पानी और साफ-सफाई

पानी और साफ-सफाई

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वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गनाइजेशन और यूनिसेफ द्वारा प्रस्तुत प्रोग्रेस ऑन सैनिटेशन एंड ड्रिंकिंग वाटर 2010 अपडेट नामक दस्तावेज के अनुसार, http://www.unicef.org/media/files/JMP-2010Final.pdf:

 

  • दक्षिण एशिया और उपसहारीय अफ्रीकी देशों में समुन्नत साफ-सफाई की सुविधा का इस्तेमाल कम होता है।.

 

  • विश्व में 2.6 बिलियन लोग समुन्नत साफ-सफाई की सुविधा से वंचित हैं। इनमें सर्वाधिक लोग दक्षिण एशिया के हैं। पूर्वी एशिया और उपसहारीय अफ्रीकी देशों में भी ऐसे लोगों की तादाद अच्छी-खासी है।

 

  • समुन्नत साफ-सफाई की सुविधा का इस्तेमाल विश्व में 61% लोग करते हैं।

 

  • अगर पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए तो 2015 तक साफ-सफाई की बुनियादी सुविधा से वंचित लोगों की तादाद को मौजूदा तादाद के आधा कर पाना असंभव होगा। अगर सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों को पूरा भी कर लिया जाय तब भी दुनिया में 1.7 बिलियन लोग साफ-सफाई की बुनियादी सुविधा से वंचित रह जायेंगे और 2015 तक ऐसी सुविधा से वंचित लोगों की संख्या 2.7 बिलियन तक पहुंच जायेगी।

 

  • पेयजल की सुविधा से वंचित लोगों की तादाद 2015 तक विश्व में 67 करोड़ 20 लाख होगी।

 

 

  • चीन में(आबादी- 1 अरब 30 करोड़), 89% फीसदी लोग समुन्नत स्रोतों से पेयजल हासिल करते हैं। साल 1990 में यह तादाद 67% थी ।भारत (आबादी- 1 अरब 20 करोड़) में , 88% लोग समुन्नत स्रोतों से पेयजल हासिल करते हैं। साल 1990 में यह तादाद 72% फीसदी थी। साल 190 से 2008 के बीच 1 अरब 80 करोड़ लोगों को पेयजल के समुन्नत स्रोत हासिल हुए। इसमें 47 फीसदी लोग सिर्फ भारत-चीन से हैं।

 

  • साल 1990 से 2008 के बीच चीन में साफ-सफाई के समुन्नत स्रोतों का इस्तेमाल करने वाले लोगों की तादाद 41 फीसदी से बढकर 55 फीसदी और भारत में यह तादाद 18 फीसदी से बढ़कर 33 फीसदी हो गई तो भी विश्व साफ-सफाई के मामले में अपने निर्धारित लक्ष्य को पूरा कर पाने में अभी काफी पीछे है। यह सच है कि सिर्फ भारत-चीन में ही बतायी गई अवधि में 47 करोड़ 50 लाख लोगों को साफ-सफाई की समुन्नत सुविधा हासिल हुई जो कि विश्व में साफ-सफाई की समुन्नत सुविधा(बतायी गई अवधि में) हासिल करने वाले कुल 1 अरब 30 करोड़ लोगों का 38 फीसदी है।

 

  • 1 अरब 30 करोड़ लोगों को साल 1990-2008 के बीच साफ-सफाई की समुन्नत सुविधा हासिल हुई उसमें 64% फीसदी लोग शहरी इलाकों में रहते हैं।.

 

  • विश्वस्तर पर देखें तो समुन्नत स्रोतों से पेयजल हासिल करने वाले लोगों की तादाद 87% है, जबकि विकासशील देशों में ऐसी सुविधा वाले लोगो की तादाद 84% है। विकासशील देशों के शहरी इलाके में 94% फीसदी लोग पेयजल के लिए समुन्नत स्रोतों का इस्तेमाल करते हैं तो ग्रामीण इलाके के 76% लोग ।

 

  • समुन्नत स्रोतों से पेयजल हासिल करने वाले लोगों की तादाद शहरी इलाके में ग्रामीण इलाके की अपेक्षा 5 गुनी ज्यादा है। जिल 1 अरब 80 करोड़ लोगों ने साल 1990 से 2008 के बीच पेयजल(समुन्नत स्रोत) की सुविधा हासिल की उसमें 59 फीसदी लोग शहरी इलाकों के हैं।

 

 

  • खुले में शौच करने वाले लोगों की तादाद साल 1990 में 25 फीसदी थी जो साल 2008 में घटकर 17% हो गई। उपसहारीय अफ्रीकी देशों में यह कमी 25 फीसदी की हुई लेकिन संख्या के लिहाज से देखें तो साल 1990 में 18 करोड़ 80 लाख लोग खुले में शौच करते थे जबकि साल 2008 में इनकी तादाद 22 करोड़ 40 लाख हो गई है। विश्व में जितने लोगखुले में शौच करते हैं उनकी कुल संख्या का 64 फीसदी दक्षिण एशिया रहता है।.

 

  • साल 1990 से  2008 के बीच 1.2 विलियन से ज्यादा लोगों को आवासीय परिसर में पाईप द्वारा पानी आपूर्ति की सुविधा हासिल हुई।

 

  • विश्व के विकासशील देशो में 73% शहरी आबादी को आवासीय परिसर में पाईप द्वारा पानी आपूर्ति की सुविधा हासिल है जबकि ग्रामीण इलाके में ऐसे लोगों की तादाद 31 फीसदी है।



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