सवाल सेहत का

सवाल सेहत का

 
 
विमेन ऑन द फ्रन्ट लाइनस् ऑव हेल्थकेयर, स्टेट ऑव द वर्ल्डस् मदर २०१० नामक दस्तावेज के अनुसार, http://www.savethechildren.in/files/SOWM2010_FullReport_email.pdf:
 

प्रति वर्ष विकासशील देशों में ५ करोड़ महिलाओं का प्रसव बगैर किसी प्रशिक्षित चिकित्सीय पेशेवर की देखभाल के होता है। विकासशील देशों में हर साल ८० लाख ८० हजार नवजात शिशु या बच्चे उन बीमारियों से मरते हैं जिनके उपचार सहज ही संभव है।


• विश्वस्तर पर देखें तो कुल ५७ देश ऐसे हैं जहां स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी है। इसका आशय यह है कि इन देशों में १० हजार व्यक्तियों के लिए न्यूनतम जरुरी (२३ चिकित्सक, नर्स और धाय(मिडवाईफ)) चिकित्साकर्मियों की संख्या भी मौजूद नहीं है। उपरोक्त कुल ५७ देशों में ३६ देश उपसहारीय अफ्रीका में हैं। इन देशों में उपरोक्त कमी को पूरा करने के लिए २० लाख ४० हजार चिकित्साकर्मियों की जरुरत पड़ेगी।

• उपरोक्त कुल ५७ देशों में ३६ देश उपसहारीय अफ्रीका में हैं और इन देशों में विश्व की आबादी का कुल १२ फीसदी हिस्सा निवास करता है। इन्हीं देशों के बारे में एक तथ्य यह भी है कि विश्व में होने वाली बीमारियों का ३६ फीसदी हिस्सा इन्हीं के माथे है जबकि विश्व में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों का कुल ३ फीसदी हिस्सा इन देशों में मौजूद है।दक्षिण और पूर्वी एशिया में विश्व में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों का १२ फीसदी हिस्सा उपलब्ध है जबकि दुनिया के इस हिस्से में विश्व की बीमारियों का २९ फीसदी हिस्सा घटित होता है।

• जहां तक कुल शिशु मृत्यु का सवाल है, उसमें 41 फीसदी नवजात शिशु होते हैं जो जन्म के एक महीने के अंदर कालकवलित होते हैं।

• विकासशील देशों में जननि और नवजात दोनों को चिकित्सीय देखरेख बहुत कम उपलब्ध है। इस वजह से शिशु और मातृ-मृत्यु का ९९ फीसदी घटनाएं इन्हीं देशों में होती हैं।

• यदि सारी स्त्रियों और बच्चों को जरुरी चिकित्सीय देखरेख का पूरा पैकेज हासिल हो तो विश्व में सालाना ढाई लाख महिलाओं और साढ़े ५० लाख बच्चों की जिन्दगी बचायी जा सकती है।

• हर साल ८० लाख ८० हजार बच्चे ५ साल की उम्र पूरी करने से पहले मर जाते हैं।

• गर्भावस्था या प्रसवकालीन जटिलताओं के कारण हर साल  343,000 महिलाओं की मृत्यु होती है।
• सेहत से संबंधित सहस्राब्दी विकास लक्ष्य को पूरा करने और मानव जीवन को बचाने के लिए विकासशील देशो में अभी ४० लाख ३० हजार स्वास्थ्यकर्मियों की और जरुरत है।

• ग्याहरवें एनुअल मदर्स इन्डेक्स से १६० देशों (४३ विकसित ऍर ११७ विकासशील देश) में माताओं की स्थितियों को सूचीबद्ध किया गया है। इससे पता चलता है कि किन देशों में माताओं की स्थिति बेहतर और किन देशों में चकित्सीय देखभाल के लिहाज से बदतर है।

• इस सूची में न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया सहित योरीपीय देश अग्रणी है जबकि उपसहारीय अफ्रीकी देश सर्वाधिक पिछड़े।  
 



Related Articles

 

Write Comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Video Archives

Archives

share on Facebook
Twitter
RSS
Feedback
Read Later