कुपोषण

कुपोषण

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इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट की ग्लोबल फूड पॉलिसी रिपोर्ट 2014-15 के तथ्यों के अनुसार

http://www.im4change.org/news-alerts/miles-to-go-for-achieving-food-security-4675677.html

ग्लोबल फूड पॉलिसी रिपोर्ट 2014-15 के मुख्य तथ्य :

•     विश्व में 57 करोड़ फार्मस् हैं। इसमें तकरीबन तीन चौथाई फार्मस् एशिया में है और इसका 60 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ चीन तथा भारत में है।

•     भारत केन्या तथा जांबिया के साक्ष्यों से पता चलता है कि मूल्यों में स्थिरता लाने के लिए राष्ट्रीय रिजर्व प्रभावकारी हो सकता है।

•     भारत में फल और सब्जियों का थोक मूल्य साल 2012-13 की तुलना में साल 2013-14 में 23 प्रतिशत ज्यादा था।

•     भारत और चीन में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार तेज है लेकिन दोनों देशों में भुखमरी और कुपोषण के शिकार लोगों की तादाद ज्यादा है जबकि मैक्सिको और ब्राजील जैसी अर्थव्यवस्था में लोग ज्यादा वज़न तथा मोटापा जैसी समस्याओं से पीड़ित हो रहे हैं।

•     सूक्ष्म पोषाहार(माइक्रो न्यूट्रीएन्टस्) की कमी की वजह से भारत को अपनी जीडीपी के 3 प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ता है।


•     ब्राजील, चीन, भारत, इंडोनेशिया और मैक्सिको जैसे देशों में निरंतर भोजन की कमी से जूझ रहे लोगों की संख्या में कमी लाने के लगातार प्रयास किए गए हैं। इन प्रयासों के बावजूद समावेशी विकास को जारी रखना मुश्किल साबित हो रहा है। भोजन की कमी से जूझ रही विश्व की कुल आबादी का तकरीबन पचास प्रतिशत(36 करोड़ 60 लाख) हिस्सा इन्हीं देशों में है।

•    भारत में साल 2004-06 में कुपोषण की शिकार आबादी की संख्या 21.5 प्रतिशत थी जो साल 2011-13 में घटकर 17 प्रतिशत हो गई है। ठीक इसी तरह साल 2004-05 में मानक से कम वज़न के बच्चों(पाँच साल से कम उम्र के) की तादाद भारत में 43.5 प्रतिशत थी जो साल 2011-13 में घटकर 30.7 प्रतिशत हो गई है।

•    विश्व में खुले में शौच करने वाले कुल लोगों की संख्या का 60 प्रतिशत हिस्सा भारत में रहता है। साफ-सफाई और पोषण की स्थितियों पर इसका गहरा असर है।

•    भारत के 29 राज्यों में से केवल पाँच राज्यों में खाद्य सुरक्षा अधिनियम पूरी तरह लागू किया गया है, 6 राज्यों में यह आंशिक रुप से लागू हुआ है।
 

 

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