पानी और साफ-सफाई

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ऱाष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण द्वारा प्रस्तुत हाऊसिंग कंडीशन एंड एमेनिटीज इन इंडिया, 2008-09 नामक दस्तावेज के अनुसार, http://mospi.nic.in/Mospi_New/upload/press_note_535_15nov10.pdf: 

 

  • इस राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण के लिए मौका मुआयना का काम जुलाई 2008 से जून 2009 के बीच हुआ। इस रिपोर्ट को 1,53,518 घरों के मौका मुआयने के बाद तैयार किया गया है। इसमें 97,144 घर ग्रामीण इलाकों के और 56,374 शहरी इलाकों के हैं।

 

पेयजल की सुविधा

 

ग्रामीण इलाके में पेयजल के लिए सर्वाधिक इस्तेमाल ट्यूबवेल और हैंडपंप का होता है। तकरीबन 50 फीसद घर अपने पेयजल के लिए इसी साधन का उपयोग करते हैं। 30 फीसद घरों में टैप की व्यवस्था है।

शङरी इलाके में टैप पेयजल की सुविधा के लिए सर्वाधिक इस्तेमाल में लाया जाना वाला साधन है(तकरीबन 74 फीसदी घरों में) ट्यूबवेल और हैंडपंप का इस्तेमाल पेयजल के लिए शहरी इलाकों में महज 18 फीसदी घरों में होता है।

 

पेयजल के तीन साधन यानी टैप, ट्यूबवेल-हैंडपंप और कुआं को एक साथ मिलाकर देखें तो ग्रामीण इलाके में 97 घरों में इन्हीं से पेयजल की आवश्यकता की पूर्ति होती है जबकि शहरी इलाके में  95 घरों में।.

 

तकरीबन 86 फीसदी ग्रामीण घर 91 फीसदी शहरी घरों में उपरोक्त तीन स्रोतों में से एक से पूरे साल भर पेयजल की आपूर्ति होती है।

 

पेयजल की आपूर्ति में कमी मार्च के महीने से शुरु होती है और मई के महीने में पेयजल का अभाव सर्वाधिक होता है।इसके बाद , अगस्त के महीने से पेयजल की आपूर्ति में क्रमश सुधार होता है।

 

मई के महीने में 13 फीसदी ग्रामीण परिवार और 8 फीसदी शहरी परिवार पेयजल के अभाव से जूझते हैं यानी पर्याप्त पेयजल नहीं मिल पाता।

 

41 फीसद ग्रामीण परिवारों को पेयजल की सुविधा आवासीय परिसार में ही उपलब्ध है जबकि शहरों में 75 फीसदी घरों को।.

 

स्नानघर की सुविधा

 

64 फीसदी ग्रामीण घरों में स्नानघर की सुविधा नहीं है।शहरी इलाके में स्नानघर की सुविधा से वंचित घरों की तादाद 22 फीसदी है।

ग्रामीण इलाके में डिटैच्ड बाथरुम ज्यादा हैं(तकरीबन 23 फीसदी घरों में) जबकि 13 फीसदी घरों में अटैच्ड बाथरुम की सुविधा है।.

 

शहरी इलाके में ज्यादातर घरों(48 फीसदी) में अटैच्ड बाथरुम की सुविधा है, फिर भी शहरी इलाके में 31 फीसदी घरों में अटैच्ड बाथरुम नहीं है।.

 

साफ-सफाई की सुविधा

 

तकरीबन 65 फीसदी ग्रामीण घरों में लैट्रिन की फेसेलिटी नहीं है जबकि लैट्रिन की सुविधा से वंचित शहरी घरों की तादाद 11फीसदी है।

 

तकरीबन 14 फीसदी ग्रामीण  और 8 फीसदी शहरी घरों में संडास(पिट लैट्रिन) का इस्तेमाल होता है।

ग्रामीण इलाके में सेप्टिक टैंक / फ्लश लैट्रिन की सुविधा 18 फीसदी घरों में है जबकि शहरी घरों में यह आंकड़ा 77 फीसदी का है।

 

बिजली की सुविधा

 

अघिल भारतीय स्तर पर देखें तो तकरीबन 75 फीसदी परिवार में घरेलू इस्तेमाल के लिए बिजली की सुविधा हासिल कर पाये हैं। इस मामले में शहरी और ग्रामीण घरों के बीच अच्छा खास अन्तर नजर आता है। तकरीबन 66 फीसदी ग्रामीण घरों में बिजली की सुविधा है जबकि, शहरी इलाके में बिजली की सुविधा वाले घरों की तादाद 96 फीसदी है।

 

 

 

तकरीबन 18 फीसदी ग्रामीण घरों में तीनों बुनियादी सुविधायें( आवासीय परिसर में पेयजल, लैट्रिन और बिजली) उपलब्ध हैं जबकि शहरी इलाके में ऐसे घरों की तादाद 68 फीसदी है।

 

घरों के आसपास पर्यावरण परिवेश

 

ग्रामीण इलाके में तकरीबन 19 फीसदी और शहरी इलाके में लगभग 6 फीसदी घरों में कच्ची नाली-परनाली का इस्तेमाल होता है। ग्रामीण इलाके में 57 फीसदी और शहरी इलाके में 15 फीसदी घरों में किसी भी तरह की ड्रेनेज सुविधा मौजूद नहीं है।

 

गार्वेज डिस्पोजल व्यवस्था केवल 24 फीसदी ग्रामीण परिवारों को हासिल हो सकी है जबकि शहरों में ऐसे घरों की तादाद 79 फीसदी है।

 

गंवई इलाके में 18 फीसद और शहरी इलाके में 6 फीसदी घर ऐसे हैं जिनका निकास सीधे सड़क पर नहीं होता ।

 

 



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