शिक्षा

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एनएसएस यानी राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के ५५ दौर के आकलन पर आधारित लिटरेसी एंड लेवल ऑफ एजुकेशन इन इंडिया जुलाई १९९९-जून २००० के अनुसार-

  • भारत के शहरी इलाके में १००० में ७९८ व्यक्ति साक्षर है यानी शहरी इलाके में हर पांचवां व्यक्ति निरक्षर है। शहरी इलाके के साक्षरों में ३२५ व्यक्तियों(७९८ में) ने माध्यमिक या उससे आगे की शिक्षा पायी है। ग्रामीण भारत की तुलना में यह आंकड़ा बहुत ज्यादा है। शहरी इलाके में १००० में ८६५ पुरुष साक्षर थे जबकि महिलाओं के मामले में यह आंकड़ा ७२ फीसदी का है।
  • देश के ग्रामीण इलाके में अनुसूचित जनजाति के परिवारों में साक्षरता दर सबसे कम (४२ फीसदी) है। इसके बाद अनुसूचित जाति के परिवारों(४२ फीसदी) का नंबर है। देश के शहरी इलाके में सबसे कम साक्षरता दर अनुसूचित जाति के परिवारों (६६ फीसदी) की है। शहरी इलाके में अनुसूचित जनजाति के परिवारों की साक्षरता दर ७० फीसदी है। शहरी और ग्रामीण दोनों ही इलाकों में अन्य सामाजिक वर्गों के बीच साक्षरता दर अपेक्षाकृत ज्यादा है।   
  • हर शिक्षा-स्तर में महिलाओं का अनुपात पुरुषों की अपेक्षा कम है। अगर ग्रामीण और शहरी परिवारों को प्रति व्यक्ति मासिक खर्चे के आधार पर सोपानिक क्रम में सजाये तो हर ऊपरले पादान पर साक्षर व्यक्तियों की संख्या बढती जाती है। स्त्री-पुरुषों के अनुपात के मामले में भी यही बात है। 
  • भारत के ग्रामीण इलाके में गैर खेतिहर स्वरोजगार में लगे परिवारों में प्रति हजार व्यक्ति में ६३० व्यक्ति साक्षर थे जबकि खेतिहर मजदूर वर्ग में यह आंकड़ा प्रतिहजार ४२६ व्यक्तियों का है।   
  • जमीन की मिल्कियत के लिहाज से देखें तो ग्रामीण भारत में साक्षरता की दर जमीन की बढ़ती हुई मिल्कियत के साथ बड़ी धीमी गति से बढ़ती हुई पायी गई। जिन परिवारों के पास सबसे कम जमीन की मिल्कियत थी उनमें साक्षरता दर ५२ फीसदी की है जबकि सर्वाधिक जमीन की मिल्कियत वाले वर्ग में ६४ फीसदी की।
  • जमीन की मिल्कियत को आधार मानकर देखें तो हर भूस्वामी वर्ग में महिलाओं में साक्षरता की दर पुरुषों की तुलना में कम है।
  • भारत के ग्रामीण इलाके में इस्लाम धर्म के अनुयायियों में साक्षरता दर (स्त्री और पुरुष दोनों के लिए) अन्य धर्मावलंबियों की तुलना में कम है। ग्रामीण इलाके में हिन्दू धर्म या फिर किसी अन्य धर्म को मानने वाले परिवारों में महिलाओं की साक्षरता की स्थिति इससे कुछ ही बेहतर है ज्यादा नहीं। भारत के शहरी इलाके में हिन्दू, सिख या फिर बौद्ध धर्म मानने वाले पुरुषों के बीच साक्षरता दर ८८-८९ फीसदी है। ईसाई या जैन धर्म मानने वाले पुरुषों के बीच साक्षरता दर  ऊंची(९४ फीसदी और इससे अधिक) है। शहरी इलाके में भी इस्लाम धर्म के अनुयायी पुरुष या स्त्रियों में साक्षरता दर तुलनात्मक रुप से कम है। 
  • भारत के ग्रामीण इलाके में बाकी धर्मों की तुलना में हिन्दू या इस्लाम धर्म मानने वालों में स्त्री और पुरुष के बीच साक्षरता दर में ज्यादा का अंतर है। शहरी भारत के लिए भी यही बात लागू होती है लेकिन शहरों में हिन्दू या इस्लाम धर्म मानने वालों में स्त्री-पुरुष के बीच साक्षरता के दर में अन्तर ग्रामीण भारत की तुलना में कम है। 
  • साल १९९३-९४ से १९९९-२००० के बीच देश के कुल १५ बड़े राज्यों में से मध्यप्रदेश और राजस्थान में पुरुषों और स्त्रियों की साक्षरता दर में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। इन राज्यों में पुरुषों के मामले में साक्षरता दर में ९ फीसदी की और महिलाओं के मामले में १० फीसदी के बढोतरी हुई। बड़े राज्यों के दायरे में महाराष्ट्र भी शामिल है और इस राज्य में पुरुषों की साक्षरता में तो नहीं लेकिन महिलाओं की साक्षरता दर में १० फीसदी का इजाफा हुआ। जहां तक भारत के शहरी इलाके का सवाल है साल १९९३-९४ से साल १९९९-२००० के बीच कर्नाटक, राजस्थान, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु के शहरी इलाके साक्षरता-वृद्धि के राष्ट्रीय औसत की तुलना में कहीं आगे रहे।
  • ग्रामीण इलाकों के हिसाब से देखें तो बड़े राज्यों में केरल में साक्षरता दर सबसे ज्यादा रही। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के ५० और ५५ वें दोनों ही दौर की गणना में केरल में साक्षरता दर ९० फीसदी की पायी गई। इस गणना में दूसरे स्थान पर असम(६९ फीसदी) रहा। बिहार में सबसे कम साक्षरता-दर(४२ फीसदी) थी। इसके बाद नंबर आंध्रप्रदेश(४६ फीसदी) और राजस्थान का है।
  • भारत के शहरी इलाके में जीविका के लिए दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर परिवारों में साक्षरता दर बहुत कम है। इस वर्ग के प्रति हजार व्यक्तियों में ५९३ यानी लगभग ५९ फीसदी साक्षर पाये गए जबकि इस वर्ग के लिए राष्ट्रीय औसत ८० फीसदी का है। वेतनभोगी या नियमित आमदनी वाले शहरी परिवारों में इसकी तुलना में साक्षरता दर ज्यादा है।
  • कुल ३२ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में महज ८ में ग्रामीण इलाकों में साक्षरता दर ८० फीसदी या उससे ज्यादा है। इन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के नाम हैं- गोवा,  केरल,  मिजोरम,  नगालैंड,  अंडमान निकोबार द्वीपसमूह,  दमन और दिऊ, दिल्ली और लक्षद्वीप। .
  • साल १९९३-९४ से साल १९९९-२००० के बीच राष्ट्रीय स्तर पर साक्षरता दर (प्रतिशत पैमाने पर) बढ़ी है। ग्रामीण इलाके के पुरुषों के मामले में साक्षरता दर ६३ फीसदी से बढ़कर ६८ फीसदी और शहरी इलाके के पुरुषों के मामले में साक्षरता दर ८५ फीसदी से बढ़कर ८७ फीसदी हो गई। महिलाओं के मामले में यह आंकड़ा ग्रामीण इलाके के लिए ३६ फीसदी बनाम ४३ फीसदी और शहरी इलाके के लिए ६८ फीसदी बनाम ७२ फीसदी का है।व्यक्ति के आधार पर देखें तो ग्रामीण इलाके में १९९३-९४ में ५० फीसदी साक्षरता दर थी जो साल १९९९-२००० में बढ़कर ५६ फीसदी हो गई। शहरी इलाके के लिए यह आंकड़ा ७७ फीसदी बनाम ८० फीसदी का है।
  • राष्ट्रीय स्तर पर भारत की जनगणना के आंकड़ो और राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के आंकड़ों के बीच अन्तर( साक्षरता दर के आंकड़ों के मामले में)३ फीसदी का है। ग्रामीण इलाके के पुरुषों की साक्षरता दर राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण में ७३ फीसदी बतायी गई है जबकि जनगणना के आंकडों में ७६ फीसदी। ठीक इसी तरह महिलाओं के मामले में यह आंकड़ा क्रमशः ५१ फीसदी और ५४ फीसदी का है।
प्राथमिक शिक्षा में प्रगति का ग्राफ (साल १९९९ से)
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Source: RGI; SES, MHRD

शैक्षिक संस्थानों की बढ़ोतरी का ग्राफ (साल १९९९ से)
नीचे दिए गए आरेख से पता चलता है कि साल १९९९-२००० से २००४-०५ के बीच स्कूलों में नामांकन की तादाद(लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए) बढ़ी है लेकिन लड़कों के नामांकन की तादाद लड़कियों के नामांकन से ज्यादा है। 
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 Source: SES, MHRD *Provisional
कन्फेडरेशन ऑव इंडियन इंडस्ट्री नई दिल्ली द्वारा प्रस्तुत- राइट टू एजुकेशन-एक्शन नाऊ नामक दस्तावेज के अनुसार-
  • सातवें एजुकेशन सर्वे (२००२) में कहा गया है कि १०.७१ लाख यानी ८७ फीसदी बस्तियों के एक किलोमीटर के दायरे में प्राथमिक विद्यालय मौजूद है जबकि १.६ लाख बस्तियों के एक किलोमीटर के दायरे में कोई प्राथमिक विद्यालय नहीं है। .
  • देश के सिर्फ ७८ फीसदी बस्तियों के ३ किलोमीटर के दायरे में अपर प्राइमरी स्कूल की मौजूदगी है और ग्रामीण आबादी के ८६ फीसदी हिस्से की जरुरतें इनसे पूरी हो पाती हैं। साल २००२-०३ के बाद से अबतक ८८९३० नये अपर प्राइमरी स्कूल खोले गए हैं लेकिन इनकी संख्या अब भी जरुरत के लिहाज से कम है।
  • मध्यप्रदेश में सिर्फ एक तिहाई शिक्षक स्कूल में उपस्थित होते हैं जबकि बिहार में यह आंकड़ा २५ फीसदी का और यूपी में २० फीसदी का है।
  • राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो साल २००४-०५ में २.८ प्राथमिक विद्यालयों पर अपर प्राइमरी स्कूलों की संख्या एक थी। साल २००५-०६ में देश में २.५ प्राइमरी स्कूलों पर अपर प्राइमरी स्कूलों की संख्या १ थी। हर दो प्राथमिक विद्यालय पर कम से कम एक अपर प्राइमरी स्कूल हो(जैसी कि सर्व शिक्षा अभियान की मान्यता है) इसके लिए १ लाख ४० हजार अपर प्राइमरी स्कूल खोलने होंगे।
  • सर्व शिक्षा अभियान के अन्तर्गत ७.९५ लाख शिक्षकों की बहाली हुई है ताकि प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर ४४ छात्रों पर १ शिक्षक होने के बजाय ४० छात्रों पर १ शिक्षक का छात्र-शिक्षक अनुपात कायम किया जा सके। शिक्षकों को कार्यकालीन प्रशिक्षण भी दिया गया है। इसके अतिरिक्त बच्चों को ६.९ लाख रुपये मूल्य की पाठ्यपुस्तकें मुफ्त बांटी गई हैं। 
  • साल २००२-०३ में ड्राप-आऊट दर १५ फीसदी थी जो साल २००३-०४ में घटकर १३ फीसदी और २००४-०५ में घटकर १२ फीसदी हो गई। ड्राप-आऊट रेट में आ रही कमी उत्साहवर्धक है लेकिन इस दिशा में पूरी गंभीरता से और गहन कोशिश करनी होगी।
  • साल १९९९-२००० से शिक्षकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। साल १९९९-२००० में प्राइमरी स्तर पर १९.२ लाख शिक्षक थे। साल २००३-०४ में इनकी संख्या बढ़कर २०.९ लाख हो गई। इसी अवधि में अपर प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की संख्या १२.९८ लाख से बढ़कर १६.०२ लाख हो गई।
  • सरकार ने प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सर्व शिक्षा अभियान, जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम, प्राथमिक विद्यालयों में पोषाहार सहायता देने का राष्ट्रीय कार्यक्रम ( नेशलन प्रोग्राम ऑव न्यूट्रीशनल सपोर्ट टू प्राइमरी एजुकेशन), मिड डे मील और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना जैसी संस्थाओं शुरु की हैं।
यूनेस्कों इंस्टीट्यूट ऑव स्टैटिक्स के अनुसार-

४० फीसदी बच्चे प्री-प्राइमरी स्कूलों में नामांकित है
८७ फीसदी लड़कियां और ९० फीसदी लड़के प्राइमरी स्कूलों में हैं।
तृतीयक आयु वर्ग की १२ फीसदी आबादी शिक्षा के तृतीयक स्तर पर है।
८६ फीसदी बच्चों ने प्राइमरी की सम्पूर्ण पढ़ाई पूरी की है  
सरकार के खर्चे का १०.७ फीसदी शिक्षा के मद में जाता है
६५.२ फीसदी व्यस्क और ८१.३ फीसदी युवा साक्षर हैं।
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 भारत में शिक्षा-एक नजर

  • युवा (१५–२४ साल) साक्षरता दर २०००-२००७*,  पुरुष ८७
  • युवा (१५–२४ साल) साक्षरता दर, २०००-२००७*, महिला ७७
  • प्रति सौ व्यक्तियों पर फोन, (साल २००६) -१५
  • प्रति सौ व्यक्तियों पर इंटरनेट-यूजर की संख्या, साल(२००६)-११
  • प्राइमरी स्कूल में नामांकन का अनुपात (साल २०००-२००७)-सकल, पुरुष ९०
  • प्राइमरी स्कूल में नामांकन का अनुपात (साल २०००-२००७)-सकल, स्त्री ८७
  • प्राथमिक विद्यालय में उपस्थिति का अनुपात (२०००-२००७)-निवल, पुरुष, ८५
  • प्राथमिक विद्यालय में उपस्थिति का अनुपात (२०००-२००७)-निवल, स्त्री ८१
  • माध्यमिक विद्यालय में नामांकन- अनुपात, २०००-२००७, पुरूष ५९
  • माध्यमिक विद्यालय में नामांकन- अनुपात, २०००-२००७, स्त्री ४९
  • माध्यमिक विद्यालय में उपस्थिति का अनुपात (२०००-२००७)-निवल, पुरुष ५९
  • माध्यमिक विद्यालय में उपस्थिति का अनुपात (२०००-२००७)-निवल, स्त्री ४९
  • नोट: नामांकन अनुपात का अर्थ होता है कि किसी विशिष्ट शिक्षा स्तर पर दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या कितनी है। इसमें दाखिला लेने वाले विद्यार्थी की उम्र का आकलन नहीं किया जाता।
Source: UNICEF, http://www.unicef.org/infobycountry/india_statistics.html

 

 
 


 


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