सवाल सेहत का

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भारतीय परिदृश्य
• साल 1990 में भारत में मातृ मृत्यु अनुपात(एमएमआर-मैटरनल मोरटालिटी रेशियो) 560 (प्रति 100000 जीवित शिशुओं के जन्म पर) था , साल 1995 में यह घटकर 460 हुआ, साल 2000 में यह अनुपात प्रति 1 लाख जीवित शिशुओं के जन्म पर 370 माताओं का था, साल 2005 में 280 तथा साल 2013 के दौरान यह अनुपात प्रति 1 लाख जीवित शिशुओं के जन्म पर 190 माताओं का था।

• भारत की तुलना में (एमएमआर: 190 प्रति 1लाख जीवित शिशुओं के जन्म पर) ब्राजील (एमएमआर: 69) और चीन (एमएमआर: 32) ने मातृ-मृत्यु की घटनाओं को कम करने में बेहतरीन प्रदर्शन किया है।

• एक भारतीय महिला के लिए आजीवन प्रसवकालीन कारणों से मृत्यु का शिकार होने की आशंका( 15 वर्ष की महिला के बारे में यह आशंका कि वह बच्चे को जन्म देते वक्त जान गंवा देगी) 190 में 1 की है जबकि चीनी महिला के लिए यह आशंका 1800 मामलों में 1 का तथा ब्राजील की महिला के मामले में यह आशंका 780 महिलाओं में 1 की है।

•अगर देशस्तर पर देखें तो विश्व में एक साल में जितनी महिलाओं ने प्रसवकालीन कारणों से जान गंवायी उसमें एक तिहाई महिलाएं सिर्फ दो देशों भारत(17 प्रतिशत- कुल 50 हजार) और नाइजीरिया(14 प्रतिशत- कुल 40 हजार) की थीं।
 
• प्रजनन-योग्य उम्र में पहुंची महिलाओं में मातृत्व जनित कारणों से मृत्यु को प्राप्त होने वाली महिलाओं की संख्या भारत में 6.7 प्रतिशत है जबकि चीन में 1.6 प्रतिशत और ब्राजील में 2.8 प्रतिशत।

• साल 2013 में मातृत्व जनित कारणों से मृत्यु को प्राप्त होने वाली 58 फीसदी महिलाएं इन दस देशों से हैं-: भारत (50000, 17%); नाइजीरिया (40000, 14%); कांगो (21000, 7%); ईथोपिया (13000, 4%); इंडोनेशिया (8800, 3%); पाकिस्तान (7900, 3%); तंजानिया (7900, 3%); केन्या (6300, 2%); चीन (5900, 2%); युगांडा (5900, 2%).

• भारत में मातृ मृत्यु दर 1990 से 2013 के बीच 65 प्रतिशत घटा है।




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