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खास बात
• साल १९८३ में देश के ग्रामीण अंचलों में प्रति व्यक्ति प्रति दिन औसत कैलोरी उपभोग २३०९ किलो कैलोरी का था जो साल १९९८ में घटकर २०१० किलो कैलोरी रह गया।*
• सालाना प्रति व्यक्ति खाद्यान्न उपलब्धता साल १८८७-१९०२ में १९९ किलोग्राम थी जो साल २००२-०३ में घटकर १४१.५० किलोग्राम रह गई।*
• साल १९९० के दशक में एफसीआई के भंडारघरों में खाद्यान्न की बहुलता का एक कारण यह भी था कि इस अवधि में लोगों की क्रयशक्ति में भारी कमी आई। *
• एशिया में प्री-स्कूल संवर्ग के आधे से ज्यादा बच्चे कुपोषित हैं।**
• भारत में किशोर वय की ७२.६ फीसदी बच्चियों में एनीमिया का विस्तार है।***
• साल १९९०-९२ और साल फिर साल १९९० के दशक के मध्यवर्ती सालों में भारत में भुखमरी से निपटने की दिशा में खासी प्रगति हुई मगर १९९५-९७ के बाद यह प्रक्रिया मंद पड़ गई।*#
• उड़ीसा, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और पंजाब(अंशतया) में प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति १८९० किलो कैलोरी से कम उपभोग करने वाली आबादी की तादाद बढ़ी है। ##
* पटनायक उत्सा(२००३)- एगरेरियन क्राइसिस एंड डस्ट्रेस इन रुरल इंडिया माइक्रोस्कैन
** मेसन जॉन, हंट, जोसेफ, पार्कर, डेविड एंड जॉनसन, अरबन(१९९९):इंवेस्टिंग इन चाइल्ड न्यूट्रिशन, एशियन डेवलपमेंट रिव्यू।खंड. 17,संख्या-. 1,2, पेज 1-32
*** ११ वीं पंचवर्षीय योजना, योजना आयोग, भारत सरकार
*# एफएओ रिपोर्ट- द स्टेट ऑव फूड इन्सिक्यूरिटी इन द वर्ल्ड-२००८
## रिपोर्ट ऑन द स्टेट ऑव फूड इन्सियक्यूरिटी इन रुरल इंडिया(२००९)-एम एस स्वामीनाथन पाऊंडेशन और वर्ल्ड फूड प्रोग्राम द्वारा तैयार दस्तावेज
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