सवाल सेहत का

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विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) के ग्लोबल रिपोर्ट: मोर्टालिटी अट्रीब्युटेबल टू टोबैको(2012) नामक दस्तावेज के अनुसार

 
वैश्विक स्तर पर 30 साल या उससे अधिक की आयु में मृत्यु को प्राप्त होने वाले लोगों में तंबाकूजन्य कारणों से मृत्यु को प्राप्त होने वाले लोगों की संख्या 12% है जबकि भारत में 16% और पाकिस्तान में 17% और बांग्लादेश में 31%

भारत में गैर-संक्रामक रोगों से होने वाली मृत्यु-दर [1096 प्रति 100,000 आबादी पर] संक्रामक रोगों से होने वाली मृत्यु-दर के 3.3 गुना[336 प्रति 100,000 आबादी पर].ज्यादा है। गैर-संक्रामक रोगों से होने वाली मृत्यु में तंबाकूजन्य पदार्थों के सेवन से होने वाली मृत्यु के मामले 9% है जबकि संक्रामक रोगों से होने वाली मृत्यु में तंबाकूजन्य पदार्थों के सेवन से होने वाली मृत्यु के मामले 2%

भारत में पुरुषों में तंबाकूजन्य मृत्यु-दर 206 [ 30 साल और उससे अधिक आयु के प्रति 100,000 पुरुषों में] है जबकि महिलाओं में 13 [ 30 साल और उससे अधिक आयु की प्रति 100,000 महिलाओं में]. तंबाकूजन्य कारणों से होने वाली मृत्यु का अनुपात भारत के पुरुषों में 12% तथा महिलाओं के बीच 1% है।   

जहां तक गैर संक्रामक रोगों से होने वाली मौतों का प्रश्न है- इसमें ह्रदय रोगों से होने वाली मौतों की संख्या प्रति 100,000 व्यक्तियों (30 साल और इससे अधिक उम्र के) में 329 है, इसमें 5 फीसदी मौतों के मामले में कारक तंबाकू का सेवन है। श्वांसनली और फेफड़े के कैंसर से प्रति 100,000 व्यक्तियों के बीच 16 व्यक्ति मृत्यु का शिकार होते हैं और इसमें 58 फीसदी मामलों में मृत्यु का कारण तंबाकू का सेवन है।.

जहां तक संक्रामक रोगों से होने वाली मृत्यु का प्रश्न है- भारत में निचली श्वांसनली के रोगों से होने वाली मौतों में 5 फीसदी मौतें तंबाकूजन्य पदार्थों के सेवन से होती हैं जबकि यक्ष्मा(टीबी) से होने वाली मौतों में 4 फीसदी मौतों का कारण तंबाकूजन्य पदार्थ हैं।. 

फेफड़े के कैंसर से विश्व में जितने लोग मौत का शिकार होते हैं उसमें 71 फीसदी मामले तंबाकूजन्य पदार्थों के सेवन से होने वाले फेफड़े के कैंसर के होते हैं। असाध्य बीमारियों से विश्व में जितने लोग मृत्यु का शिकार होते हैं उसमें 42% फीसदी मामले तंबाकूजन्य पदार्थ के सेवन से होने वाली बीमारियों के हैं।.

धूम्रपान से प्रति वर्ष विश्व में 50 लाख लोगों की मृत्यु होती है जबकि तकरीबन 600,000 लोग पैसिव स्मोकिंग के कारण मृत्यु के शिकार होते हैं।

अनुमानों के अनुसार ऐसी आशंका व्यक्त की गई है कि अगले दो दशकों में तंबाकूजन्य पदार्थों के सेवन से दुनिया में तकरीबन 80 लाख लोग मृत्यु का शिकार होंगे जिसमें सर्वाधिक संख्या(80 फीसदी) निम्न और मध्यवर्ती आमदनों वाले देशों के लोगों की होगी।

यदि प्रभावकारी कदम नहीं उठाये गए तो 21 वीं सदी में तंबाकूजन्य पदार्थों के सेवन से तकरीबन 1 अरब लोगों की मृत्यु होगी। एडस-एचआईवी संक्रमण, टीबी और मलेरिया को एक साथ मिलाकर देखें तो इनके कारण जितने लोगों की मृत्यु होती है उससे कहीं ज्यादा लोगों की मृत्यु तंबाकूजन्य पदार्थों के सेवन से होती है।.
 
 


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