मिड डे मील (एमडीएमएस) योजना

मिड डे मील (एमडीएमएस) योजना

२८ अगस्त २००४ के दिन के जारी, मिड डे मील विषयक राष्ट्रीय परामर्ष परिषद की सिफारिशों के अनुसार-
http://pmindia.nic.in/nac/communication/meal.pdf

  • प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर छात्रों को पोषाहार देने की राष्ट्रीय योजना (मिड डे मील) की शुरुआत १९९५ में हुई।
  • साल २००२ के बाद छात्रों को पकाया हुआ भोजन मुहैया कराने वाले राज्यों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ। इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने सभी रोज्यों को आदेश दिया (तारीख २८ नवंबर, २००१) था कि प्राइमरी स्कूलों में बच्चों को दोपहर का भोजन दिया जाय।

ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के दस्तावेज के अनुसार-
http://planningcommission.nic.in/plans/planrel/fiveyr/11th
/11_v2/11v2_ch1.pdf

  • मिड डे मील योजना की शुरुआत साल १९९५ में हुई। इसके पीछे उद्देश्य यह था कि बच्चों की नामांकन बढ़े, स्कूलों में उनकी उपस्थिति सुनिश्चत हो,वे कक्षा की पढ़ाई बीच में ना छोड़ें और साथ ही बच्चों पौष्टिक भोजन मिल सके। 
  • साल १९९५ में मिड डे मील योजना के अन्तर्गत ३.२२ लाख प्राइमरी स्कूलों के ३.३४ करोड़ बच्चों को मिड डे मील योजना के अन्तर्गत पोषाहार देना आरंभ हुआ और यह संख्या २००६-०७ में बढ़कर ९.५ लाख स्कूल और १२ करोड़ छात्रों तक जा पहुंची है।
  • साल २००४ के सितंबर महीने में एमडीएमएस में संशोधन किए गए और इसे सर्वव्यापी बनाया गया। सरकारी अनुदान प्राप्त स्कूल, स्थानीय शासन के अन्तर्गत चलने वाली शिक्षा शालाएं और सरकारी प्राइमरी स्कूल में (कक्षा १ से ४ तक) पढ़ने वाले प्रत्येक छात्र को पोषाहार पकायी हुई अवस्था में मिले, इसे सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय कोष से प्रत्येक छात्र १ रुपये देना मंजूर हुआ।
  • साल २००८-०९ तक एमडीएमएस के दायरे में १८ करोड़ बच्चे आ गए हैं।
  • अपर प्राइमरी स्कूल के बच्चों के लिए सुनिश्चित किया गया है कि उन्हें भोजन से ७०० किलो कैलोरी हासिल हो। इसके लिए १५० ग्राम अनाज और २० ग्राम प्रोटीन की मात्रा तय की गई है।
  • विशेष वर्ग में आने वाले राज्यों को मिड डे मील सामग्री के परिवहन के मद में प्रति किविंटल १०० रुपये और सामान्य श्रेणी के राज्यों को प्रति किविन्टल ७५ रुपये मिलेंगे।
  • साल २००६ में मिड डे मील योजना में फिर से संशोधन किया गया और भोजन पकाने के मद में प्रति छात्र रकम २ रुपये कर दी गई। भोजन से प्राप्त कैलोरी की मात्रा घटाकर ४५० किलोकैलोरी ऱखी गई। प्रोटीन की मात्रा घटाकर १२ ग्राम कर दी गई।
  • रिपोर्टों का आकलन है कि एमडीएमएस से ग्रामीण आबादी का ८.१ फीसदी और शहरी आबादी का ३.२ फीसदी लाभान्वित हुआ है।
  • एमडीएमएस से गांवों और शहरों में आबाद निम्न आय वर्ग के परिवार के बच्चों को फायदा पहुंचा है।

एमडीएमएस लागू करने के उत्कृष्ट उदाहरण

तमिलनाडु में प्राइमरी स्कूलों के सभी बच्चों को हैल्थ कार्ड जारी किये गए हैं और प्रत्येक  वृहस्पतिवार को स्कूलों में हैल्थ डे मनाया जाता है। स्कूली परिसर में करीपत्ता और सहिजन के पेड़ लगाए गये हैं। कर्नाटक के सभी स्कूलों में रसोई गैस के इस्तेमाल से मिड डे मील का भोजन तैयार किया जाता है। पांडिचेरी में प्राइमरी स्कूल के बच्चों को मिड डे मील के तहत दोपहर का भोजन तो दिया ही जाता है साथ ही में राजीव गाधी ब्रेकफास्ट योजना के अन्तर्गत उन्हें बिस्किट के साथ एक ग्लास गर्म दूध भी दिया जाता है। बिहार में बाल संसद के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि मिड डे मील का वितरण सुचारु रुप से हो। उत्तराखंड में प्राइमरी स्कूलों में महिलाओं को भोजनमाता के रुप में नियुक्त किया गया है। गुजरात, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में बच्चों को भोजन के साथ सूक्ष्म पोषक तत्त्व मुहैया कराया जा रहा है और उन्हे पेट के कीड़े मारने की दवा भी जाती है।
स्रोत-ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना का दस्तावेज

 

 

 
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