शिक्षा

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•  चौदह साल से अठारह साल के आयुवर्ग के तकरीबन 86 प्रतिशत युवजन अब भी औपचारिक शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत हैं और उनका नामांकन इस शिक्षा प्रणाली के तहत स्कूल या कॉलेज में है.

• इस आयुवर्ग के ज्यादातर युवजन(54प्रतिशत) या तो दसवीं कक्षा में नामांकित हैं अथवा इससे नीचे की कक्षा में. इस आयु वर्ग के 25 प्रतिशत छात्र ग्यारवीं या बारहवीं कक्षा में नामांकित हैं जबकि इस श्रेणी के 6 प्रतिशत छात्रों का दाखिला स्नातक अथवा डिग्री पाठयक्रमों के अंतर्गत है. इस आयुवर्ग के सिर्फ 14 प्रतिशत युवजन किसी भी किस्म की औपचारिक शिक्षा प्रणाली के दायरे में नहीं हैं.
 
• औपचारिक शिक्षा प्रणाली के तहत महिला और पुरुषों के नामांकन में अंतर उम्र के बढ़ने के साथ बढ़ता जाता है. नामांकन प्रतिशत के लिहाज से 14 साल तक की उम्र के स्त्री और पुरुषों के बीच विशेष अन्तर नहीं है लेकिन 18 साल की उम्र में यह अन्तर बहुत ज्यादा दिखता है. मिसाल के लिए 18 साल की उम्र की 32 प्रतिशत महिलाओं का औपचारिक शिक्षा प्रणाली में नामांकन नहीं है जबकि इस आयुवर्ग के अनामांकित पुरुषों की तादाद 28 प्रतिशत है.

• स्कूल या कॉलेज में अनामांकित छात्रों का प्रतिशत उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता जाता है. चौदह साल की उम्र तक अनामांकित छात्रों की तादाद 5 प्रतिशत है जबकि 18 साल की उम्र के अनामांकित छात्रों की तादाद 30 प्रतिशत.

• कुल मिलाकर देखें तो केवल 5 प्रतिशत युवजन एक ना एक किस्म के व्यावसायिक पाठयक्रम या प्रशिक्षण में भागीदार हैं. इस आंकड़े में वे छात्र भी शामिल हैं जिनका स्कूल या कॉलेज में दाखिला है तथा वैसे युवजन भी जिनका फिलहाल स्कूल-कॉलेज में कहीं नामांकन नहीं है.

• चौदह से अठारह साल के आयुवर्ग के युवजन की बड़ी तादाद(42प्रतिशत) कामकाजी है. इस तादाद में वे युवजन भी शामिल हैं जिनका किसी औपचारिक शिक्षा प्रणाली के भीतर दाखिला है तथा वे भी जिनका दाखिला नहीं है. कामकाजी युवजन में 79 प्रतिशत खेती-बाड़ी के काम में लगे हैं और यह तादाद खेती-बाड़ी की अपनी पारिवारिक जमीन पर योगदान कर रही है. इस आयुवर्ग के 77 प्रतिशत पुरुष और 89 प्रतिशत महिलाएं घरेलू कामकाज में हिस्सा बंटाते हैं. 

क्षमता

बुनियादी कौशल

• इस आयु-वर्ग के तकरीबन 25 प्रतिशत छात्र अब भी कोई बुनियादी स्तर का पाठ अपनी भाषा में धाराप्रवाह नहीं पढ़ सकते.

• आधे से ज्यादा छात्र तीन अंकों की संख्या में 1 अंक की संख्या से भाग लगाने में कठिनाई महसूस करते हैं. केवल 43 प्रतिशत छात्र गणित का ऐसा प्रश्न सही-सही हल कर सकते हैं. यह छात्रों की गणित कर सकने की बुनियादी क्षमता के आकलन का ‘असर’ का एक तरीका है.

• सर्वेक्षण में शामिल 14 साल के छात्रों में 53 प्रतिशत छात्र अंग्रेजी के सरल वाक्य पढ़ पा रहे थे. 18 साल की आयु वाले ऐसे छात्रों की तादाद 60 प्रतिशत है. 79 प्रतिशत छात्र वाक्य का अर्थ बता सकते थे.

• इस आयु-वर्ग के युवजन का एक बड़ा हिस्सा, जिन्होंने आठ साल की स्कूली शिक्षा पूरी कर ली है, पढ़ने और गणित करने की बुनियादी क्षमता से वंचित है.

• स्थानीय भाषाओं तथा अंग्रेजी में पाठ पढ़ सकने की क्षमता में आयु बढ़ने के साथ सुधार आने के संकेत हैं. स्थानीय भाषा तथा अंग्रेजी में बुनियादी पाठ पढ़ सकने वाले 14 साल की आयु वाले छात्रों की तुलना में 18 साल की आयु वाले छात्रों की संख्या ज्यादा है. लेकिन यही बात गणितीय योग्यता के मामले में नहीं कही जा सकती. चौदह साल तक की आयु वाले जितने छात्र गणित कर सकने की बुनियादी योग्यता से वंचित हैं, 18 साल की आयु वाले छात्रों की संख्या भी तकरीबन उतनी ही है. प्राथमिक स्तर की शिक्षा के समय अगर भाषा-ज्ञान तथा गणितीय योग्यता की कोई कमी छात्रों में विद्यमान हैं तो वह आयु बढ़ने के साथ आगे भी जारी रहती है. 

 
रोजमर्रा के कामों में अक्षर-ज्ञान और संख्या-ज्ञान का उपयोग

• असर 2017 में 14-18 साल के युवजन के बीच सर्वेक्षण के दौरान रकम गिनने, चीजों का भार(वजन) बताने तथा समय बताने से संबंधित कई सवाल पूछे गये और जानने की कोशिश की गई कि वे अपने अक्षर-ज्ञान तथा संख्या ज्ञान का इस्तेमाल रोजमर्रा के कामों में किस हद तक कर पा रहे हैं : 

• यह कितनी रकम है ? सर्वेक्षण में सामने आया कि 76 प्रतिशत युवजन(14 से 18 साल के) इस सवाल के उत्तर में सही रकम बता पा रहे हैं. वे रकम ठीक-ठीक गिन पाये. बुनियादी गणितीय क्षमता हासिल कर चुके युवजन में सही रकम बता पाने वालों की तादाद 90 प्रतिशत थी. 

• लगभग 56% प्रतिशत युवजन चीजों का भार किलोग्राम में सही-सही बता पा रहे थे. बुनियादी गणितीय क्षमता हासिल कर चुके युवजन में ऐसे छात्रों की तादाद 76 प्रतिशत थी. 

• समय जानना-पूछना एक ऐसा काम है जो हम रोजमर्रा ही करते हैं. समय बताने के सरल प्रश्न(घंटा बताना) का 83 फीसद युवजन ने सही जवाब दिया जबकि तनिक कठिन सवाल(घंटा और मिनट) का केवल 60 प्रतिशत युवजन ने सही जवाब दिया. 

•  लगभग 86% प्रतिशत युवजन किसी वस्तु की लंबाई रुलर के सहारे सही-सही माप पा रहे थे बशर्ते वह वस्तु रुलर पर दर्ज संख्या शून्य के पास रखी हो. लेकिन वही वस्तु रुलर पर दर्ज किसी और संख्या पर रख दी जाती थी तो केवल 40 प्रतिशत युवजन सही माप बता पा रहे थे.

• कोई छात्रा कितने घंटे सोयी है ( समय गिनना)? सर्वेक्षण में शामिल 40 प्रतिशत युवजन इस सवाल का उत्तर ठीक-ठीक दे पाये. जो छात्र किसी संख्या में किसी संख्या से भाग देना सीख चुके थे, उनमें इस सवाल का सही उत्तर बता पाने वालों की तादाद 55 प्रतिशत थी.
 
• सर्वेक्षण के दौरान छात्रों को भारत का एक मानचित्र दिखाया गया.. छात्रों से मानचित्र के बारे में कई सवाल पूछे गये, जैसे: a) “ यह किस देश का नक्शा है?” 86% प्रतिशत ने सही जवाब दिया; b) “ इस देश की राजधानी का क्या नाम है?” 64% प्रतिशत ने सही जवाब दिया; c) “ आप किस राज्य में रहते हैं?” 79% प्रतिशत ने सही जवाब दिया; d) “ क्या आप नक्शे में अपने राज्य को खोज सकते हैं ?” केवल 42% प्रतिशत छात्र ही इस सवाल के उत्तर में राज्य को मानचित्र में खोज पाये.   
 

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