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आठवीं ऐनुअल स्टेटस् ऑव एजुकेशन रिपोर्ट(जारी 17 जनवरी 2013) की मुख्य बातें-

http://img.asercentre.org/docs/Publications/ASER%20Reports
/ASER_2012/nationalfinding.pdf


http://img.asercentre.org/docs/Publications/ASER%20Reports
/ASER_2012/fullaser2012report.pdf


-- कुल मिलाकर 6-14 आयु-वर्ग के बच्चों के नामांकन की दर 96 फीसदी से अधिक बनी हुई है। सभी राज्यों में निजी स्कूलों में नामांकन बढ़ा है।

-- ग्रामीण भारत में 6-14 आयु-वर्ग के बच्चों की नामांकन दर ऊच्च बनी हुई है। 2012 में ग्रामीण भारत में इस आयु वर्ग के 96.5 फीसदी से भी अधिक बच्चे स्कूलों में नामांकित थे। यह लगातार चौथा वर्ष है जब नामांकन दर 96 फीसदी या उससे अधिक है।

-- राष्ट्रीय स्तर पर 6-14 आयु वर्ग में उन बच्चों का अनुपात जो किसी स्कूल में नामांकित नहीं कुछ बढ़ा है। जहां 2011 में 3.3 फीसदी था वहीं 2012 में बढ़कर यह 3.5 फीसदी हो गया । यह बढ़ोत्तरी 11-14 आयु-वर्ग की लड़कियों के लिए सर्वाधिक है, इस वर्ग के लिए अनामांकित बच्चों का प्रतिशत 2011 में 5.2 फीसदी था जो साल 2012 में बढ़कर 6 फीसदी पर पहुंच गया।

-- राजस्थान और उत्तरप्रदेश में 11-14 आयु वर्ग की लड़कियों में उन लड़कियों का प्रतिशत जो स्कूल में नामांकित नहीं थीं, 2011 में क्रमश 8.9 फीसदी और 9.7 फीसदी था जो साल 2012 में भड़कर 11 फीसदी से अधिक हो गया।

-- राष्ट्रीय स्तर पर, 6-14 आयु-वर्ग के लिए निजी स्कूलों में नामांकन साल दर साल बढ़ा है। साल 2006 में सौ में अगर 18.7 बच्चे निजी स्कूलों में जा रहे थे तो साल 2012 में 28.3 फीसदी बच्चे निजी स्कूलों में जाने लगे। यानि बीते तीन सालों में निजी स्कूलों में दाखिले की दर 10 फीसदी प्रतिवर्ष रही है।

-- निजी स्कूलों में नामांकन में बढोत्तरी करीब-करीब सभी राज्यों में देखने को मिल रही है। 2012 में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, गोवा और मेघालय में 6-14 आयुवर्ग के 40 फीसदी से अधिक बच्चे निजी स्कूलों में नामांकित थे। केरल और मणिपुर के लिए यह प्रतिशत 60 से ज्यादा था।

-- देश के ग्रामीण हिस्से में, प्रारंभिक स्तर पर यानि कक्षा 1-8 के करीब एक चौथाई बच्चे चाहे वे निजी स्कूलों में पढ़ रहे हों या सरकारी स्कूलों में, पैसे देकर निजी ट्यूशन के लिए जाते हैं। सामान्यतया जो बच्चे ट्यूशन हासिल करते हैं उनका शिक्षण-स्तर उन बच्चों से बेहतर था जो ट्यूशन हासिल नहीं कर रहे थे

-- 2010 में राष्ट्रीय स्तर पर कक्षा 5 के आधे से अधिक (53.7 फीसदी) विद्यार्थी कक्षा 2 के स्तर का पाढ़ पढ़ पाने में सक्षम थे और ऐसे बच्चों का अनुपात गिरकर साल 2011 में 48.2 फीसदी पहुंचा तो साल 2012 में 46 फीसदी। पढ़ाई लिखाई के बुनियादी कौशल के मामले में गिरावट निजी स्कूलों में जा रहे बच्चों की तुलना में सरकारी स्कूलों में दिखाई दे रही है। सरकारी स्कूलों में कक्षा 5 के उन बच्चों का प्रतिशत जो कक्षा 2 के स्तर का पाठ पढ़ सकते हैं 2010 में 50.7 फीसदी था जो साल 2012 में गिरकर 41.7 फीसदी हो गया।

-- 2011 और 2012 के बीच कक्षा 5 में पढ़ने वाले सभी बच्चों के लिए, हरियाणा, बिहार मध्यप्रदेश महाराष्ट्र और केरल में पढ़ने के स्तर में बड़ी गिरावट(5 फीसदी प्वाईंट) देखी गई। महाराष्ट्र और केरल में तो निजी स्कूलों में जिनमें बड़े अनुपात में सहायता प्राप्त करने वाले स्कूल भी शामिल हैं, कक्षा 5 में पढ़ने की क्षमता में गिरावट दिखा रहे हैं।

-- 2012 को भारत में गणित के वर्ष के रुप में मनाया गया परन्तु भारतीय बच्चों के लिए बुनियादी गणित के मान से यह वर्ष खराब रहा। 2010 में 10 में 7(70.9 फीसदी) कक्षा 5 में नामांकित बच्चे दो अंकों का घटाव(जिसमें हासिल लेना पड़ता हो) कर सकते थे। 2011 में यह अनुपात घटकर 10 में 6(61 फीसदी) और 2012 में गिरकर 10 में से 5(53.5फीसदी) हो गया है। आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और केरल को छोड़कर हर बड़ा राज्य गणित कर पाने के स्तरों में भारी गिरावट के संकेत दिखा रहा है।

-- 2011 में सरकारी स्कूलों में कक्षा 5 में पढ़ने वाले बच्चों और 2012 में सरकारी स्कूलों में कक्षा 5 में पढ़ने वाले बच्चों की तुलना करें तो लगभग सभी राज्यों में बुनियादी घटाव करने की क्षमता में 10 प्रतिशत बिन्दु से अधिक की गिरावट देखा जा सकती है। इसमें अपवाद हैं बिहार, असम और तमिलनाडु जहां गिरावट कम है, आंध्रप्रदेश कर्नाटक और केरल में या तो 2011 की तुलना में सुधार हुआ है या खोई खास बढलाव नहीं हुआ है।

-- भारत में छोटे स्कूलों का अनुपात बढ़ रहा है। असर 2012 के दौरान कुल 14591 स्कूलों का अवलोकन किया गया। समय के साथ सरकारी प्राथमिक विद्याल्यों में 60 या उससे कम नामांकन वाले सरकारी प्राथमिक स्कूलो का अनुपात बढ़ा है। 2009 में यह 26.1 फीसदी था जो साल 2012 में बढ़कर 32.1 फीसदी हो गया।


-- प्राथमिक कक्षाओं में उन बच्चों का अनुपात भी बढ़ रहा है जो मल्टीग्रेड कक्षाओं में बैठते हैं। कक्षा 2 के लिए यह प्रतिशत 2009 में 55.8 था जो साल 2012 में बढ़कर 62.6 फीसदी हो गया। क्क्षा 4 के लिए यह प्रतिशत 2010 में 51 फीसदी से बढ़कर 2012 में 56.6 फीसदी हो गया है।

-- शिक्षा के अधिकार के मानकों के आधार पर छात्र शिक्षक अनुपात में समय के साथ सुधार दिख रहा है। 2010 में उन स्कूलों का अनुपात जो छात्र-शिक्षक अनुपात के मानको को पूरा कर रहे थे 38.9 फीसदी था जो साल 2012 में बढ़कर 42.8 फीसदी हो गया।

-- राष्ट्रीय स्तर पर स्कूलों में सुविधाओं में भी समय के साथ सुधार दिख रहा है। स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता में सुधार स्पष्ट दिख रहा है- 2012 में अवलोकित सभी स्कूलों में 73 फीसदी स्कूलों में पेयजल उपलब्ध था। उन विद्यालयों का अनुपात जिनमें उपयोग करने योग्य शौचालय है 2010 में 47.2 फीसदी से बढ़कर साल 2012 में 56.5 फीसदी हो गया है। अवलोगन किए गए स्कूलों में लगभग 80 फीसदी स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग से शौचालय की व्यवस्था थी। अवलोगन किए गए स्कूलों में 87.1 फीसदी स्कूलों में सर्वे के दिन देखा गया कि मध्याह्न भोजन दिया जा रहा है।


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