करते हुए इसमें अंग
लेने वाले के दादा..दादी या नाना..नानी को शामिल किया गया।
सरकार ने
क्लीनिकल ट्रायल के लिए भी दिशानिर्देशों में बदलाव किया लेकिन विशेषज्ञों
का मानना है कि इस क्षेत्र को नियमित करने के लिए कानून की जरूरत है।
स्वास्थ्य
मंत्री गुलाम नबी आजाद की दिल्ली में राष्ट्रीय एचआईवी सम्मेलन में की गयी
यह टिप्पणी विवाद में घिर गयी कि पुरुषों के बीच यौन संबंध ‘अप्राकृतिक’
हैं और यह एक ‘बीमारी’ है। भारत यात्रा पर आये यूएनएड्स के प्रमुख माइकल
सिडिबे ने इस बयान से दूरी बनाते हुए पुरुषों के आपसी संबधों के समर्थन में
बयान जारी किया।
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