कुपोषण

कुपोषण

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सेव द चिल्ड्रेन द्वारा प्रस्तुत अ लाईफ फ्री फ्राम हंगर- टैकलिंग चाईल्ड मालन्यट्रिशन(2012) नामक दस्तावेज के अनुसार-

http://www.savethechildren.org.uk/sites/default/files/docs
/A%20Life%20Free%20From%20Hunger%20UK%20low%20res.pdf

 

 

·         भारत में 48% फीसदी बच्चों की बढ़वार सामान्य से कम है। अगर यही सूरते हाल जारी रहे तो अगले 15 सालों में सामान्य से कम बढ़वार बाले बच्चों की तादाद 450 मिलियन हो जाएगी।

 

·         साक्ष्यों से पता चलता है कि बच्चों को कुपोषण से बचाया जाय तो वे एक व्यस्क के रुप में कहीं ज्यादा कार्यक्षमता के साथ उत्पादक कामों में लग सकते हैं और उनकी आय-अर्जन की क्षमता में 46 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है।भारत में कुपोषण जनित अनुत्पादकता के कारण सालाना अनुमानतया 2.3 बिलियन डॉलर का घाटा होता है।

 

·         रवि तथा ऐंगलर द्वारा प्रस्तुत एक अध्ययन (2009) में कहा गया है कि ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिन के रोजगार की गारंटी देने वाले कार्यक्रम मनरेगा के कारण ग्रामीण इलाकों में भोजन के मद में खर्च 40 फीसदी बढ़ा है। इसका सर्वाधिक प्रभाव मनरेगा में काम पाने वाले सर्वाधिक गरीब परिवारों के पोषण की दशा पर हुआ है।

 

·         अनुमान है कि राष्ट्रीय आय का 2–3% कुपोषण के कारण अपव्यय होता है। बचपन में कुपोषण का शिकार व्यक्ति की कार्यक्षमता कम होती है और ऐसा व्यक्ति व्यस्क होने की दशा में औसतन 20 फीसदी कम आय अर्जित करता है।

 

·         फरवरी 2011 में खाद्य-पदार्थों के दामों में रिकार्ड बढ़ोतरी हुई और इसके कारण तकरीबन 400,000 बच्चों के पोषण की दशा पर नकारात्मक असर पडा।

 

·         विश्वस्तर पर देखें तो चार में एक बच्चा कुपोषण का शिकार है। विकासशील देशों में यह आंकड़ा 3 में से एक बच्चे का है। इसका सीधा मतलब हुआ कि इन बच्चों का शरीर और मष्तिष्क कुपोषण के कारण समुचित रीति से नहीं विकसित हो रहा।

 

·         कुपोषण के कारण प्रतिदिन 300 बच्चों की मौत होती है। सालाना 2.6  मिलियन बच्चे विश्वस्तर पर कुपोषणजनित कारणों से मृत्यु को प्राप्त होते हैं।.

 

·         सामान्य से कम बढ़वार वाले बच्चों को इसके दुष्प्रभाव से बचाने की दिशा में वैश्विक स्तर पर प्रगति धीमी रही है। सामान्य से कम बढ़वार वाले बच्चों की तादाद साल 1990 में 40 फीसदी थी जो साल 2010 में घटकर 27 फीसदी हुई है यानी सालाना इस दिशा में 0.6 फीसदी की प्रगति हुई।

 

·         अगर विटामिन ए, जिंक की खुराक और आयोडिन युक्त नमक दिया जाय तथा स्वास्थ्य की सही देखभाल वाली आदतें मसलन-हाथ-मुंह धोना, नवजात शिशु को स्तनपान आदि डाली जायें तो लैंसेट मेडिकल जर्नल के अनुसार पाँच साल से कम उम्र के तकरीबन 2 मिलियन बच्चों की जान उन 36 देशों में बचायी जा सकती है जहां दुनिया के कुपोषित बच्चों की 90 फीसदी तादाद रहती है।

 

 

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