शिक्षा

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  एनएसएस द्वारा प्रस्तुत एजुकेशन इन इंडिया २००७-०८, पार्टिसिपेशन एंड एक्सपेंडिचर, रिपोर्ट संख्या- 532(64/25.2/1): (जुलाई 2007–जून 2008) के अनुसार-

•    केरल (94%), असम (84%), और महाराष्ट्र (81%) अपेक्षाकृत उच्च साक्षरता दर वाले राज्य हैं।
•    अपेक्षाकृत निम्न साक्षरता दर वाले राज्यों के नाम हैं-- बिहार (58%), राजस्थान (62%) और आंध्रप्रदेश(64%)
•    निम्न साक्षरता दर वाले अन्य राज्यों के नाम हैं-- झारखंड (64.6%), उत्तरप्रदेश (66.2%), जम्मू-कश्मीर(67.7%) और ओड़िसा (68.3%)
•    देश की व्यस्क आबादी( १५ साल और उससे ज्यादा की उम्र)  का 66% हिस्सा साक्षर है।
•    ग्रामीण इलाकों में प्रति व्यक्ति मासिक खर्चे के आधार पर सबसे निचली श्रेणी में ५१.२ फीसदी आबादी निरक्षर है। प्रति व्यक्ति मासिक खर्चे के हिसाब से सबसे ऊंचसी श्रेणी में आने वाली ग्रामीण आबादी में भी महज २२.८ फीसदी लोग साक्षर हैं।
•    ग्रामीण इलाके की महिलाओं और पुरुषों तथा शहरी इलाके की महिलाओं और पुरुषों के बीच साक्षरता दर क्रमशः  51.1%, 68.4%, 71.6%  और  82.2% पायी गई। ४२ दौर की गणना( साल ) में यही आंकड़ा क्रमशः  24.8%, 47.6%, 59.1% और 74.0% का था। 
•    98% फीसदी ग्रामीण घरों और  99% फीसदी शहरी घरों के दो किलोमीटर की परिधि में प्राथमिक विद्यालय मौजूद हैं।
•     79% फीसदी ग्रामीण घरों और 97%  फीसदी शहरी घरों के दो किलोमीटर की परिधि में माध्यमिक विद्यालय मौजूद हैं।
•    47% फीसदी ग्रामीण घरों और 91%   फीसदी शहरी घरों के दो किलोमीटर की परिधि में माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालय दोनों मौजूद हैं।
•    ५-२९ साल के आयु वर्ग के लोगों में ४६ फीसदी आबादी अभी किसी भी शैक्षिक संस्था में नामांकित नहीं है, इस आयु वर्ग के दो फीसदी लोगों का नामांकन तो है लेकिन इनकी शैक्षिक संस्था में उपस्थिति नहीं है। इस आयु वर्ग के ५२ फीसदी व्यक्तियों की शैक्षिक संस्था में उपस्थिति दर्ज की गई है।
•    5-29 साल के आयु वर्ग में प्राथमिक और उससे ऊंचे दर्जे की कक्षा में नामांकित व्यक्तियों के हिसाब से देखें तो - 49% प्राथमिक स्तर पर,  24% माध्यमिक स्तर पर ; 20% उच्च माध्यमिक स्तर पर और  7% हायर सेकेंडरी स्तर पर नामांकित हैं।
•    सामान्य पाठ्यक्रम में 97.8% व्यक्तियों ने दाखिला लिया है। तकनीकी प्रकृति के पाठ्यक्रम में 1.9% और रोजगारपरक पाठ्यक्रम में  लोगों ने दाखिला लिया है।
•    अखिल भारतीय स्तर पर नेट अटेन्डेंट रेशियो कक्षाI-VIII के लिए  86% है।
•    अपेक्षाकृत उच्च नेट अटेन्डेंट रेशियो (कक्षाI-VIII के लिए) वाले बड़े राज्यों के नाम हैं- : हिमाचल प्रदेश  (96%),केरल(94%) और तमिलनाडु (92%)।
•    अपेक्षाकृत निम्न नेट अटेन्डेंट रेशियो (कक्षाI-VIII के लिए) वाले बड़े राज्यों के नाम हैं-: बिहार (74%), झारखंड (81%), उत्तरप्रदेश (83%)
•    प्राथमिक स्तर की शिक्षा के लिहाज से निजी संस्थाओं में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों में 73% ही किसी मान्यता प्राप्त संस्था से संबद्ध हैं।
•    माध्यमिक स्तर की शिक्षा के लिहाज से निजी संस्थाओं में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों में 78% विद्यार्थी ही किसी मान्यता प्राप्त संस्था से संबद्ध हैं।
•    प्राथमिक स्तर पर 71% फीसदी छात्रों को मुफ्त शिक्षा हासिल है( ग्रामीण - 80%, शहरी - 40%)
•    माध्यमिक स्तर पर 68%  फीसदी छात्रों को मुफ्त शिक्षा हासिल है( ग्रामीण - 75%, शहरी - 45%)
•    उच्च माध्यमिक स्तर या हायर सेकेंडरी स्तर पर 48%  फीसदी छात्रों को मुफ्त शिक्षा हासिल है( ग्रामीण - 54%, शहरी - 35%)

•    निजी शैक्षिक संस्था में प्राथमिक स्तर की शिक्षा के लिए दाखिल हर छात्र पर सालाना औसत खर्चा  1413 रुपये का है।  (ग्रामीण- . 826 रुपये , शहरी - .3626 रुपये )
•    निजी शैक्षिक संस्था में माध्यमिक स्तर की शिक्षा के लिए दाखिल हर छात्र पर सालाना औसत खर्चा  2088 रुपये का है।  (ग्रामीण- .  1370 रुपये , शहरी - .4264 रुपये )
•    निजी शैक्षिक संस्था में माध्यमिक स्तर की शिक्षा के लिए दाखिल हर छात्र पर सालाना औसत खर्चा  2088 रुपये का है।  (ग्रामीण- .  1370 रुपये , शहरी - .4264 रुपये )
•निजी शैक्षिक संस्था में सेंकेंडरी या हायर सेकेंडरी स्तर की शिक्षा के लिए दाखिल हर छात्र पर सालाना औसत खर्चा 4351रुपये का है( ग्रामीण-3019, शहरी-7212)
•    सेंकेंडरी या हायर सेकेंडरी स्तर से आगे की शिक्षा के लिए दाखिल हर छात्र पर सालाना औसत खर्चा 7360 रुपये का है( ग्रामीण-6327, शहरी-8466)
•    तकनीकी शिक्षा के लिए यही खर्चा प्रति छात्र सालाना 32112 रुपये का है( ग्रामीण-27177 रुपये, शहरी-34822 रुपये)।
•    रोजगारपरक शिक्षा के लिए यही खर्चा प्रति छात्र सालाना 14881 रुपये का है( ग्रामीण- 13699 रुपये, शहरी-17016 रुपये)।
•    बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओड़ीसा में प्राथमिक स्तर की शिक्षा के लिए अगर छात्र निजी स्कूलों में दाखिल है तो उसका सालाना औसत खर्चा ६००-८०० रुपये का है जबकि पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में ३५०० रुपये तक।
•    ग्रामीण इलाकों में मासिक खर्चे के लिहाज से सबसे निचली श्रेणी में आने वाला तबके के एक छात्र पर उसका परिवार प्राथमिक शिक्षा के लिए ३५२ रुपये सालाना खर्च करता है तो मासिक खर्चे के लिहाज से सबसे उंचले पादान पर आने वाली श्रेणी के छात्र के लिए यही खर्चा ३५१६ रुपये का है। शहरी क्षेत्र में उपरोक्त वर्गों के लिए यह खर्चा क्रमशः 1035 रुपये और 13474 रुपये का है।
•    अगर अखिल भारतीय स्तर पर देखें तो शिक्षा पर कुल सालाना खर्चा प्रति छात्र ३०५८ रुपये का है जिसमें ट्यूशन फीस का हिस्सा 1034 रुपये का, परीक्षा शुल्क सहति अन्य शुल्कों(४५९ रुपये) का हिस्सा कुल खर्चे का आधा है। किताब और स्टेशनरी की खरीद पर ८५६ रुपये का खर्चा बैठता है तथा प्राइवेट कोचिंग पर ३५४ रुपये का।
•    जहां तक ग्रामीण भारत का सवाल है शिक्षा पर कुल खर्चे का ४० फीसदी हिस्सा ट्यूशन फीस, परीक्षा और अन्य शुल्कों के मद में आता है जबकि कुल खर्चे का २५ फीसदी हिस्सा किताबों और स्टेशनरी की खरीदारी पर। शहरी क्षेत्र में ट्यूशन फीस का हिस्सा कुल खर्चे में ४० फीसदी का है।
•    ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतर छात्र सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। प्राथमिक स्तर की शिक्षा के लिए सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की तादाद ७६ फीसदी है, माध्यमिक स्तर की शिक्षा के लिए सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों की तादाद ७३ फीसदी और हायर सेकेंडरी स्तर पर यह आंकड़ा ६२ फीसदी का है।  
•    शहरी क्षेत्र में प्राथमिक स्तर की शिक्षा के लिहाज से कुल छात्रों का ५९ फीसदी निजी स्कूलों में पढ़ता है। मिडिल और सेकेंडरी स्तर पर यह आंकड़ा शहरी क्षेत्रों में ५४-५५ फीसदी का है। शहरी क्षेत्र में प्राथमिक स्तर पर कुळ छात्रों का महज ३५ फीसदी सरकारी स्कूलों में पढ़ता है, माध्यमिक स्तर की शिक्षा के लिए कुल छात्रों का ४० फीसदी हिस्सा सरकारी स्कूलों में जाता है और हायर सेकेंडरी स्तर पर यह आंकड़ा ४३ फीसदी का है। .
•    असम बिहार छ्तीसगढ़ और ओड़िसा में प्राथमिक स्तर की शिक्षा के लिए कुल छात्रों का ९० फीसदी हिस्सा सरकारी स्कूलों या फिर स्थानीय निकायों द्वारा संचालित स्कूलों में जाता है जबकि केरल में ३५ फीसदी और पंजाब में ४५ फीसदी। इन दो राज्यों में अधिकतर छात्र निजी संस्थानों में शिक्षा प्राप्त करते हैं।
•    सरकारी स्कूलों में पढने वाले बच्चों में ६० फीसदी को मिड डे मील हासिल होता है। इसकी तुलना में सराकारी सहायता प्राप्त निजी संस्थानों में पढ़ने वाले १६ फीसदी बच्चों को और  सरकारी सहायता विहीन निजी संस्थाओं में पढ़ने वाले छात्रों में से महज २ फीसदी छात्रों को मिड डे मील मिलता है।
•    सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे कुल 69% फीसदी छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें मिलती है, सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में पढने वाले कुल २२ फीसदी छात्रों को जबकि गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में पढ़ने वाले कुल ४ फीसदी छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें हासिल होती हैं।
•    स्कूली पढ़ाई पूरी ना कर पाने की मुख्य वजहें- धन की कमी (21%), विद्यार्थी का पढ़ाई में मन ना लगना (20%), पढाई में असफल होने का तनाव ना झेल पाना (10%), अपेक्षा का पूरा हो जाना यानि जहां तक पढना था पढ़ लिया का भाव-(10%), माता पिता का बच्चे की पढ़ाई में दिलचस्पी ना लेना- (9%)
•    स्कूल में नाम ना लिखाने की तीन वजहें बार बार अध्ययन के दौरान लोगों ने स्वीकार की-क) माता पिता का बच्चे की पढ़ाई के प्रति रुचि ना रखना (33.2%), ख) धन की कमी  (21%) और  ग) शिक्षा को जरुरी ना मानना  (21.8%).

Note: Net Attendance Ratio (I-VIII)=(Number of persons in age-group 6-13 currently attending Classes I-VIII divided by Estimated population in the age-group I-VIII years) multiplied by hundred 


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