पंचायतीराज

जब बालू की रॉयल्टी से सुधरी पंचायतों की सूरत

बालू खनन के जरिये पंचायतों को रायल्टी देने का प्रावधान पहले भी था. खनिज विभाग की नियमावली के तहत बालू घाटों का प्रबंधन पंचायतों के जरिये करवाने की व्यवस्था थी. मगर व्यावहारिक तौर पर इस प्रावधान का इस्तेमाल कम ही हो पाता था. उसी दौर में धनबाद के दस पंचायतों में ऐसा ही एक प्रयोग हुआ जिसमें पंचायतों के जरिये बालू घाटों का प्रबंधन किया गया और इस काम की वजह से पंचायतों को जो रॉयल्टी मिली उससे पंचायतों ने अपने इलाके में कई मनोनुकूल काम कराये. इस प्रयोग में धनबाद के जिला प्रशासन और खास तौर पर तत्कालीन जिला पंचायतराज पदाधिकारी एनके लाल की महती भूमिका रही. यह इलाके में नजीर के रूप में देखा जाता है.  फिलहाल मधुपुर में पदस्थापित एनके लाल कहते हैं कि हमने इसमें कुछ विशेष नहीं किया है. बस जो सरकारी प्रावधान हैं उसी का ठीक से पालन किया है. वे बताते हैं कि उन्हें इस

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सूपेड़ी और लूंधीया बने पानीदार गांव

गुजरात के सुप्रसिद्ध लोक साहित्यकार स्वर्गीय झवेरचंद मेघाणी ने आजादी के कुछ ही वर्ष पूर्व सौराष्ट्र की लोक कथाओं में अनेक नदियों में आई बाढ़ का उल्लेख किया है. आज वही सौराष्ट्र पिछले कुछ समय से अकाल ग्रस्त और सूखा ग्रस्त क्षेत्र घोषित होने लगा है. आजादी के 50 वर्ष में ही गुजरात की छोटी-बड़ी सभी नदियां सूख गईं और कृषि प्रधान गुजरात अब सूखाग्रस्त गुजरात हो गया. कभी सागर के नाम से प्रसिद्ध माही(सागर) नदी आज सूखकर नाला हो  गयी. पिछले दस वर्षों में गुजरात में पानी का संकट इतना बढ़ गया था कि लोगों को एक घड़ा पानी लेने के लिए भी एक गांव से दूसरे गांव भटकना पड़ता था. डेढ़-दो किलोमीटर दूर से साईकिल पर या टैंकर से पानी लाना पड़ता था. कुएं का पानी भी 700-800 फुट अंदर चला गया और काफी प्रदूषित भी हो चुका था, परंतु इस प्रदूषित पानी के लिए भी लोग मरने-मारने पर उतर आते थे. लेकिन

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ये मुखिया मैडम भी हैं और सहिया दीदी भी

पूर्वी सिंहभूम के पोटका पंचायत की मुखिया पानो सरदार रोज सुबह सवेरे अपनी साइकिल पर सवार होकर निकल जाती हैं और अपने गांव के घर-घर जाकर लोगों को स्वास्थ्य से जुड़े मसलों पर जागरूक करती हैं और अगर कोई व्यक्ति रोग से पीड़ित नजर आया तो उसे अस्पताल ले जाकर उसका इलाज भी करवाती हैं. उनकी इस यात्र के दौरान गांव के लोग उनसे मिलकर पंचायत से जुड़ी समस्याओं का निराकरण भी उनसे करवा लेते हैं. दरअसल पानो सरदार मुखिया होने के साथ-साथ सहिया भी हैं और गांव के लोग मानते हैं कि वे दोनों जिम्मेदारियां ठीक तरीके से निभा रही हैं. सहिया के तौर पर अनुकरणीय है उनका काम काज पानो सरदार आज भले ही मुखिया है मगर सहिया के तौर पर उनके काम-काज की इलाके भर में मिसाल दी जाती है. प्रसव के मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और गंभीर मरीज होने की स्थिति में एमजीएम लेकर जाने में भी वह जरा भी नहीं

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सरपंच बन साकार किया विकास का सपना

अनीता बैरवा राजस्थान के जयपुर जिले के चाकसू ब्लॉक की शिवदासपुरा पंचायत की सरपंच हैं. कुछ वर्ष पहले तक वे आंगनबाड़ी में सहयोगिनी के रूप में काम करती थीं और अपना ब्यूटी पार्लर भी चलाती थीं. अब वर्ष 2010 से अपनी नयी भूमिका में वे महिलाओं का रूप रंग निखारने के बजाय अपनी पंचायत का स्वरूप सुधारने पर अधिक ध्यान दे रही हैं. भरपूर आत्मविश्‍वास की धनी 33 वर्षीया अनीता एक संवेदनशील व्यक्तित्व हैं और अत्यंत कुशलता से अपने क्षेत्र में विकास कार्यों को अंजाम दे रही हैं. आभा शर्मा की विस्तृत रिपोर्ट पढ़ने के लिए क्लिक करें

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